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विश्व गौरैया दिवस : गौरैया फिर आएगी, आप बुलाओ तो सही

Sun, 20 Mar 2022 11:12 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Mar 2022 11:12 PM IST
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World Sparrow Day: Sparrow will come again, if you call it right
कृत्रिम घोंसले पर बैठी गौरैया - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। गौरैया के संरक्षण के लिए जिलेभर में कार्यक्रम हुए। वन विभाग की ओर से घोंसले बांटे गए। युवा पीढ़ी को गौरैया के संरक्षण की सीख दी गई। भोपा में स्कूल बच्चों को बताया कि किस तरह गौरैया को बचाया जा सकता है।
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ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय की शोध टीम ने जिले में गौरैया संरक्षण अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया। वन विभाग के रेंजर कुलदीप सिंह का कहना है कि साझा प्रयास से चिड़िया को बचाया जा सकता है। घर में गौरैया जरूर आएगी, लेकिन उसका संरक्षण करना जरूरी है। रहने का ठिकाना और दाना-पानी का इंतजाम जरूर करें।
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शिक्षिका ने दिया गौरैया को घर
मुजफ्फरनगर। लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की जीव विज्ञान प्रवक्ता डॉ. वंदना शर्मा ने गौरैया के लिए घर का इंतजाम किया है। उनका कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति को खूबसूरत चिड़िया को बचाने की पहल करनी चाहिए। यदि हम चाहते हैं कि चिड़िया फिर से हमारे बीच रहे तो हमें इसे बचाने के अपने प्रयासों के साथ आगे बढ़ना होगा। अपनी बालकनी और छत पर दाना-पानी रखें। अधिक से अधिक पौधे लगाएं, कृत्रिम घोंसलों का निर्माण कर लगाएं।
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उर्वरकों के बढ़ते प्रयोग से विलुप्त हो रही गौरैया
मुजफ्फरनगर। ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय की शोध टीम ने जिले में गौरैया संरक्षण अभियान चलाया। छात्र आशीष आर्य ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर कृत्रिम घोंसले लगाए गए हैं। किसानों को जागरूक होने की जरूरत है। खेतों में रासायनिक खाद के प्रयोग के कारण चिड़िया को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। गौरैया का संरक्षण हमारे लिए एक चुनौती के समान है। केमिकल युक्त रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से जहां भूमि में पाए जाने वाले कीड़े मकोड़े विलुप्त हो चले हैं, जिससे गौरैया के लिए भोजन का संकट भी खड़ा हो गया है।
्गौरैया को बचाने के लिए बांटे गए घोंसले
भोपा। क्षेत्र के कसमपुरा प्राथमिक विद्यालय में गौरैया दिवस पर तीन दर्जन लकड़ी से तैयार घोंसले महिलाओं व ग्रामीणों को स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. सोनिया की ओर से बांटे गए। इस मौके पर छात्राओं ने पर्यावरण पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। प्रधानाचार्या ने कहा कि चिड़िया को बचाने के लिए सबको पहल करनी चाहिए।

प्रयास किए तो गूंजने लगी चहचहाहट
पुरकाजी। गांव तुगलकपुर में जयपाल ने अपने घर पर गौरैया के पुनर्वास के लिए घोंसले लगाए हैं। जयपाल ने बताया कि गौरैया को बचाने के लिए सबको प्रयास करना होगा। वह बेहद खुश है कि उनके लगाए घोंसलों में गौरैया आनी शुरू हुई हैं । इसके अलावा कदम सिंह के घर पर एक गौरैया ने घोंसला बनाया है। उनके पुत्र गौरव और सागर ने बताया कि रोजाना घर पर गौरैया आ रही है।
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