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बराही रेंज का रेशम फार्म क्षेत्र बन सकता है पर्यटन स्थल

Sun, 03 Dec 2017 11:18 PM IST
Updated Sun, 03 Dec 2017 11:18 PM IST
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 बराही रेंज का रेशम फार्म क्षेत्र बन सकता है पर्यटन स्थल
चूका बीच पर बनी हट। - फोटो : अमर उजाला
माधोटांडा। इको टूरिज्म को बढ़ावा देने को चूका बीच पर्यटक स्थल के लिहाज से बेहतर है, लेकिन वन्यजीवों के लिए यह आने वाले समय में मुसीबत बन सकता है। वजह यह है कि चूका बीच टाईगर रिजर्व के कोर एरिया में काफी भीतर की ओर स्थापित है। संभावना जताई जा रही है कि एक ना एक दिन वन विभाग को चूका बीच से अपना बोरिया बिस्तर हटाना ही होगा। जानकारों का कहना है कि टाईगर रिजर्व की बराही रेंज के रेशम फार्म इलाके को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा सकता है। जो चूका बीच का एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
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टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में इको टूरिज्म स्पॉट चूका बीच विकसित किया गया है, लेकिन उस दौरान टाइगर रिजर्व नहीं बना था। मात्र आरक्षित वन के रूप में ही यहां की पहचान थी। चूका बीच को विकसित करने के लिए जाइका योजना से एक अरण्य कुटी, गेस्ट हाउस समेत अन्य हटें भी बनाई गई, लेकिन अब यह इलाका टाइगर रिजर्व के जंगल के काफी भीतरी क्षेत्र में माना जा रहा है। जिसके चलते पर्यटकों के लिए भी काफी सख्त नियम बनाए गए हैं।
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कई तत्कालीन मंत्री कर चुके हैं इसका विरोध
चूका बीच के विकसित होने के बाद यहां कई मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि पहुंचे। उनके साथ गाड़ियों के काफिले भी आते रहे। इसको लेकर वन विभाग वाइल्ड लाइफ प्रभावित होने की बात कहता रहा। तत्कालीन वन राज्य मंत्री फरीद महफूज किदवई ने यहां के जंगलों का कई बार भ्रमण किया। हालात देखने के बाद उन्होंने चूका बीच कोर एरिया में होने का पुरजोर विरोध करते हुए इको टूरिज्म को बढ़ावा देने को दूसरे इलाके विकसित करने की बात कही थी। वह इलाका ऐसा हो जिससे वाइल्ड लाइफ अधिक प्रभावित ना हो। इसके बाद विभाग ने बराही रेंज के रेशम फार्म को सुझाव दिया था। इसके अलावा अन्य जनप्रतिनिधियों ने वाइल्ड लाइफ प्रभावित होने का मामला उठाया था।
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बराही रेंज का रेशम फार्म भी बन सकता है पर्यटन स्थल
माधोटांडा से टाइगर रिजर्व का जंगल और अंग्रेजों के जमाने का बना गेस्ट हाउस महज छह किमी दूरी पर है। इस मुख्य मार्ग पर ही रेशम फार्म है। यहां मैदानी क्षेत्र अधिक होने के चलते कई हटों का निर्माण किया जा सकता है। खास बात यह है कि शाम होते ही तृण भोजी वन्य जीव के झुंड भी आसानी से देखे जा सकते हैं। जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। यहां वाहनों की आवाजाही भी आसानी से हो सकती है, लेकिन जरूरत है कि टाइगर रिजर्व के अफसर को इस इलाके का चयन कर इसे विकसित करने की। वजह यह है कि जिस तरह से बाघों और अन्य वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हो रही है, उसे देखते हुए टाइगर रिजर्व को एक न एक दिन चूका बीच से तो अपना बोरिया बिस्तर हटाना ही पड़ेगा। वहां मात्र पर्यटक घूमने तक सीमित रह सकते हैं।

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चूका बीच की तरह इको टूरिज्म बराही के रेशम फार्म में डेवलप करने की काफी गुंजाइश है। इसके चारों ओर जंगल है और बफरजोन से सटा इलाका है। ऐसे में बराही के रेशम फार्म और माला के क्षेत्र को विकसित किया जा सकता है, लेकिन यहां कोई पक्का निर्माण नहीं कराया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसको लेकर आदेश दिए हैं। यदि अब पक्के गेट आदि का निर्माण कराया गया तो एनजीओ उसका विरोध करेगा।
टीएच खान, पर्यावरणविद्
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