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सरकार के फैसले को नहीं शरीयत को मानेंगे मुस्लिम: उलमा
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लड़कियों की शादी की उम्र 21 वर्ष करने का उलमा ने किया विरोध
देवबंद (सहारनपुर)। देश में लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 21 वर्ष किए जाने संबंधी सरकार के निर्णय का उलमा ने पुरजोर विरोध किया है। उलमा का कहना है कि सरकार का यह फैसला जल्दबाजी में लिया हुआ लगता है। इसलिए इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।
जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि सरकार को यदि इस मामले में कानून बनाना है तो इसके लिए हिंदुस्तान के तमाम धर्म के धर्मगुरुओं से सलाह मशविरा लेना चाहिए। क्योंकि यह मुल्क सभी धर्मों को मानने वालों का मुल्क है। कहा कि लगता है कि सरकार इस मामले में जल्दबाजी कर रही है। सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि इस्लाम में यही बताया गया है कि 18 वर्ष की आयु में लड़की बालिग हो जाती है। यह उम्र बढ़ाकर 21 वर्ष कर देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वैसे तो यह सरकार किसी की न मानकर अपनी मनमर्जी करती है। इसलिए कोई सलाह देना बेकार है। लेकिन इतना साफ है कि मुसलमान सरकार के फैसले से नहीं बल्कि शरीयत को मानकर चलेंगे।
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देवबंद (सहारनपुर)। देश में लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 21 वर्ष किए जाने संबंधी सरकार के निर्णय का उलमा ने पुरजोर विरोध किया है। उलमा का कहना है कि सरकार का यह फैसला जल्दबाजी में लिया हुआ लगता है। इसलिए इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।
जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि सरकार को यदि इस मामले में कानून बनाना है तो इसके लिए हिंदुस्तान के तमाम धर्म के धर्मगुरुओं से सलाह मशविरा लेना चाहिए। क्योंकि यह मुल्क सभी धर्मों को मानने वालों का मुल्क है। कहा कि लगता है कि सरकार इस मामले में जल्दबाजी कर रही है। सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि इस्लाम में यही बताया गया है कि 18 वर्ष की आयु में लड़की बालिग हो जाती है। यह उम्र बढ़ाकर 21 वर्ष कर देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वैसे तो यह सरकार किसी की न मानकर अपनी मनमर्जी करती है। इसलिए कोई सलाह देना बेकार है। लेकिन इतना साफ है कि मुसलमान सरकार के फैसले से नहीं बल्कि शरीयत को मानकर चलेंगे।
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