{"_id":"6144d6478ebc3eb750294c0a","slug":"water-conservation-and-harvesting-exercise-from-limited-resources-muzaffarnagar-news-mrt556690211","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीमित संसाधनों से जल संरक्षण और संचयन की कवायद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीमित संसाधनों से जल संरक्षण और संचयन की कवायद
विज्ञापन
बिरालसी में तालाब खुदवाकर जल संरक्षित किया
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीमित संसाधनों से जल संरक्षण और संचयन की कवायद
मुजफ्फरनगर/चरथावल। जल ही जीवन है। जल है, तो कल है..नारों के साथ सरकारी कागजों में जल संरक्षण की कवायद हर वर्ष की जाती है लेकिन उचित निगरानी के अभाव में योजना परवान नहीं चढ़ पा रही। पिछले ढाई साल में जिले में बारिश के पानी को एकत्र करने के लिए गांवों में व्यापक प्रयास किए गए। परिषदीय स्कूलों में सोख पिट (गड्ढों) एवं रेन वाटर हार्वेसटिंग सिस्टम लगाए गए। गांवों में तालाबों को खुदवाकर उनका सौंदर्यकरण के साथ जल एकत्र करने की दिशा में प्रयास हुए है लेकिन लॉकडाउन में लंबे समय तक स्कूल बंद होने से अधिकांश स्कूलों में यह व्यवस्था दम तोड़ गई। पानी को संचय करने वाले लोगों से बातचीत:
क्या कहते हैं ग्रामीण
ज्ञानामाजरा के पूर्व प्रधान डा. कंवरपाल कहते हैं कि उन्होंने परिषदीय स्कूलों में अच्छी क्वालिटी के रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाए थे। वह बेहतर तरीके से कार्य कर रहे हैं। गांव का तालाब खुदवाकर उसमें स्वच्छ जल भरा गया लेकिन गांव की सरकार बदली, तो निगरानी की कमी से तालाब गंदगी से अट गया। दो साल पूर्व तत्कालीन डीएम सेल्वा कुमारी जे पानी बचाने को लेकर काफी संवेदनशील थी। उन्होंने हर प्राइमरी स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने की अनिवार्यता कर दी थी और खुद मौके पर अवलोकन करती थीं।
बिरालसी ग्राम प्रधान लोकेश कुमार कहते हैं कि पिछली पंचवर्षीय योजना में विकास खंड स्तर से दो हेक्टेयर का तालाब खुदवाकर चारों तरफ पटरी बनवाई गई। गांवों में पाइप डलवाकर जाली लगवाई है ताकि तालाब में गंदगी नहीं भर पाएं। वह खुद उसकी मॉनिटरिंग करते हैं। तालाब में बारिश का पानी एकत्र होता है और गांव की आबादी की पानी निकासी ठीक रहती है। तालाब में मछली पालन किया जा रहा है।
विज्ञापन
नालंदा पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर प्रवीण त्यागी में जल बचाने को लेकर विशेष दिलचस्पी है। उन्होंने तीन मंजिले स्कूल के पूरे भवन के बारिश अथवा बेकार पानी को पाइपों के जरिए एकत्र करने का जुगाड़ किया है। बारिश और बेकार पानी को संरक्षित करने के लिए तीस फीट लंबा, 20 फीट चौड़ा और नौ फीट गहरा गड्ढ़ा बनवाया है। पूरी बिल्डिंग का पानी उसमें एकत्र होता है। पाइपलाइन के जरिए इस पानी से फुलवारी, पेड़ पौधे और लॉन की सिंचाई होती है।
पीपलशाह के किसान अनिल पुंडीर कहते हैं गांव में कई पिछले वित्तीय वर्ष में कई दशक बाद आबादी के बीच तालाब खुदवाया गया। केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान द्वारा गांव को गोद लेने के कारण बरसात में पानी निकासी की दिशा में गांव में अहम कार्य हुआ है। ग्राम पंचायत की निगरानी के कारण तालाब साफ रहता है, जिससे बारिश का पानी तालाब में समाने से गांव की जमीन का भूजल स्तर ठीक रहता है।
एक रूफ टॉप हार्वेस्टिंग सिस्टम से छत का पानी जमीन में पहुंचता है। दूसरे वाटर रिचार्ज सिस्टम द्वारा ग्राउंड आदि का पानी सोख पिट के गड्ढों में समाता है। पिछले वित्तीय वर्ष में चरथावल ब्लॉक के पीपलशाह और बिरालसी में तालाब खुदवाकर उनकी निगरानी का जिम्मा ग्राम पंचायत को दिया गया था। हर स्कूलों में यह सिस्टम लगवाने के निर्देश दिए गए थे। लोगों की इच्छा शक्ति से जल बचाव का अभियान कारगर होगा।
