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टाइगर रिजर्व के किनारे होगी जालीदार फेसिंग
Updated Fri, 30 Mar 2018 07:43 PM IST
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टाइगर रिजर्व के किनारे होगी जालीदार फेंसिंग
वनसंरक्षक ने शासन को भेजा प्रस्ताव
30 पीबीटीपी 13
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। टाइगर रिजर्व के जंगलों से बाहर आ रहे बाघों को रोकने के लिए अब सोलर फेंसिंग के स्थान पर जालीदार (चैनलिंक) फेसिंग कराई जाएगी। इसके लिए वनसंरक्षक ने शासन को प्रस्ताव भेजा है।
टाइगर रिजर्व के जंगल से सटे क्षेत्रों में बाघों के बाहर आने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इस पर अंकुश लगाने लिए क्षेत्र के किसान काफी समय से फेंसिंग की मांग करते आ रहे हैं। पिछले एक साल में बाघ के हमलों में गई लोगों के जान गंवाने के बाद चेते वनविभाग एवं शासन ने सोलर तार फेसिंग को स्वीकृति दी है। इसमें विधायक निधि से मिली धनराशि से कुछ स्थानों पर तार फेंसिंग का काम शुरू भी करा दिया गया है जबकि लगभग एक साल पहले माधोटांडा क्षेत्र के हल्दीडेंगा में जंगल किनारे सोलर तार फेंसिंग कराई जा चुकी है। यह तार फेसिंग कामयाब नहीं हो पा रही है। जहां एक ओर इसके तारों की चोरी आसान है वहीं कई बार वन्यजीव भी इसे तोड़कर दूसरी ओर आ जाते हैं। इसके चलते तार फेंसिंग कामयाब नहीं हो पा रही है। जंगल की सीमा को सुरक्षित करने का यह तरीका पीलीभीत टाइगर रिजर्व सहित कुछ स्थानों पर ही अपनाया जा रहा है। जबकि रणथम्भौर के टाइगर रिजर्व के किनारे पत्थरों की दीवार बना दी गई है। इसको देखते हुए अब वनसंरक्षक पीपी सिंह ने टाइगर रिजर्व के किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के उद्देश्य से सोलर तार फेसिंग के स्थान पर जालीदार फेंसिंग (चैनलिंक फेंसिंग) कराने का निर्णय लिया है। इस बाबत उन्होंने शासन को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि सोलर फेंसिंग की अपेक्षा चैनलिंक महंगी व्यवस्था है लेकिन यह काफी सुरक्षित और मजबूत है जिससे न तो वन्यजीव जंगल से बाहर आ सकेंगे और नहीं ग्रामीण तार काटकर या चोरी कर जंगल में जा सकेंगे। इसकी मरम्मत भी तार फेंसिंग की अपेक्षा आसान और सस्ती है।
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जंगल से बाहर रहे वन्यजीवों को रोकने के लिए तार फेंसिंग कराई जा रही है लेकिन चैनलिंक इससे बेहतर व्यवस्था है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है। यदि स्वीकृति मिलती है तो पहले ऐसे स्थानों पर इसे लगवाया जाएगा जहां बाघ के बाहर आने की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं।
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पिनाकी प्रसाद सिंह, वनसंरक्षक
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वनसंरक्षक ने शासन को भेजा प्रस्ताव
30 पीबीटीपी 13
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। टाइगर रिजर्व के जंगलों से बाहर आ रहे बाघों को रोकने के लिए अब सोलर फेंसिंग के स्थान पर जालीदार (चैनलिंक) फेसिंग कराई जाएगी। इसके लिए वनसंरक्षक ने शासन को प्रस्ताव भेजा है।
टाइगर रिजर्व के जंगल से सटे क्षेत्रों में बाघों के बाहर आने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इस पर अंकुश लगाने लिए क्षेत्र के किसान काफी समय से फेंसिंग की मांग करते आ रहे हैं। पिछले एक साल में बाघ के हमलों में गई लोगों के जान गंवाने के बाद चेते वनविभाग एवं शासन ने सोलर तार फेसिंग को स्वीकृति दी है। इसमें विधायक निधि से मिली धनराशि से कुछ स्थानों पर तार फेंसिंग का काम शुरू भी करा दिया गया है जबकि लगभग एक साल पहले माधोटांडा क्षेत्र के हल्दीडेंगा में जंगल किनारे सोलर तार फेंसिंग कराई जा चुकी है। यह तार फेसिंग कामयाब नहीं हो पा रही है। जहां एक ओर इसके तारों की चोरी आसान है वहीं कई बार वन्यजीव भी इसे तोड़कर दूसरी ओर आ जाते हैं। इसके चलते तार फेंसिंग कामयाब नहीं हो पा रही है। जंगल की सीमा को सुरक्षित करने का यह तरीका पीलीभीत टाइगर रिजर्व सहित कुछ स्थानों पर ही अपनाया जा रहा है। जबकि रणथम्भौर के टाइगर रिजर्व के किनारे पत्थरों की दीवार बना दी गई है। इसको देखते हुए अब वनसंरक्षक पीपी सिंह ने टाइगर रिजर्व के किनारे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के उद्देश्य से सोलर तार फेसिंग के स्थान पर जालीदार फेंसिंग (चैनलिंक फेंसिंग) कराने का निर्णय लिया है। इस बाबत उन्होंने शासन को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि सोलर फेंसिंग की अपेक्षा चैनलिंक महंगी व्यवस्था है लेकिन यह काफी सुरक्षित और मजबूत है जिससे न तो वन्यजीव जंगल से बाहर आ सकेंगे और नहीं ग्रामीण तार काटकर या चोरी कर जंगल में जा सकेंगे। इसकी मरम्मत भी तार फेंसिंग की अपेक्षा आसान और सस्ती है।
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जंगल से बाहर रहे वन्यजीवों को रोकने के लिए तार फेंसिंग कराई जा रही है लेकिन चैनलिंक इससे बेहतर व्यवस्था है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है। यदि स्वीकृति मिलती है तो पहले ऐसे स्थानों पर इसे लगवाया जाएगा जहां बाघ के बाहर आने की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं।
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पिनाकी प्रसाद सिंह, वनसंरक्षक