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वॉच टावर से निगरानी करेंगे वन वॉचर
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पीलीभीत। मानसून के साथ जंगल में घुसपैठिए भी सक्रिय हो जाते है। जिसके चलते अफसरों ने सख्ती करनी शुरू कर दी है। नियमित रूप से मानसून गश्त करने के निर्देश जारी किए गए है। इधर अवैध घुसपैठ के मामले में अतिसंवेदनशील टाइगर रिजर्व की हरिपुर रेंज पर विशेष नजर रखी जा रही है। इसके लिए रेंज में तैनात दस वन वॉचरों को ड्यूटी के दौरान जंगल क्षेत्र में बने वॉच टावरों पर ही ठहरने के निर्देश दिए गए है। वॉचरों की सुविधा के लिए विभागीय स्तर से रसोई गैस भी उपलब्ध कराने का निर्णय किया गया है।
बरसात शुरू होते ही जंगल के रास्तों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है। जिससे जंगल क्षेत्र में गश्त करने में काफी मुश्किल शुरू हो जाती है। वहीं इन दिनों जंगल क्षेत्र के अंतर्गत सॉल के पुराने वृक्षों की जड़ों में कटरुआ भी पैदा होने लगते हैं। बाजारों में इसकी मांग बढ़ने लगती है। जिसके चलते जंगल सीमा से सटे इलाके के लोग अवैध रूप से घुसपैठ कर जान जोखिम में डालकर कटरुआ बीनने के लिए जंगल में पहुंच जाते है। तमाम सख्ती के बाद भी इसपर अंकुश नहीं लगता है। इसके अलावा शिकार से जुड़े अन्य अपराधी भी सक्रिय हो जाते है। टाइगर रिजर्व की हरीपुर रेंज इस मामले में सबसे संवेदनशील मानी जाती है। इस सबको ध्यान में रखते हुए अफसरों ने वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए नियमित रूप से जंगल गश्त करने के सभी रेंजों में आदेश जारी किए। इधर हरीपुर पर विशेष नजर रखी जा रही है। वन अपराधी रात के समय जंगल क्षेत्र में प्रवेश न कर सके, इसके लिए ड्यूटी के दौरान वन वॉचरों को जंगल क्षेत्र में बने वॉच टॉवरों पर ही ठहरने के आदेश दिए गए है। खानपीने का ध्यान रखते हुए विभागीय स्तर से हरीपुर रेंज के दस वन वॉचरों को रसोई गैस उपलब्ध कराने के भी आदेश दिए गए है। फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन ने बताया कि बरसात के दौरान जंगल क्षेत्र में अवैध घुसपैठ न हो सके, इसके लिए जरूरी निर्देश दिए गए है। हरीपुर रेंज पर विशेष नजर रखने के लिए वन वॉचरों को वॉच टावरों पर ही रुकने के लिए कहा गया है।
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बरसात शुरू होते ही जंगल के रास्तों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है। जिससे जंगल क्षेत्र में गश्त करने में काफी मुश्किल शुरू हो जाती है। वहीं इन दिनों जंगल क्षेत्र के अंतर्गत सॉल के पुराने वृक्षों की जड़ों में कटरुआ भी पैदा होने लगते हैं। बाजारों में इसकी मांग बढ़ने लगती है। जिसके चलते जंगल सीमा से सटे इलाके के लोग अवैध रूप से घुसपैठ कर जान जोखिम में डालकर कटरुआ बीनने के लिए जंगल में पहुंच जाते है। तमाम सख्ती के बाद भी इसपर अंकुश नहीं लगता है। इसके अलावा शिकार से जुड़े अन्य अपराधी भी सक्रिय हो जाते है। टाइगर रिजर्व की हरीपुर रेंज इस मामले में सबसे संवेदनशील मानी जाती है। इस सबको ध्यान में रखते हुए अफसरों ने वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए नियमित रूप से जंगल गश्त करने के सभी रेंजों में आदेश जारी किए। इधर हरीपुर पर विशेष नजर रखी जा रही है। वन अपराधी रात के समय जंगल क्षेत्र में प्रवेश न कर सके, इसके लिए ड्यूटी के दौरान वन वॉचरों को जंगल क्षेत्र में बने वॉच टॉवरों पर ही ठहरने के आदेश दिए गए है। खानपीने का ध्यान रखते हुए विभागीय स्तर से हरीपुर रेंज के दस वन वॉचरों को रसोई गैस उपलब्ध कराने के भी आदेश दिए गए है। फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन ने बताया कि बरसात के दौरान जंगल क्षेत्र में अवैध घुसपैठ न हो सके, इसके लिए जरूरी निर्देश दिए गए है। हरीपुर रेंज पर विशेष नजर रखने के लिए वन वॉचरों को वॉच टावरों पर ही रुकने के लिए कहा गया है।
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