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सावधान! खांसी-जुकाम से हो सकता है स्वाइन फ्लू
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 13 Dec 2017 11:54 PM IST
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घने कोहरे के बीच स्कूल जातीं छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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बूंदाबांदी के बाद मौसम का मिजाज बदल गया है। तापमान गिरने से ठंड बढ़ गई है। अचानक हुए बदलाव से खांसी-जुकाम के मरीजों में इजाफा हो गया है। खतरा यह है कि खांसी-जुकाम के बीच स्वाइन फ्लू का वायरस भी हमला कर सकता है। ऐसे में सेहत का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। जरा सी लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है।
दिसंबर के मध्य से लेकर जनवरी तक कड़ाके की ठंड का दौर रहता है। तापमान गिरने से सर्दी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। बढ़ती ठंड में जरा सी चूक सेहत को बिगाड़ सकती है। चिकित्सकों के अनुसार अचानक मौसम में उतार-चढ़ाव होने से खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज बढ़ते हैं।
इनमें सबसे अधिक खतरा खांसी -जुकाम को लेकर बना है। खांसी-जुकाम के वक्त स्वाइन फ्लू का वायरस भी तेजी से सक्रिय होता है, जो मरीज को घेर सकता है। ऐसे में बचाव के लिए सर्दी से दूर रहें। खासकर नौनिहाल बच्चों, स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ बुजुर्गों की हिफाजत जरूरी है।
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जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ वीके सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण कई समस्याएं होती हैं। खांसी-जुकाम में स्वाइन फ्लू का वायरस भी सक्रिय हो जाता है। यह अधिक खतरा बनता है। इससे दूर रहने के लिए सर्दी से बचाव जरूरी हैं।
ओपीडी में सर्दी के बढ़ रहे मरीज
मुजफ्फरनगर। सीजनल बुखार में जिला चिकित्सालय की ओपीडी में रोजाना 1500 से अधिक मरीजों का इलाज किया गया। जो कि सितंबर, अक्तूबर और नवंबर में 700 तक रहा है, लेकिन दिसंबर शुरू होने के बाद मौसम में आए बदलाव से मरीज फिर बढ़ने लगे हैं। इनमें खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज अधिक हैं। बुधवार को भी सभी ओपीडी में 400 से अधिक मरीज देखे गए, जिनमें 40 फीसदी सर्दी से पीड़ित रहे हैं।
सांस-दमा रोगियों को होगी परेशानी
मुजफ्फरनगर। एग्जिमा से लेकर अस्थमा जैसे बीमारियों से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ठंड में सांस के रोगियों को सबसे अधिक दिक्कत होती है। कोहरे के साथ जमीन की डस्ट ऊपर उठती है, जो नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करती है, जिससे परेशानी बढ़ती है।
इस तरह से करें बचाव:
-दिनभर में खूब पानी पीएं।
-गर्म कपड़े पहनें और ठंड से बचें।
-आंख-नाक-कान को ढककर रखें।
छींकते समय रुमाल जरूर साथ हो।
स्कीन रोग के पीड़ित ज्यादा देर धूप में न बैठें।
थकान हो तो आराम करें, रात्रि में पूरी नींद लें।
-प्रोटीनयुक्त भोजन करें।
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दिसंबर के मध्य से लेकर जनवरी तक कड़ाके की ठंड का दौर रहता है। तापमान गिरने से सर्दी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। बढ़ती ठंड में जरा सी चूक सेहत को बिगाड़ सकती है। चिकित्सकों के अनुसार अचानक मौसम में उतार-चढ़ाव होने से खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज बढ़ते हैं।
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इनमें सबसे अधिक खतरा खांसी -जुकाम को लेकर बना है। खांसी-जुकाम के वक्त स्वाइन फ्लू का वायरस भी तेजी से सक्रिय होता है, जो मरीज को घेर सकता है। ऐसे में बचाव के लिए सर्दी से दूर रहें। खासकर नौनिहाल बच्चों, स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ बुजुर्गों की हिफाजत जरूरी है।
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जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ वीके सिंह ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण कई समस्याएं होती हैं। खांसी-जुकाम में स्वाइन फ्लू का वायरस भी सक्रिय हो जाता है। यह अधिक खतरा बनता है। इससे दूर रहने के लिए सर्दी से बचाव जरूरी हैं।
ओपीडी में सर्दी के बढ़ रहे मरीज
मुजफ्फरनगर। सीजनल बुखार में जिला चिकित्सालय की ओपीडी में रोजाना 1500 से अधिक मरीजों का इलाज किया गया। जो कि सितंबर, अक्तूबर और नवंबर में 700 तक रहा है, लेकिन दिसंबर शुरू होने के बाद मौसम में आए बदलाव से मरीज फिर बढ़ने लगे हैं। इनमें खांसी, जुकाम और बुखार के मरीज अधिक हैं। बुधवार को भी सभी ओपीडी में 400 से अधिक मरीज देखे गए, जिनमें 40 फीसदी सर्दी से पीड़ित रहे हैं।
सांस-दमा रोगियों को होगी परेशानी
मुजफ्फरनगर। एग्जिमा से लेकर अस्थमा जैसे बीमारियों से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ठंड में सांस के रोगियों को सबसे अधिक दिक्कत होती है। कोहरे के साथ जमीन की डस्ट ऊपर उठती है, जो नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करती है, जिससे परेशानी बढ़ती है।
इस तरह से करें बचाव:
-दिनभर में खूब पानी पीएं।
-गर्म कपड़े पहनें और ठंड से बचें।
-आंख-नाक-कान को ढककर रखें।
छींकते समय रुमाल जरूर साथ हो।
स्कीन रोग के पीड़ित ज्यादा देर धूप में न बैठें।
थकान हो तो आराम करें, रात्रि में पूरी नींद लें।
-प्रोटीनयुक्त भोजन करें।