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पर्दे के पीछे छिपी परिनिंदा प्रविष्टि से दो को मिला था थाने का चार्ज
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मुजफ्फरनगर। पुलिस कार्यालय में बाबुओं द्वारा किए जाने वाले खेल पहले भी सामने आते रहे है। इस बार परिनिंदा प्रविष्टि को लेकर खेल उजागर हुआ है। एक थाना प्रभारी व एक गैर जनपद में तैनात निरीक्षक के गिरेबां तक जांच की आंच पहुंची है। थाना प्रभारी को पद से हटा दिया गया है और फर्जी हस्ताक्षर कर बड़ा खेल करने वाले बाबू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर करने की भी जांच की जा रही है।
एसएसपी कार्यालय में तैनात बाबू का खेल पकडे़ जाने के बाद विभागीय कर्मचारियों में हड़कंप है। सहारनपुर में तैनात उप निरीक्षक सुभाष चंद गौतम को गाजियाबाद में वर्ष 2021 में मिली परिनिंदा प्रविष्टि को बाबू द्वारा चरित्र पंजिका में दर्ज न करना व पुलिस अधिकारी के हस्ताक्षर करना एक बाबू द्वारा किया गया खेल है। लेकिन अब इससे सभी बाबुओं की और सवालिया निशान उठ रहे हैं। एसएसपी ने इस मामले में अपने कार्यालय के तीन कर्मचारियों सीआरके राजकुमार शर्मा, विकास व महिला पुलिसकर्मी मीना को निलंबित किया है, जबकि बडे़ बाबू एमएच जैदी को निलंबित करने के बाद बहाल कर दिया है। लेकिन जांच की तलवार अभी सभी पर लटकी हुई है।
एक नहीं दो का था मामला
सूत्र बताते है कि गाजियाबाद एसएसपी के पत्र के बाद जांच पड़ताल में उप निरीक्षक सुभाष चंद गौतम का मामला तो पकड़ में आ ही गया, लेकिन इसके बाद एक और मामला सामने आया। जो बुढ़ाना कोतवाली के प्रभारी जितेंद्र यादव का था। उनको भी गैर जनपद में परिनिंदा प्रविष्टि मिली थी और वह यहां जनपद पुलिस के अभिलेखों में नहीं चढ़ी थी। इसका पता चलने के बाद उनको पद से हटा दिया गया।
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सुभाष चंद गौतम को मिला लाभ
यदि उप निरीक्षक सुभाष चंद गौतम की परिनिंदा प्रविष्टि का मामला पहले ही उनकी चरित्र पंजिका में दर्ज हो जाता तो उन्हें थाना प्रभारी के पद का लाभ नहीं मिलता। लेकिन एसएसपी कार्यालय के बाबू की मिलीभगत का उन्हें पूरा फायदा मिला। वह वर्ष 2021 में पुरकाजी व सिखेडा थाना प्रभारी रहे और इस दौरान उनकी परिनिंदा प्रविष्टि पर्दे के पीछे छिपी रही। इसी प्रकार 16 दिसंबर 2021 से 18 मई 2022 तक जितेंद्र यादव बुढ़ाना कोतवाली के प्रभारी रहे।
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एसएसपी कार्यालय में तैनात बाबू का खेल पकडे़ जाने के बाद विभागीय कर्मचारियों में हड़कंप है। सहारनपुर में तैनात उप निरीक्षक सुभाष चंद गौतम को गाजियाबाद में वर्ष 2021 में मिली परिनिंदा प्रविष्टि को बाबू द्वारा चरित्र पंजिका में दर्ज न करना व पुलिस अधिकारी के हस्ताक्षर करना एक बाबू द्वारा किया गया खेल है। लेकिन अब इससे सभी बाबुओं की और सवालिया निशान उठ रहे हैं। एसएसपी ने इस मामले में अपने कार्यालय के तीन कर्मचारियों सीआरके राजकुमार शर्मा, विकास व महिला पुलिसकर्मी मीना को निलंबित किया है, जबकि बडे़ बाबू एमएच जैदी को निलंबित करने के बाद बहाल कर दिया है। लेकिन जांच की तलवार अभी सभी पर लटकी हुई है।
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एक नहीं दो का था मामला
सूत्र बताते है कि गाजियाबाद एसएसपी के पत्र के बाद जांच पड़ताल में उप निरीक्षक सुभाष चंद गौतम का मामला तो पकड़ में आ ही गया, लेकिन इसके बाद एक और मामला सामने आया। जो बुढ़ाना कोतवाली के प्रभारी जितेंद्र यादव का था। उनको भी गैर जनपद में परिनिंदा प्रविष्टि मिली थी और वह यहां जनपद पुलिस के अभिलेखों में नहीं चढ़ी थी। इसका पता चलने के बाद उनको पद से हटा दिया गया।
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सुभाष चंद गौतम को मिला लाभ
यदि उप निरीक्षक सुभाष चंद गौतम की परिनिंदा प्रविष्टि का मामला पहले ही उनकी चरित्र पंजिका में दर्ज हो जाता तो उन्हें थाना प्रभारी के पद का लाभ नहीं मिलता। लेकिन एसएसपी कार्यालय के बाबू की मिलीभगत का उन्हें पूरा फायदा मिला। वह वर्ष 2021 में पुरकाजी व सिखेडा थाना प्रभारी रहे और इस दौरान उनकी परिनिंदा प्रविष्टि पर्दे के पीछे छिपी रही। इसी प्रकार 16 दिसंबर 2021 से 18 मई 2022 तक जितेंद्र यादव बुढ़ाना कोतवाली के प्रभारी रहे।