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ग्रीन बेल्ट के दायरे में आई जमीन पर सबसे ज्यादा आपत्तियां
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एमडीए कार्यालय में शामली महायोजना की सुनवाई के दौरान अपनी आपत्ति बताता किसान।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। शामली महायोजना 2031 पर मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण कार्यालय में बृहस्पतिवार को अंतिम दिन सुनवाई हुई। यहां एमडीए सचिव महेंद्र प्रसाद ने आपत्तियां सुनीं। सबसे अधिक आपत्तियां शामली बाईपास की ग्रीन बेल्ट में आई जमीन को लेकर रहीं। इस बाबत एमडीए ने कहा कि बाईपास के दोनों ओर 100-100 मीटर के दायरे में हरित पट्टी क्षेत्र रहेगा। इसमें किसी भी किसान को खेती करने से नहीं रोका जाएगा।
एमडीए सचिव महेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में समिति ने मेरठ रोड स्थित कार्यालय पर आपत्तियों की सुनवाई की। इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई। सिंभालका निवासी किसान ईश्वर सिंह ने कहा कि उनकी जमीन ग्रीन बेल्ट में दर्शाई है। इसका अधिग्रहण तो नहीं होगा। इस पर एमडीए ने कहा कि वह पहले की तरह खेती करते रहें। जिस जमीन पर वह आपत्ति जता रहे हैं, वह अधिग्रहण की योजना में शामिल नहीं है। किसान अरविंद कुमार ने बाईपास के समीप स्थित बाग के विषय में कहा कि वहां पर वह निर्माण कराना चाहते हैं। एमडीए ने कहा कि बाईपास की ग्रीन बेल्ट में जो जमीन आएगी, उस पर प्राधिकरण की बिना अनुमति के निर्माण नहीं किया जा सकेगा।
पुराना सर्वे बताकर भ्रम फैलाया
एमडीए सचिव महेंद्र प्रसाद का कहना है कि किसानों और आमजन के बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि शामली महायोजना को 2011 के सर्वे पर बनाया गया है। जबकि सच यह है कि सेटेलाइट के जरिए अपडेट सर्वे है। किसानों को भी गूगल मैप पर उनकी जमीन दिखाई जा रही है। आपत्तियां लेकर आने वाले किसानों को समझाकर संतुष्ट करके वापस भेजा जा रहा है।
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1941 से 1961 के बीच सबसे ज्यादा बढ़ा शामली
महायोजना में शामली की 1901 से अब तक की जनसंख्या के आंकड़ों को भी प्रस्तुत किया गया है। एमडीए सचिव ने बताया कि शामली शहर में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी साल 1941 से 1961 के बीच हुई है।
इन्होंने भी उठाई समस्या
शामली महायोजना पर करीब 310 आपत्तियों पर सुनवाई की गई। अंतिम दिन 30 से अधिक आपत्ति कर्ता पहुंचे। किसान राजबहादुर, रणवीर सिंह, ईश्वर सिंह, सुरेश पाल सिंह, राजवीर सिंह, अरविंद कुमार, सत्यपाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह ने भी अपनी समस्याएं उठाईं।
215 वर्ग किमी की शामली महायोजना
शामली महायोजना का क्षेत्र 215 वर्ग किमी का रखा गया है। इसमें शामली, कैराना नगरपालिका, बनत, झिंझाना और ऊन नगर पंचायत के अतिरिक्त 42 राजस्व गांव भी शामिल किए गए हैं।
महायोजना में ये गांव शामिल