निर्दोष कुमार अवर अभियंता ब्लॉक चरथावल
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर/चरथावल। जल ही जीवन है। जल है, तो कल है..नारों के साथ सरकारी कागजों में जल संरक्षण की कवायद हर वर्ष की जाती है लेकिन उचित निगरानी के अभाव में योजना परवान नहीं चढ़ पा रही। पिछले ढाई साल में जिले में बारिश के पानी को एकत्र करने के लिए गांवों में व्यापक प्रयास किए गए। परिषदीय स्कूलों में सोख पिट (गड्ढों) एवं रेन वाटर हार्वेसटिंग सिस्टम लगाए गए। गांवों में तालाबों को खुदवाकर उनका सौंदर्यकरण के साथ जल एकत्र करने की दिशा में प्रयास हुए है लेकिन लॉकडाउन में लंबे समय तक स्कूल बंद होने से अधिकांश स्कूलों में यह व्यवस्था दम तोड़ गई। पानी को संचय करने वाले लोगों से बातचीत:
क्या कहते हैं ग्रामीण
ज्ञानामाजरा के पूर्व प्रधान डा. कंवरपाल कहते हैं कि उन्होंने परिषदीय स्कूलों में अच्छी क्वालिटी के रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाए थे। वह बेहतर तरीके से कार्य कर रहे हैं। गांव का तालाब खुदवाकर उसमें स्वच्छ जल भरा गया लेकिन गांव की सरकार बदली, तो निगरानी की कमी से तालाब गंदगी से अट गया। दो साल पूर्व तत्कालीन डीएम सेल्वा कुमारी जे पानी बचाने को लेकर काफी संवेदनशील थी। उन्होंने हर प्राइमरी स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने की अनिवार्यता कर दी थी और खुद मौके पर अवलोकन करती थीं।
विज्ञापन
बिरालसी ग्राम प्रधान लोकेश कुमार कहते हैं कि पिछली पंचवर्षीय योजना में विकास खंड स्तर से दो हेक्टेयर का तालाब खुदवाकर चारों तरफ पटरी बनवाई गई। गांवों में पाइप डलवाकर जाली लगवाई है ताकि तालाब में गंदगी नहीं भर पाएं। वह खुद उसकी मॉनिटरिंग करते हैं। तालाब में बारिश का पानी एकत्र होता है और गांव की आबादी की पानी निकासी ठीक रहती है। तालाब में मछली पालन किया जा रहा है।
विज्ञापन
नालंदा पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर प्रवीण त्यागी में जल बचाने को लेकर विशेष दिलचस्पी है। उन्होंने तीन मंजिले स्कूल के पूरे भवन के बारिश अथवा बेकार पानी को पाइपों के जरिए एकत्र करने का जुगाड़ किया है। बारिश और बेकार पानी को संरक्षित करने के लिए तीस फीट लंबा, 20 फीट चौड़ा और नौ फीट गहरा गड्ढ़ा बनवाया है। पूरी बिल्डिंग का पानी उसमें एकत्र होता है। पाइपलाइन के जरिए इस पानी से फुलवारी, पेड़ पौधे और लॉन की सिंचाई होती है।
पीपलशाह के किसान अनिल पुंडीर कहते हैं गांव में कई पिछले वित्तीय वर्ष में कई दशक बाद आबादी के बीच तालाब खुदवाया गया। केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान द्वारा गांव को गोद लेने के कारण बरसात में पानी निकासी की दिशा में गांव में अहम कार्य हुआ है। ग्राम पंचायत की निगरानी के कारण तालाब साफ रहता है, जिससे बारिश का पानी तालाब में समाने से गांव की जमीन का भूजल स्तर ठीक रहता है।
एक रूफ टॉप हार्वेस्टिंग सिस्टम से छत का पानी जमीन में पहुंचता है। दूसरे वाटर रिचार्ज सिस्टम द्वारा ग्राउंड आदि का पानी सोख पिट के गड्ढों में समाता है। पिछले वित्तीय वर्ष में चरथावल ब्लॉक के पीपलशाह और बिरालसी में तालाब खुदवाकर उनकी निगरानी का जिम्मा ग्राम पंचायत को दिया गया था। हर स्कूलों में यह सिस्टम लगवाने के निर्देश दिए गए थे। लोगों की इच्छा शक्ति से जल बचाव का अभियान कारगर होगा।
निर्दोष कुमार अवर अभियंता ब्लॉक चरथावल