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सवाल: आखिर डैम के दूसरे किनारे तक कैसे पहुंचा बाघ का शव
Updated Thu, 29 Mar 2018 08:19 PM IST
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सवाल: डैम के दूसरे किनारे तक कैसे पहुंचा बाघ का शव
किसी के गले नहीं उतर रही वन विभाग की कहानी
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा/पीलीभीत। शारदा सागर डैम में बाघ के शव को वन विभाग फीडर नहर में गिरने के बाद बहते हुए दूसरे किनारे तक पहुंचने की बात कह रहा है लेकिन वनविभाग की यह कहानी किसी के भी गले नहीं उतर रही है। बाघ के हल्दीडेंगा पुल से डैम के किनारे तक पहुंचने की जो कहानी वनविभाग गढ़ रहा है उसमें कई सवाल उठ रहे हैं।
टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में हल्दीडेंगा पुल के निकट 25 मार्च को एक बाघ देखा गया था जिसके गले में घाव बताया गया था। इसकी सूचना पर वनविभाग की टीम ने 26 मार्च से उसकी तलाशी शुरू की थी। उसे बेहोश कर पकड़ने के लिए लखनऊ से ट्रैक्यूलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ. उत्कर्ष शुक्ला एवं वनसंरक्षक तीन दिन से डेरा जमाए हुए थे। अधिकारियों की मौजूदगी में उसकी तलाश की जा रही थी। बुधवार शाम का भी डीएफओ कैलाश प्रकाश ने उसकी लोकेशन मिलने एवं तलाशी जारी होने की बात कही थी। अब एक दिन अचानक बृहस्पतिवार को शारदा डैम के किनारे मिले बाघ के शव को हल्दीडेंगा पुल के निकट घायल मिले बाघ का ही बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है जो बाघ 25-26 मार्च को हल्दीडेंगा क्षेत्र में देखा गया था। वह बाइफरकेशन से निकलकर शारदा डैम तक जाने वाली चार किमी लंबर फीडर नहर और इसके शारदा डैम में करीब डेढ़ किमी दूर कैसे पहुंचा। वहीं दूसरा बड़ा सवाल है कि यदि यही हल्दीडेंगा पुल के निकट देखा गया बाघ ही है तो उसे नहर में गिरने से लेकर नहर के दूसरे किनारे तक पहुंचने तक किसी ने देखा क्यों नहीं। क्योंकि शारदा सागर डैम में मछली का ठेका न होने के बाद भी अवैध रूप से प्रतिदिन 50 से अधिक नावों से मछलियों का शिकार किया जा रहा है।
तीसरा बड़ा सवाल यह है कि बाघ की तलाश में वनविभाग ने 26 मार्च को हल्दीडेंगा पुल के निकट ही एक पड्डा बांधा था जो दूसरे दिन गायब मिला। यदि बाघ ने 26-27 की रात में इस पड्डे को मार दिया और इसके बाद पानी पीते समय फीडर नहर में डूब गया तो 48 घंटे में ही वह पानी में बहकर कैसे डैम के दूसरे किनारे तक पहुुंच गया। चौथा सवाल है यदि बाघ पानी में बहता हुए पहुंचा तो उसके ऊपर एवं नीचे नरकुल कहां से आ गया।
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किसी के गले नहीं उतर रही वन विभाग की कहानी
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा/पीलीभीत। शारदा सागर डैम में बाघ के शव को वन विभाग फीडर नहर में गिरने के बाद बहते हुए दूसरे किनारे तक पहुंचने की बात कह रहा है लेकिन वनविभाग की यह कहानी किसी के भी गले नहीं उतर रही है। बाघ के हल्दीडेंगा पुल से डैम के किनारे तक पहुंचने की जो कहानी वनविभाग गढ़ रहा है उसमें कई सवाल उठ रहे हैं।
टाइगर रिजर्व की बराही रेंज में हल्दीडेंगा पुल के निकट 25 मार्च को एक बाघ देखा गया था जिसके गले में घाव बताया गया था। इसकी सूचना पर वनविभाग की टीम ने 26 मार्च से उसकी तलाशी शुरू की थी। उसे बेहोश कर पकड़ने के लिए लखनऊ से ट्रैक्यूलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ. उत्कर्ष शुक्ला एवं वनसंरक्षक तीन दिन से डेरा जमाए हुए थे। अधिकारियों की मौजूदगी में उसकी तलाश की जा रही थी। बुधवार शाम का भी डीएफओ कैलाश प्रकाश ने उसकी लोकेशन मिलने एवं तलाशी जारी होने की बात कही थी। अब एक दिन अचानक बृहस्पतिवार को शारदा डैम के किनारे मिले बाघ के शव को हल्दीडेंगा पुल के निकट घायल मिले बाघ का ही बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है जो बाघ 25-26 मार्च को हल्दीडेंगा क्षेत्र में देखा गया था। वह बाइफरकेशन से निकलकर शारदा डैम तक जाने वाली चार किमी लंबर फीडर नहर और इसके शारदा डैम में करीब डेढ़ किमी दूर कैसे पहुंचा। वहीं दूसरा बड़ा सवाल है कि यदि यही हल्दीडेंगा पुल के निकट देखा गया बाघ ही है तो उसे नहर में गिरने से लेकर नहर के दूसरे किनारे तक पहुंचने तक किसी ने देखा क्यों नहीं। क्योंकि शारदा सागर डैम में मछली का ठेका न होने के बाद भी अवैध रूप से प्रतिदिन 50 से अधिक नावों से मछलियों का शिकार किया जा रहा है।
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तीसरा बड़ा सवाल यह है कि बाघ की तलाश में वनविभाग ने 26 मार्च को हल्दीडेंगा पुल के निकट ही एक पड्डा बांधा था जो दूसरे दिन गायब मिला। यदि बाघ ने 26-27 की रात में इस पड्डे को मार दिया और इसके बाद पानी पीते समय फीडर नहर में डूब गया तो 48 घंटे में ही वह पानी में बहकर कैसे डैम के दूसरे किनारे तक पहुुंच गया। चौथा सवाल है यदि बाघ पानी में बहता हुए पहुंचा तो उसके ऊपर एवं नीचे नरकुल कहां से आ गया।
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