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कहीं अफसरों की मिलीभगत तो नहीं.. इसलिए दबा दी जांच
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पीलीभीत। विकास विभाग का कूड़ेदान घोटाला ग्राम प्रधानों और सचिवों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि लाखों के इस घोटाले में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनके कंधों पर इसकी जांच की जिम्मेदारी है। यही वजह है कि घोटाला उजागर होने के बाद भी यह अभिलेखों में दफन है। पांच माह बीतने के बाद भी डीपीआरओ अब तक इसकी जांच पूरी नहीं कर सके हैं। प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी ने इसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश तो दिए लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो सका है। जांच को लेकर अफसर ही संजीदा दिखायी नहीं दे रहे हैं।
करीब चार माह पूर्व मरौरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत कैंच में कूड़ेदान खरीद में घोटाला उजागर होने पर सख्ती का दावा करने वाले अफसर अब बैकफुट पर हैं। 1800 वाला कूड़ेदान 5500 रुपये में खरीदने के मामले में की जाने वाली कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। यह अकेले ग्राम पंचायत कैंच का मामला नहीं है बल्कि हरेक ग्राम पंचायत में इसी तरह कूड़ेदानों की खरीद में घपला किया गया है। करीब एक हजार से अधिक कूड़ेदान जिले की ग्राम पंचायतों में रखे गए हैं। इनकी कीमत 18 लाख से अधिक नहीं है, लेकिन भुगतान 55 लाख का हुआ है। तत्कालीन सीडीओ विजय कृष्ण भागवत की जांच में गड़बड़ी पकड़े जाने पर कैंच ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए। ग्राम पंचायत सचिव को भी निलंबित किया गया लेकिन कुछ दिन बाद ही उसे गुपचुप तरीके से बहाल कर दिया गया। इसके कुछ दिन बाद ही जिले में दौरे पर आए प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी के संज्ञान में यह प्रकरण पहुंचा तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए डीएम को जांच के आदेश दिए। जांच के लिए समिति गठित करने की बात कही गई लेकिन दोषी प्रधानों, सचिवों और ठेकेदारों पर अफसरों ने अब तक आंच नहीं आने दी है।
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करीब चार माह पूर्व मरौरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत कैंच में कूड़ेदान खरीद में घोटाला उजागर होने पर सख्ती का दावा करने वाले अफसर अब बैकफुट पर हैं। 1800 वाला कूड़ेदान 5500 रुपये में खरीदने के मामले में की जाने वाली कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। यह अकेले ग्राम पंचायत कैंच का मामला नहीं है बल्कि हरेक ग्राम पंचायत में इसी तरह कूड़ेदानों की खरीद में घपला किया गया है। करीब एक हजार से अधिक कूड़ेदान जिले की ग्राम पंचायतों में रखे गए हैं। इनकी कीमत 18 लाख से अधिक नहीं है, लेकिन भुगतान 55 लाख का हुआ है। तत्कालीन सीडीओ विजय कृष्ण भागवत की जांच में गड़बड़ी पकड़े जाने पर कैंच ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए। ग्राम पंचायत सचिव को भी निलंबित किया गया लेकिन कुछ दिन बाद ही उसे गुपचुप तरीके से बहाल कर दिया गया। इसके कुछ दिन बाद ही जिले में दौरे पर आए प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी के संज्ञान में यह प्रकरण पहुंचा तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए डीएम को जांच के आदेश दिए। जांच के लिए समिति गठित करने की बात कही गई लेकिन दोषी प्रधानों, सचिवों और ठेकेदारों पर अफसरों ने अब तक आंच नहीं आने दी है।
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