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जंगल से सटे क्षेत्रों में मुसीबत बनेगा गन्ने का बढ़ता रकबा
Updated Sun, 23 Jul 2017 05:34 PM IST
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पीलीभीत। जंगल से सटे क्षेत्र में गन्ने की फसल न सिर्फ क्षेत्रवासियों के लिए फिर मुसीबत बनेगी बल्कि विभाग और प्रशासन के लिए भी समस्या हो सकती है। गत वर्ष बाघ के हमलों में कई लोगों की जान गई थी इसके बाद भी गन्ने का रकबा कम न होकर ओर बढ़ गया। खास बात यह है कि इस बार अभी से बाघ खेतों में विचरण करने लगा है।
तराई के इस जनपद में गेहूं धान के बाद गन्ना सबसे प्रमुख फसल है। गत वर्ष जिले में लगभग 69 हजार हेक्टेअर पर गन्ने की फसल बोई थी जो इस बार 25 प्रतिशत बढ़कर 88 हजार हेक्टेअर तक पहुंच गई है। गत वर्ष की बात करें तो 23 अक्तूबर को जंगल से निकले बाघ ने सिंचाई कर रहे किसान पर हमला कर मार डाला था। इसके बाद इस बाघ ने क्षेत्र के गन्ने को शरणस्थली बनाकर कई लोगों की जान ली थी। हालांकि बाद में बाघ को गन्ने के खेत में की ट्रैंक्युलाइज करने के बाद वन विभाग ने लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया था लेकिन इससे खतरा समाप्त नहीं हुआ। जंगल में तेजी से बढ़ रही बाघों एवं अन्य जीवों की संख्या उन्हें बाहर आने का मजबूर कर रही है और यही कारण है कि घटनाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जंगल किनारे के खेतों में धान की रोपाई के दौरान भी कई हमले हुए हैं।
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अभी से बाघ की शरणस्थली बन गया गन्ना
माधोटांडा क्षेत्र के बाद अब वनकटी क्षेत्र में बाघ का आतंक है। इसमें से एक बाघ पिछले करीब 15 दिनों से जंगल से सटे गांव के ईदगिर्द घूमता हुआ शहर के निकट स्थित मोमिनगंज और टंडोला तक पहुंच गया था। बाघ को छिपने के लिए गन्ना काफी मददगार साबित हो रहा है। बड़े क्षेत्रफल में फैला गन्ना उसकी शरणस्थली बन चुका है।
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तारफेसिंग के बाद भी घूम रहा बाघ
वन विभाग ने गत वर्ष माधोटांडा क्षेत्र के डगा के युवक पर हल्दीडेगा क्षेत्र में हमला कर मार डाला था। इसके बाद वन विभाग ने जंगल की सीमा पर हरदोईब्रांच नहर से खारजा नहर तक लगभग 1.5 किमी लंबाई में सोलर तार फेसिंग कराई थी इसके बावजूद बाघ एवं अन्य वन्यजीवों की चहल कदमी अक्सर हल्दीडेंगा और डगा क्षेत्र में देखी जाती है।
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लॉ एंड आर्डर भी हो सकता है प्रभावित
बाघ लगातार बढ़ती घटनाओं से जनाक्रोश बढ़ रहा है। अब गन्ने के क्षेत्रफल 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी से घटनाओं में और बढ़ोत्तरी की आशंका है। ऐसे में यदि वन विभाग और प्रशासन ने ठोस रणनीति नहीं बनाई तो जनाक्रोश को शांत कराना भी चुनौती बन सकता है।
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घटनाओं के बाद ग्रामीण क्षेत्र में गन्ने की फसल न बोने की अपील किसानों से गई थी लेकिन बेहतर उत्पादन के चलते गन्ना बोया गया है। घटनाओं पर अंकुश के लिए समय से तार फेसिंग कराने का प्रयास कराया जा रहा है।
- कैलाश प्रकाश, डीएफओ
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तराई के इस जनपद में गेहूं धान के बाद गन्ना सबसे प्रमुख फसल है। गत वर्ष जिले में लगभग 69 हजार हेक्टेअर पर गन्ने की फसल बोई थी जो इस बार 25 प्रतिशत बढ़कर 88 हजार हेक्टेअर तक पहुंच गई है। गत वर्ष की बात करें तो 23 अक्तूबर को जंगल से निकले बाघ ने सिंचाई कर रहे किसान पर हमला कर मार डाला था। इसके बाद इस बाघ ने क्षेत्र के गन्ने को शरणस्थली बनाकर कई लोगों की जान ली थी। हालांकि बाद में बाघ को गन्ने के खेत में की ट्रैंक्युलाइज करने के बाद वन विभाग ने लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया था लेकिन इससे खतरा समाप्त नहीं हुआ। जंगल में तेजी से बढ़ रही बाघों एवं अन्य जीवों की संख्या उन्हें बाहर आने का मजबूर कर रही है और यही कारण है कि घटनाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जंगल किनारे के खेतों में धान की रोपाई के दौरान भी कई हमले हुए हैं।
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अभी से बाघ की शरणस्थली बन गया गन्ना
माधोटांडा क्षेत्र के बाद अब वनकटी क्षेत्र में बाघ का आतंक है। इसमें से एक बाघ पिछले करीब 15 दिनों से जंगल से सटे गांव के ईदगिर्द घूमता हुआ शहर के निकट स्थित मोमिनगंज और टंडोला तक पहुंच गया था। बाघ को छिपने के लिए गन्ना काफी मददगार साबित हो रहा है। बड़े क्षेत्रफल में फैला गन्ना उसकी शरणस्थली बन चुका है।
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तारफेसिंग के बाद भी घूम रहा बाघ
वन विभाग ने गत वर्ष माधोटांडा क्षेत्र के डगा के युवक पर हल्दीडेगा क्षेत्र में हमला कर मार डाला था। इसके बाद वन विभाग ने जंगल की सीमा पर हरदोईब्रांच नहर से खारजा नहर तक लगभग 1.5 किमी लंबाई में सोलर तार फेसिंग कराई थी इसके बावजूद बाघ एवं अन्य वन्यजीवों की चहल कदमी अक्सर हल्दीडेंगा और डगा क्षेत्र में देखी जाती है।
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लॉ एंड आर्डर भी हो सकता है प्रभावित
बाघ लगातार बढ़ती घटनाओं से जनाक्रोश बढ़ रहा है। अब गन्ने के क्षेत्रफल 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी से घटनाओं में और बढ़ोत्तरी की आशंका है। ऐसे में यदि वन विभाग और प्रशासन ने ठोस रणनीति नहीं बनाई तो जनाक्रोश को शांत कराना भी चुनौती बन सकता है।
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घटनाओं के बाद ग्रामीण क्षेत्र में गन्ने की फसल न बोने की अपील किसानों से गई थी लेकिन बेहतर उत्पादन के चलते गन्ना बोया गया है। घटनाओं पर अंकुश के लिए समय से तार फेसिंग कराने का प्रयास कराया जा रहा है।
- कैलाश प्रकाश, डीएफओ