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तीन-तीन दुकानों पर काबिज है एक व्यापारी
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तीन-तीन दुकानों पर काबिज हैं एक ही व्यापारी
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका की दुकानों के प्रीमियम और किरायेदारी के प्रकरण को लेकर चल रहे सर्वे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कई दुकानदारों ने दो से तीन दुकानों को एक साथ मिला लिया है, तो कुछ दुकानें अपने मूल आवंटियों के बाद दो से तीन बार तक बेच दी गई, लेकिन नगर पालिका को इनका प्रीमियम जमा नहीं कराया गया। प्रीमियम और किराया बढ़ोतरी को लेकर दुकानदार आए दिन हंगामा कर रहे हैं।
नगर पालिका के शहर में 17 मार्केट हैं और इनमें 509 दुकानें हैं। बताया जाता है कि करीब 57 वर्षों से पालिका की दुकानों की किराया बढ़ोतरी नहीं हुई। नगर पालिका बोर्ड ने पालिका की दुकानों की किराया बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास किया था। इसके साथ ही विरासत और शिकमी दुकानदारों से प्रीमियम की भी वसूली होनी थी। प्रीमियम एवं किराया बढ़ोतरी संबंधी नगर पालिका के प्रस्ताव संख्या 164 को मंडलायुक्त ने निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद नगर पालिका स्तर से दुकानों की किरायेदारी एवं प्रीमियम को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया। इसे लेकर विवाद चल रहा है। नगर पालिका के दुकानदार आए दिन प्रदर्शन कर रहे हैं। पालिका चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने दुकानों के सर्वे के लिए ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन करते हुए दस दिन में आख्या देने के निर्देश दिए थे। यह कमेटी नगर पालिका की दुकानों का सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। बताया जाता है कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक दुकानदार ने आसपास की दुकानों को खरीदकर एक ही दुकान में मिला लिया हैं। कहीं पर दो तो कहीं पर तीन-तीन दुकानों की बीच की दीवारें हटाकर एक ही दुकान बना ली गई है। कई दुकानें मूल आवंटियों से दूसरे और तीसरे लोगों तक भी बिक चुकी हैं। इसके बावजूद नगर पालिका को प्रीमियम का भुगतान नहीं हुआ है। इससे नगर पालिका को आर्थिक नुकसान हो रहा है। फिलहाल जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट चेयरपर्सन को नहीं दी है। ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी का कहना है कि जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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मुजफ्फरनगर। नगर पालिका की दुकानों के प्रीमियम और किरायेदारी के प्रकरण को लेकर चल रहे सर्वे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कई दुकानदारों ने दो से तीन दुकानों को एक साथ मिला लिया है, तो कुछ दुकानें अपने मूल आवंटियों के बाद दो से तीन बार तक बेच दी गई, लेकिन नगर पालिका को इनका प्रीमियम जमा नहीं कराया गया। प्रीमियम और किराया बढ़ोतरी को लेकर दुकानदार आए दिन हंगामा कर रहे हैं।
नगर पालिका के शहर में 17 मार्केट हैं और इनमें 509 दुकानें हैं। बताया जाता है कि करीब 57 वर्षों से पालिका की दुकानों की किराया बढ़ोतरी नहीं हुई। नगर पालिका बोर्ड ने पालिका की दुकानों की किराया बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास किया था। इसके साथ ही विरासत और शिकमी दुकानदारों से प्रीमियम की भी वसूली होनी थी। प्रीमियम एवं किराया बढ़ोतरी संबंधी नगर पालिका के प्रस्ताव संख्या 164 को मंडलायुक्त ने निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद नगर पालिका स्तर से दुकानों की किरायेदारी एवं प्रीमियम को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया। इसे लेकर विवाद चल रहा है। नगर पालिका के दुकानदार आए दिन प्रदर्शन कर रहे हैं। पालिका चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने दुकानों के सर्वे के लिए ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन करते हुए दस दिन में आख्या देने के निर्देश दिए थे। यह कमेटी नगर पालिका की दुकानों का सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। बताया जाता है कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक दुकानदार ने आसपास की दुकानों को खरीदकर एक ही दुकान में मिला लिया हैं। कहीं पर दो तो कहीं पर तीन-तीन दुकानों की बीच की दीवारें हटाकर एक ही दुकान बना ली गई है। कई दुकानें मूल आवंटियों से दूसरे और तीसरे लोगों तक भी बिक चुकी हैं। इसके बावजूद नगर पालिका को प्रीमियम का भुगतान नहीं हुआ है। इससे नगर पालिका को आर्थिक नुकसान हो रहा है। फिलहाल जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट चेयरपर्सन को नहीं दी है। ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी का कहना है कि जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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