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साहब! अपने प्रदेश में ही शरणार्थी हो गए

Wed, 06 May 2020 10:12 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 06 May 2020 10:12 PM IST
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Sir Became a refugee in my own country
साहब! अपने प्रदेश में ही शरणार्थी हो गए
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मुजफ्फरनगर। दूसरे प्रदेशों से लौटते मजदूरों के दर्द का कोई अंत नहीं है। अपनी विपदा सुनाते हुए उनका गला भर आता है। जालंधर से पैदल लौट रहे रायबरेली निवासी पंकज ने बताया कि उनके साथियों को पुलिस ने बैराज पर रोक दिया, लेकिन वह ट्राली के नीचे छुपकर पुल पार कर आया। इससे पहले चार दिन उन्हें पीछे रोके रखा गया। वह करीब डेढ़ सौ लोगों के साथ चला था, लेकिन सब बिछड़ गए। विश्वनाथ, रामादीन, ओमप्रकाश, बीसलदेव ने बताया की हम तो अपने ही प्रदेश में शरणार्थी हो गए। घर कब पहुंचेंगे इसका पता नहीं है। पुलिस और प्रशासन जरा भी सहयोग नहीं कर रहा। उनसे बेहद बुरा बर्ताव किया जा रहा है। कोई उन्हें घर पहुंचाने का बंदोबस्त नहीं कर रहा। रास्ते में थर्मल स्क्रीनिंग होती है और आगे भेज दिया जाता है, लेकिन बैराज पर तो आगे ही नहीं जाने दिया। पुलिस ने कह दिया कि लौटकर पंजाब चले जाएं। वहां न तो रोटी खाना है और न ही काम का कोई पता। आखिर सैकड़ों किलोमीटर दूर आकर अब कहां जाएं।
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