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Muzaffarnagar News: दो दोषियों को उम्रकैद, अदालत ने लिखा सभ्य समाज में सामूहिक बलात्कार अक्षम्य

Thu, 08 Oct 2026 01:17 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 01:17 AM IST
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Two convicts sentenced to life imprisonment; court terms gang rape unforgivable in a civilized society.
मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना क्षेत्र के गांव में छह साल पहले सात साल की मासूम बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन काल) की सजा सुनाई। वादी और पीड़िता समेत छह गवाह पक्षद्रोही हो गए लेकिन विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट सजा का आधार बनी। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया ने 34 पृष्ठ के फैसले में लिखा कि सामूहिक बलात्कार किसी भी सभ्य समाज में क्षम्य नहीं हो सकता।
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वारदात 11 दिसंबर 2020 की शाम छह बजे हुई। पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि घर के पास खेल रही मासूम को आरोपी अकरम और आसिफ उर्फ देसी बहला-फुसलाकर मकान की छत पर ले गए और सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान किया और दोनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
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बाद में आरोपियों की जमानत हो गई। प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) में हुई। विशेष लोक अभियोजक विक्रांत राठी और विनय अरोरा ने बताया कि सामूहिक दुष्कर्म में दोनों दोषियों को आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
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इसके अलावा धारा 363 में पांच-पांच साल कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया गया। अर्थदंड की कुल धनराशि पीड़िता को शारीरिक, मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए प्रदान की जाएगी।

जिला विधिक प्राधिकरण को निर्देश दिए गए कि पीड़ित प्रतिकर योजना के अंतर्गत पीड़िता को प्रतिकर दिलाना सुनिश्चित किया जाए।
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एक आरोपी को बताया किशोर, साबित नहीं कर सके
मुजफ्फरनगर। प्रकरण में बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी आसिफ मदरसे में पढ़ा है। आधार कार्ड की जन्मतिथि को आधार मानते हुए किशोर बताया गया। तर्क दिया गया कि आरोपी को पुलिस ने 12 दिसंबर 2020 को जेल भेजा था, इस वजह से इस दिन वह 16 साल 11 माह और 10 दिन का था। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के पिता के बयानों को ही आधार बनाकर साबित किया कि वह किशोर नहीं था।
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