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सदर सीट : सौरभ क्लीन बोल्ड, कपिल देव ने लगाई हैट्रिक
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मुजफ्फरनगर के बालाजी चौक पर जीत का जशन मनाते भाजपाई।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। सदर सीट पर भाजपा के कपिलदेव अग्रवाल ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है। पहले राउंड से लेकर आखिर के राउंड तक मतगणना ने दोनो प्रत्याशियों की धड़कने बढ़ाए रखी। सपा-रालोद प्रत्याशी सौरभ स्वरूप इस चुनाव में कुछ खास नहीं कर पाए।
मुजफ्फरनगर शहर विधानसभा सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है। इस सीट पर भाजपा अपना परचम लहराती रही है। इस सीट पर प्रदेश के राज्य मंत्री और भाजपा प्रत्याशी कपिलदेव अग्रवाल और पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के पुत्र रालोद प्रत्याशी सौरभ स्वरूप बंटी के बीच मुकाबला रहा। पहले दो राउंड में भाजपा के कपिलदेव अग्रवाल आगे रहे तो उसके बाद सौरभ स्वरूप आगे निकल लिए। 14 राउंड तक बंटी आगे रहे। इसके बाद भाजपा ने बढ़त बना दी और अंतिम राउंड तक आगे ही रही।
कपिलदेव अग्रवाल यहां लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं। 2012 में यहां चितरंजन स्वरूप चुनाव जीते थे, उनके निधन के बाद हुए उप चुनाव में कपिलदेव चुनाव जीते और उन्होंने चितरंजन के बेटे गौरव स्वरूप को हराया। 2017 के चुनाव में फिर यही स्थिति रही और कपिलदेव चुनाव जीते। इस चुनाव में कपिल ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है। उनकी जीत में शहर के वैश्य समाज, पंजाबी समाज, ब्राहमण समाज के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग की बड़ी भूमिका रही है। अति पिछड़ों की इस सीट पर लगभग 70 हजार वोट हैं। बसपा के पुष्पांकर पाल ने अतिपिछड़ो ने नकार दिया और एक तरफा भाजपा के पक्ष में मतदान किया। शहर की सीट पर वोटों का हर बार ध्रुवीकरण होता रहा है, इस बार भी यही स्थिति रही और भाजपा को इसका सीधा लाभ मिला।
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मुजफ्फरनगर शहर विधानसभा सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है। इस सीट पर भाजपा अपना परचम लहराती रही है। इस सीट पर प्रदेश के राज्य मंत्री और भाजपा प्रत्याशी कपिलदेव अग्रवाल और पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप के पुत्र रालोद प्रत्याशी सौरभ स्वरूप बंटी के बीच मुकाबला रहा। पहले दो राउंड में भाजपा के कपिलदेव अग्रवाल आगे रहे तो उसके बाद सौरभ स्वरूप आगे निकल लिए। 14 राउंड तक बंटी आगे रहे। इसके बाद भाजपा ने बढ़त बना दी और अंतिम राउंड तक आगे ही रही।
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कपिलदेव अग्रवाल यहां लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं। 2012 में यहां चितरंजन स्वरूप चुनाव जीते थे, उनके निधन के बाद हुए उप चुनाव में कपिलदेव चुनाव जीते और उन्होंने चितरंजन के बेटे गौरव स्वरूप को हराया। 2017 के चुनाव में फिर यही स्थिति रही और कपिलदेव चुनाव जीते। इस चुनाव में कपिल ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है। उनकी जीत में शहर के वैश्य समाज, पंजाबी समाज, ब्राहमण समाज के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग की बड़ी भूमिका रही है। अति पिछड़ों की इस सीट पर लगभग 70 हजार वोट हैं। बसपा के पुष्पांकर पाल ने अतिपिछड़ो ने नकार दिया और एक तरफा भाजपा के पक्ष में मतदान किया। शहर की सीट पर वोटों का हर बार ध्रुवीकरण होता रहा है, इस बार भी यही स्थिति रही और भाजपा को इसका सीधा लाभ मिला।
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