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हमारे शिवालय : झारखंड देवालय में शिवाजी ने की थी पूजा
Mon, 10 Jul 2023 05:17 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 10 Jul 2023 05:17 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। कस्बे के मोहल्ला नई आबादी स्थित झारखंड महादेवालय का इतिहास पांच सदी पुराना है। मंदिर के ऊपर बने बुर्ज महादेवालय के मराठा काल को दर्शाते हैं। मुगलों से युद्ध के दौरान छत्रपति शिवाजी की सेना यहां पर रुकी थी। मंदिर के चारोें ओर झाड़ थे, इसलिए इस मंदिर का नाम झारखंड महादेवालय रखा गया।
यहां पर श्रावण मास और फाल्गुन मास की शिवरात्रि पर महादेव पर गंगाजल से अभिषेक कर पूजा की जाती है। शिवरात्रि के मौके पर भोले के जयघोष से गूंज उठता है। प्राचीन मंदिर में पंचमुखी शिवलिंग है। श्रावण मास में यहां पूजा अर्चना के श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। कांवड़ यात्रा के मौके पर कांवड़ियों के लिए रास्ता छोड़ा जाता है। इस मंदिर में शिवरात्रि महापर्व से पहले भंडारे का आयोजन मंदिर समिति की ओर से किया जाता है। मंदिर में सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह भगवान पूरी करते हैं।
मंदिर समिति के अध्यक्ष सुधीर गोयल ने बताया कि श्री झारखंड महादेवालय में शिवाजी महाराज सहित उनकी सेना ने यहां पूजा अर्चना की थी। मंदिर पर बनी बुर्ज उसके मराठा काल का होने की पौराणिकता को दर्शाते हैं।
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खतौली। कस्बे के मोहल्ला नई आबादी स्थित झारखंड महादेवालय का इतिहास पांच सदी पुराना है। मंदिर के ऊपर बने बुर्ज महादेवालय के मराठा काल को दर्शाते हैं। मुगलों से युद्ध के दौरान छत्रपति शिवाजी की सेना यहां पर रुकी थी। मंदिर के चारोें ओर झाड़ थे, इसलिए इस मंदिर का नाम झारखंड महादेवालय रखा गया।
यहां पर श्रावण मास और फाल्गुन मास की शिवरात्रि पर महादेव पर गंगाजल से अभिषेक कर पूजा की जाती है। शिवरात्रि के मौके पर भोले के जयघोष से गूंज उठता है। प्राचीन मंदिर में पंचमुखी शिवलिंग है। श्रावण मास में यहां पूजा अर्चना के श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। कांवड़ यात्रा के मौके पर कांवड़ियों के लिए रास्ता छोड़ा जाता है। इस मंदिर में शिवरात्रि महापर्व से पहले भंडारे का आयोजन मंदिर समिति की ओर से किया जाता है। मंदिर में सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह भगवान पूरी करते हैं।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष सुधीर गोयल ने बताया कि श्री झारखंड महादेवालय में शिवाजी महाराज सहित उनकी सेना ने यहां पूजा अर्चना की थी। मंदिर पर बनी बुर्ज उसके मराठा काल का होने की पौराणिकता को दर्शाते हैं।
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