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सुमित हत्याकांड : तीन साल, नौ विवेचक, न्याय अभी भी दूर की कौड़ी

Tue, 29 Sep 2020 12:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2020 12:33 AM IST
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Sumit massacre: three years, nine judgments, justice still far-fetched
सुमित हत्याकांड : तीन साल, नौ विवेचक, न्याय अभी भी दूर की कौड़ी
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मुजफ्फरनगर। छपार क्षेत्र के गांव कासमपुर पठेड़ी निवासी किसान सेवा सहकारी समिति नल्हेड़ा के आंकिक सुमित की हत्या में तीन साल बाद भी पीड़ित परिजन न्याय की आस में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। आत्महत्या करार देकर लगाई गई एफआर कोर्ट खारिज कर चुका है, वहीं स्टेट मेडिको लीगल सेल भी दो बार घटनास्थल पर क्राइम सीन क्रिएट कर सुमित की हत्या किए जाने की पुष्टि कर चुका है।

छपार क्षेत्र के गांव कासमपुर पठेड़ी निवासी सुमित पुत्र ऋषिपाल सहारनपुर जनपद के रामपुर मनिहारान स्थित किसान सहकारी सेवा समिति नल्हेड़ा गुर्जर में आंकिक पद पर कार्यरत था। चार सितंबर 2017 को सुमित संदिग्ध हालात में लापता हो गया, जिसकी लाश दो दिन बाद ईख के खेत से बरामद हुई। गोली लगने से सुमित की मौत हुई, लेकिन घटनास्थल से कोई भी असलहा बरामद नहीं हुआ। पीड़ित पिता ने छह सितंबर को ही छपार थाने में किसान सेवा सहकारी समिति के सचिव जसवीर सिंह, अध्यक्ष सिकंदर, सदस्य ईश्वरपाल, संजय सिंह व विनोद और ग्राम प्रधान नल्हेड़ा विरेंद्र के खिलाफ नामजद हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन थाना पुलिस ने इसे आत्महत्या करार देते हुए मामले में एफआर लगा दी। पीड़ित पिता ने इसकी शिकायत डीआईजी से की तो मामले की दोबारा जांच सीओ देवबंद को दी गई, जिन्होंने पुलिस की विवेचना में कमियां बताते हुए सात बिंदुओं पर पुन: विस्तृत विवेचना के निर्देश दिए। यही नहीं, सीओ देवबंद की संस्तुति पर स्टेट मेडिको लीगल सेल ने घटनास्थल पर पहुंचकर क्राइम सीन क्रिएट करते हुए जांच कर इसे सीधे शब्दों में हत्या बताकर सुमित को 4.5 फीट की दूरी से गोली मारे जाने की पुष्टि की। इसके बाद से सुमित हत्याकांड में तीन साल की अवधि में नौ विवेचक बदल चुके हैं। स्टेट मेडिको लीगल सेल एक बार फिर से क्राइम सीन क्रिएट कर इसे हत्या करार दे चुकी है। इसी आधार पर कोर्ट भी छपार थाना पुलिस द्वारा सुमित की मौत को आत्महत्या करार देकर लगाई गई एफआर को निरस्त कर पुन: हत्या की धाराओं में विवेचना के आदेश दे चुका है, लेकिन पीड़ित परिजन अब भी न्याय की आस में इधर से उधर भटक रहे हैं।
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