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युवाओं के जीवन में तनाव घोल रहा सोशल साइट्स का चलन
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Fri, 27 Jul 2018 12:37 AM IST
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सोशल साइट्स का बढ़ता चलन युवाओं को नए-नए दोस्त देने के साथ ही उनके जीवन में तनाव का कारण भी बनता जा रहा है। इसके बेजा इस्तेमाल से कई बार फेक जानकारी को ही सही मान लिया जाता है। जिसके घातक परिणाम भी सामने आते हैं। इसके अलावा पर्सनल जानकारियों का पहले तो आदान प्रदान कर दिया जाता है, लेकिन बाद में यही तनाव की बड़ी वजह बनती जा रही है। डॉक्टरों की मानें तो सोशल साइट्स की वजह से युवाओं में असंतुष्टि की भावना बढ़ती जा रही है। जिसकी वजह से उन्हें किसी भी काम को करने में खासी दिक्कत महसूस होती है। युवाओं में सोशल मीडिया इस कदर हावी हो चुका है कि वे इसके बिना कोई काम नहीं कर पाते हैं।
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ये हैं नकारात्मक प्रभाव
- आपसी समझ में कमी होना
- संतुष्ट नहीं होना
- ध्यान भटकना
- सेहत में नुकसान
- अपने से दूर होना
- दुर्घटना का शिकार होना
- नशे की प्रवृत्ति
क्या कहना है युवाओं का
एंड्रायड फोन का इस्तेमाल करते हुए चार वर्ष हो गए हैं। शुरुआत में तो मोबाइल का कम प्रयोग करता था, लेकिन अब इसकी आदत ऐसी पड़ गई कि रात को नेट के प्रयोग के बिना नींद नहीं आती है।
-शहबाज
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लंबे समय से मोबाइल पर इंटरनेट का प्रयोग कर रहा हूं। इंटरनेट पर दोस्तों के कई ग्रुप बने हैं। जिससे सब से जुड़ाव बना रहता है, लेकिन अब फेक पोस्ट का चलन बढ़ा है, सतर्क रहने की जरूरत है।
विज्ञापन
-सरवन ढिल्लो
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हाईपरटेंशन व अनिद्रा का हो रहे शिकार
मोबाइल व सोशल साइट्स के अधिक प्रयोग करने से युवा पीढ़ी तनाव से घिरती जा रही है। इससे वे हाईपरटेंशन, अनिद्रा व माइग्रेन जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। बेहतर होगा कि मोबाइल फोन का सीमित इस्तेमाल करें। भरपूर नींद लें और अभिभावक भी बच्चों पर पूरी निगाह रखें।
-डॉ. सीबी चौरसिया, फिजीशियन, जिला अस्पताल
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ये हैं नकारात्मक प्रभाव
- आपसी समझ में कमी होना
- संतुष्ट नहीं होना
- ध्यान भटकना
- सेहत में नुकसान
- अपने से दूर होना
- दुर्घटना का शिकार होना
- नशे की प्रवृत्ति
क्या कहना है युवाओं का
एंड्रायड फोन का इस्तेमाल करते हुए चार वर्ष हो गए हैं। शुरुआत में तो मोबाइल का कम प्रयोग करता था, लेकिन अब इसकी आदत ऐसी पड़ गई कि रात को नेट के प्रयोग के बिना नींद नहीं आती है।
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-शहबाज
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लंबे समय से मोबाइल पर इंटरनेट का प्रयोग कर रहा हूं। इंटरनेट पर दोस्तों के कई ग्रुप बने हैं। जिससे सब से जुड़ाव बना रहता है, लेकिन अब फेक पोस्ट का चलन बढ़ा है, सतर्क रहने की जरूरत है।
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-सरवन ढिल्लो
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हाईपरटेंशन व अनिद्रा का हो रहे शिकार
मोबाइल व सोशल साइट्स के अधिक प्रयोग करने से युवा पीढ़ी तनाव से घिरती जा रही है। इससे वे हाईपरटेंशन, अनिद्रा व माइग्रेन जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। बेहतर होगा कि मोबाइल फोन का सीमित इस्तेमाल करें। भरपूर नींद लें और अभिभावक भी बच्चों पर पूरी निगाह रखें।
-डॉ. सीबी चौरसिया, फिजीशियन, जिला अस्पताल