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अयोध्या की वो शाम नहीं भूलते कार सेवक...

Thu, 30 Jul 2020 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2020 11:39 PM IST
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Shriram temple movement and Muzaffarnagar
चरथावल के रामभक्त सुनील सिंह। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
अयोध्या की वो शाम नहीं भूलते कार सेवक...
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चरथावल (मुजफ्फरनगर। अयोध्या में 28 साल बाद राममंदिर बनने का सपना पूरा होने की शुभ घड़ी आने पर रामसेवक खुश हैं। रामसेवकों ने कहा कि संघर्ष के बाद भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर बनने से उनका सपना पूरा होने की घड़ी आ गई है। छह दिसंबर वर्ष 1992 अयोध्या की शाम राम भक्त लाखों लोगों के जोश और जज्बे को भूले नहीं हैं। उस दिन कार सेवापुरम के साक्षी बनने वाले क्षेत्र के रामसेवक बताते हैं कि मेरठ प्रांत के कार्यकर्ताओं में अपार जोश था। उनसे बातचीत के कुछ अंश:
प्रभु श्री राम के मंदिर निर्माण की नींव रखने की घोषणा के बाद बलवाखेड़ी निवासी आरएसएस कार्यकर्ता सुनील कुमार पुंडीर उत्साहित हैं। बात वर्ष नवंबर 1992 की है। जब वह बिजनौर जनपद के राजा के ताजपुर में किशोरावस्था में खंड कार्यवाह थे। राम मंदिर के लिए आंदोलन में उन्होंने स्वयं सेवकों में जोश भरा। बकौल उनके 30 नवंबर को बिजनौर ट्रेन से 20 कार्यकर्ताओं के साथ वह अयोध्या के लिए रवाना हो गए। लखनऊ होकर तीन दिसंबर को अयोध्या की पवित्र भूमि पर पहुंचे। उन दिनों आनंद कुमार धर्म जागरण मंच और ललित जिला प्रचारक हुआ करते थे। वहां बिजनौर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के कार्यकर्ताओं को कार सेवापुरम में ठहराया गया था। वहां संकट का समय गुजारा। भगवान श्रीराम के जन्म स्थान पर दोनों समय संतों, विहिप नेताओं और भाजपा नेताओं ने कहा कि सरयू नदी में स्नान करने के बाद मुठ्ठी भर रेत लाना है और राम चबूतरे पर रखना है। सिर्फ सांकेतिक कारसेवा करनी है। इस पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश खासकर मेरठ प्रांत के कार सेवक भड़क गए। उन्होंने आरपार की लड़ाई का एलान करते हुए चार तरह से की गई बैंरिकडिंग पार किया था। बताते हैं कि उनके ग्रुप में मौसी के लड़के मिताली निवासी सुनील मलबे में फंस गए थे। उनके ऊपर ईट गिरने से पैर टूट गया था। बमुश्किल उन्हें लेकर पूरे ग्रुप के साथ वह तीन दिन बाद बिजनौर लौटे थे। वहां से जो ईटें लेकर चले थे। कड़ी चेकिंग के कारण उन्हें वहीं रेलवे स्टेशन पर छोड़ आए थे। सुनील कहते हैं कि आगामी पांच अगस्त देशवासियों के लिए सुनहरा क्षण है। उनका वहां जाकर सेवा करने का मन है। लेकिन कोरोना की पाबंदी के कारण बाद में जाकर सेवा करेंगे।
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लखनऊ से खुरपें लेकर पैदल पहुंचे थे अयोध्या
सिंकदपुर गांव के शिव सेना से जुड़े बुजुर्ग मोल्ली उर्फ लील्लू बताते हैं कि सख्त पाबंदी के कारण लखनऊ तक वाया लक्सर, सहारनपुर होकर ट्रेन से लखनऊ पहुंचे थे। लखनऊ में कड़ी चौकसी के कारण वहां से पैदल कोल्हू पर काम करने के बात कहते हुए खुरपें लेकर पहुंचे थे। अयोध्या जाने के रास्ते में कहीं खाने का इंतजाम नहीं था। तलाशी काफी थी। उनके साथ लुहारी खुर्द के महेंद्र सिंह सैनी भी साथ गए थे। अब वह नहीं रहे। शिवसेना में होने के नाते उनके साथ गांव के 80 नौजवाज जुड़े थे।
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