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दो परिवारों की बिखर गईं खुशियां
Pilibhit
Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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अमरिया। उत्तराखंड में हुई दुर्घटना से भौनी गांव के दो परिवारों के सपने बिखर गए हैं। दोनो परिवारों ने घर में शादी के सपने संजोए थे, लेकिन दुर्घटना में दो सगे भाइयों तथा दूसरे परिवार के जवान बेटे की मौत से सब कुछ बिखर गया है। गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
गांव निवासी हर प्रसाद का भरा पूरा परिवार है। उनके पांच बेटों में से क्रमश: महेंद्र और बीरेंद्र की शादी हो चुकी है, जबकि धीरेंद्र, नरेंद्र और सुरेंद्र के घर बसाने का सपना संजोया गया था। धीरेंद्र की शादी की बात भी चल रही थी, लेकिन किसी को क्या पता था कि कुदरत को कुछ और ही मंजूर है। बृहस्पतिवार की तड़के धीरेंद्र हमेशा की तरह तैयार हुआ। रोटी के साथ चाय पी और काम पर चला गया था। दोपहर में उसके निधन की खबर आई तो एकबारगी किसी को विश्वास नहीं हुआ। घर में महिलाएं चीख पड़ीं। सभी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। उधर गांव निवासी रामभरोसे की पत्नी कई वर्षों पहले ही इन बच्चों को छोड़कर चली गई थी, जिसकी बाद में मौत हो गई थी।
रामभरोसे ने ही तीनों पुत्रों को पाल-पोसकर बड़ा किया। उनके तीन बेटे क्रमश: कमल, प्रेमपाल और अर्जुन उनकी बुढ़ापे की लाठी थे। उन्होंने कमल की शादी बरेली के मीरगंज कसबे से तय कर दी थी। उसकी 21 जून को शादी की तिथि भी तय हुई थी। रामभरोसे अब सबसे यही कहता था, धूमधाम से बारात ले चलेंगे। बहू आ जाएगी तो उसकी गृहस्थी फिर से ठीक हो जाएगी और अब बुढ़ापे में रोटी नहीं सेंकनी पड़ेगी। इधर जब दो बेटों की मौत की खबर आई तो रामभरोसे पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़े। बेटो के मरने की खबर सुनते ही वह बेहोश होकर गिर पड़ा।
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बाक्स
रामभरोसे के बेटों में अर्जुन ही बचा
रामभरोसे का 14 वर्षीय बेटा अर्जुन ही उसकी दुनिया का एकमात्र सहारा बचा है। भाइयों की मौत की खबर सुनकर अर्जुन का रो-रोकर बुरा हाल है। वह उत्तराखंड से पिता को दिलासा भी दिला रहा था।
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गांव निवासी हर प्रसाद का भरा पूरा परिवार है। उनके पांच बेटों में से क्रमश: महेंद्र और बीरेंद्र की शादी हो चुकी है, जबकि धीरेंद्र, नरेंद्र और सुरेंद्र के घर बसाने का सपना संजोया गया था। धीरेंद्र की शादी की बात भी चल रही थी, लेकिन किसी को क्या पता था कि कुदरत को कुछ और ही मंजूर है। बृहस्पतिवार की तड़के धीरेंद्र हमेशा की तरह तैयार हुआ। रोटी के साथ चाय पी और काम पर चला गया था। दोपहर में उसके निधन की खबर आई तो एकबारगी किसी को विश्वास नहीं हुआ। घर में महिलाएं चीख पड़ीं। सभी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। उधर गांव निवासी रामभरोसे की पत्नी कई वर्षों पहले ही इन बच्चों को छोड़कर चली गई थी, जिसकी बाद में मौत हो गई थी।
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रामभरोसे ने ही तीनों पुत्रों को पाल-पोसकर बड़ा किया। उनके तीन बेटे क्रमश: कमल, प्रेमपाल और अर्जुन उनकी बुढ़ापे की लाठी थे। उन्होंने कमल की शादी बरेली के मीरगंज कसबे से तय कर दी थी। उसकी 21 जून को शादी की तिथि भी तय हुई थी। रामभरोसे अब सबसे यही कहता था, धूमधाम से बारात ले चलेंगे। बहू आ जाएगी तो उसकी गृहस्थी फिर से ठीक हो जाएगी और अब बुढ़ापे में रोटी नहीं सेंकनी पड़ेगी। इधर जब दो बेटों की मौत की खबर आई तो रामभरोसे पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़े। बेटो के मरने की खबर सुनते ही वह बेहोश होकर गिर पड़ा।
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रामभरोसे के बेटों में अर्जुन ही बचा
रामभरोसे का 14 वर्षीय बेटा अर्जुन ही उसकी दुनिया का एकमात्र सहारा बचा है। भाइयों की मौत की खबर सुनकर अर्जुन का रो-रोकर बुरा हाल है। वह उत्तराखंड से पिता को दिलासा भी दिला रहा था।