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प्रख्यात शायर मुनव्वर राणा के बयान से आहत हैं साहित्यकार
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बोले, ऐसी बयानबाजी सियासी लोगों का काम, साहित्यकार का नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद (सहारनपुर)। शायर मुनव्वर राणा के बयान सूबे में पुन: योगी सरकार बनने पर वह प्रदेश से पलायन कर जाएंगे पर नगर के शायरों व कवियों ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार किसी एक मजहब का नहीं होता है। इस तरह की बयानबाजी करना सियासी लोगों का काम है साहित्यकार का नहीं।
हास्य एवं व्यंग्य कवि डॉ. शमीम देवबंदी ने कहा कि साहित्य जगत में शायर मुनव्वर राणा का नाम बहुत नाम है। साहित्यकार का काम कविताओं के माध्यम से प्रत्येक समाज को आपस में जोड़े रखना है। इसलिए साहित्यकार को अपनी लेखनी और कविताओं या शायरी से मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देना चाहिए। शायर तनवीर अजमल ने कहा कि मुनव्वर राणा की बयानबाजी व्यक्तिगत कारणों से हो सकती है।किसी भी साहित्यकार का काम मोहब्बत फैलाना है। सियासी बंटवारा करना नहीं। युवा शायर एवं कवि डॉ. सादिक देवबंदी ने कहा कि साहित्यकार को इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए। मुनव्वर राणा उर्दू के ही नहीं हिंदी कविताओं के मंच पर भी बड़े शायर माने जाते हैं। इसलिए उन्हें अपने बयान को वापस लेना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद (सहारनपुर)। शायर मुनव्वर राणा के बयान सूबे में पुन: योगी सरकार बनने पर वह प्रदेश से पलायन कर जाएंगे पर नगर के शायरों व कवियों ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि साहित्यकार किसी एक मजहब का नहीं होता है। इस तरह की बयानबाजी करना सियासी लोगों का काम है साहित्यकार का नहीं।
हास्य एवं व्यंग्य कवि डॉ. शमीम देवबंदी ने कहा कि साहित्य जगत में शायर मुनव्वर राणा का नाम बहुत नाम है। साहित्यकार का काम कविताओं के माध्यम से प्रत्येक समाज को आपस में जोड़े रखना है। इसलिए साहित्यकार को अपनी लेखनी और कविताओं या शायरी से मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देना चाहिए। शायर तनवीर अजमल ने कहा कि मुनव्वर राणा की बयानबाजी व्यक्तिगत कारणों से हो सकती है।किसी भी साहित्यकार का काम मोहब्बत फैलाना है। सियासी बंटवारा करना नहीं। युवा शायर एवं कवि डॉ. सादिक देवबंदी ने कहा कि साहित्यकार को इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए। मुनव्वर राणा उर्दू के ही नहीं हिंदी कविताओं के मंच पर भी बड़े शायर माने जाते हैं। इसलिए उन्हें अपने बयान को वापस लेना चाहिए।
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