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बंदी ने किया आत्महत्या का प्रयास
Pilibhit
Updated Sat, 16 Feb 2013 05:32 AM IST
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पीलीभीत। जिला कारागार में निरुद्ध एक 28 वर्षीय बंदी ने पेट और सिर पर किसी चीज से वार कर आत्महत्या करने का प्रयास किया। उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जेल प्रशासन ने उसके मानसिक रोग से ग्रसित होने का दावा किया है। हफ्ते भर में जेल के भीतर हुई दूसरी घटना से जेल अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
थाना अमरिया के गांव हरिहरपुर निवासी सूरजपाल पर हत्या के प्रयास, अपहरण समेत तीन मुकदमे अमरिया थाने में दर्ज है। अमरिया पुलिस ने जुलाई 2012 को उसे बंदी बनाकर अदालत भेजा था, जहां से कोर्ट ने जेल भेज दिया। जेलर सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि जेल में आने के बाद बंदी सूरजपाल डिप्रेशन का शिकार हो गया। उसकी मानसिक स्थित बिगड़ने पर जेल और जिला अस्पताल के डॉक्टरों से इलाज कराया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बनारस के एक अस्पताल में रेफर किया था। जहां कई रोज तक इलाज होने के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ था। उसे डेढ़ माह पहले बनारस से लाकर उसे जेल अस्पताल में रखा गया था। शुक्रवार को वह शौचालय गया और वहीं अपने पेट और सिर पर किसी चीज से वार कर लिया। अन्य बंदियों के शोरशराबा मचाने पर वह जेल अस्पताल के डॉक्टरों के साथ मौके पर पहुंच गए। लहूलुहान बंदी को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेजवाया। जिला अस्पताल में भर्ती बंदी सूरजपाल काफी कुदरने के बाद भी घटना के बाबत कुछ नहीं बता रहा था। वह सिर्फ प्रदीप भैया पेट न फाड़ो की रट लगाए था। घायल बंदी का इलाज कर रहे जिला अस्पताल के फिजीशिन डॉ. पीके मिश्रा ने बताया कि बंदी का सिर किसी चीज से टकराकर फूटा है, जबकि पेट पर धारदार चीज लगी है। बता दें कि दस फरवरी को भी नशेड़ी बंदी बली अहमद निवासी रजागंज कोतवाली पूरनपुर ने ड्रग्स न मिलने पर सिर फोड़ लिया था। हफ्ते भर में हुई दूसरी घटना से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
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थाना अमरिया के गांव हरिहरपुर निवासी सूरजपाल पर हत्या के प्रयास, अपहरण समेत तीन मुकदमे अमरिया थाने में दर्ज है। अमरिया पुलिस ने जुलाई 2012 को उसे बंदी बनाकर अदालत भेजा था, जहां से कोर्ट ने जेल भेज दिया। जेलर सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि जेल में आने के बाद बंदी सूरजपाल डिप्रेशन का शिकार हो गया। उसकी मानसिक स्थित बिगड़ने पर जेल और जिला अस्पताल के डॉक्टरों से इलाज कराया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बनारस के एक अस्पताल में रेफर किया था। जहां कई रोज तक इलाज होने के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ था। उसे डेढ़ माह पहले बनारस से लाकर उसे जेल अस्पताल में रखा गया था। शुक्रवार को वह शौचालय गया और वहीं अपने पेट और सिर पर किसी चीज से वार कर लिया। अन्य बंदियों के शोरशराबा मचाने पर वह जेल अस्पताल के डॉक्टरों के साथ मौके पर पहुंच गए। लहूलुहान बंदी को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेजवाया। जिला अस्पताल में भर्ती बंदी सूरजपाल काफी कुदरने के बाद भी घटना के बाबत कुछ नहीं बता रहा था। वह सिर्फ प्रदीप भैया पेट न फाड़ो की रट लगाए था। घायल बंदी का इलाज कर रहे जिला अस्पताल के फिजीशिन डॉ. पीके मिश्रा ने बताया कि बंदी का सिर किसी चीज से टकराकर फूटा है, जबकि पेट पर धारदार चीज लगी है। बता दें कि दस फरवरी को भी नशेड़ी बंदी बली अहमद निवासी रजागंज कोतवाली पूरनपुर ने ड्रग्स न मिलने पर सिर फोड़ लिया था। हफ्ते भर में हुई दूसरी घटना से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
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