अलीपुर, बधेव, बधुपुरा, बलवा, बामनौली, बरला जट, वेदखेड़ी, दरगाहपुर, ढिंढाली, अर्ती, गढ़, गाजीपुरा, घीसूगढ़, झाड़ख़ेड़ी, झिंझाना ग्रामीण, कैराना ग्रामीण, कंडेला, कसेरवा कलां, कसेरवां खुर्द, खेड़ी करमू, लिलौन, मन्ना माजरा, मुंडेट कलां, पंजीठ, पीरखेड़ा, रज्जाकनगर, गोहरनी, हिंगोखेड़ी, होशंगपुर, जगनपुर, जहानपुर, जलालपुर, जमालपुर, झाल, सेंहटा, शामली ग्रामीण, शेखपुरा, सिकंदरपुर, ताजपुर सिंभालका, टपराना, ऊन आदि गांव शामिल किए गए हैं।
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एमडीए सचिव महेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में समिति ने मेरठ रोड स्थित कार्यालय पर आपत्तियों की सुनवाई की। इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई। सिंभालका निवासी किसान ईश्वर सिंह ने कहा कि उनकी जमीन ग्रीन बेल्ट में दर्शाई है। इसका अधिग्रहण तो नहीं होगा। इस पर एमडीए ने कहा कि वह पहले की तरह खेती करते रहें। जिस जमीन पर वह आपत्ति जता रहे हैं, वह अधिग्रहण की योजना में शामिल नहीं है। किसान अरविंद कुमार ने बाईपास के समीप स्थित बाग के विषय में कहा कि वहां पर वह निर्माण कराना चाहते हैं। एमडीए ने कहा कि बाईपास की ग्रीन बेल्ट में जो जमीन आएगी, उस पर प्राधिकरण की बिना अनुमति के निर्माण नहीं किया जा सकेगा।
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पुराना सर्वे बताकर भ्रम फैलाया
एमडीए सचिव महेंद्र प्रसाद का कहना है कि किसानों और आमजन के बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि शामली महायोजना को 2011 के सर्वे पर बनाया गया है। जबकि सच यह है कि सेटेलाइट के जरिए अपडेट सर्वे है। किसानों को भी गूगल मैप पर उनकी जमीन दिखाई जा रही है। आपत्तियां लेकर आने वाले किसानों को समझाकर संतुष्ट करके वापस भेजा जा रहा है।
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1941 से 1961 के बीच सबसे ज्यादा बढ़ा शामली
महायोजना में शामली की 1901 से अब तक की जनसंख्या के आंकड़ों को भी प्रस्तुत किया गया है। एमडीए सचिव ने बताया कि शामली शहर में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी साल 1941 से 1961 के बीच हुई है।
इन्होंने भी उठाई समस्या
शामली महायोजना पर करीब 310 आपत्तियों पर सुनवाई की गई। अंतिम दिन 30 से अधिक आपत्ति कर्ता पहुंचे। किसान राजबहादुर, रणवीर सिंह, ईश्वर सिंह, सुरेश पाल सिंह, राजवीर सिंह, अरविंद कुमार, सत्यपाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह ने भी अपनी समस्याएं उठाईं।
215 वर्ग किमी की शामली महायोजना
शामली महायोजना का क्षेत्र 215 वर्ग किमी का रखा गया है। इसमें शामली, कैराना नगरपालिका, बनत, झिंझाना और ऊन नगर पंचायत के अतिरिक्त 42 राजस्व गांव भी शामिल किए गए हैं।
महायोजना में ये गांव शामिल
अलीपुर, बधेव, बधुपुरा, बलवा, बामनौली, बरला जट, वेदखेड़ी, दरगाहपुर, ढिंढाली, अर्ती, गढ़, गाजीपुरा, घीसूगढ़, झाड़ख़ेड़ी, झिंझाना ग्रामीण, कैराना ग्रामीण, कंडेला, कसेरवा कलां, कसेरवां खुर्द, खेड़ी करमू, लिलौन, मन्ना माजरा, मुंडेट कलां, पंजीठ, पीरखेड़ा, रज्जाकनगर, गोहरनी, हिंगोखेड़ी, होशंगपुर, जगनपुर, जहानपुर, जलालपुर, जमालपुर, झाल, सेंहटा, शामली ग्रामीण, शेखपुरा, सिकंदरपुर, ताजपुर सिंभालका, टपराना, ऊन आदि गांव शामिल किए गए हैं।