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रोहित गैंग के खात्मे से टूटा खौफ का साम्राज्य, कारोबारी थे निशाने पर
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मुजफ्फरनगर के नई मंडी क्षेत्र के बिलासपुर मार्ग स्थित घटनास्थल पर मौजूद पुलिस टीम।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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रोहित गैंग के खात्मे से टूटा खौफ का साम्राज्य, कारोबारी थे निशाने पर
मुजफ्फरनगर। सुपारी किलर रोहित उर्फ सांडू के साथ ही उसके तीन अन्य साथियों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के साथ ही उसके खौफ के साम्राज्य का अंत हो गया है। अभिरक्षा से फरार होने के बाद रोहित के निशाने पर मुजफ्फरनगर व मंसूरपुर के कई कारोबारी थे, जिनकी सुरक्षा में दिन-रात 70 से अधिक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गईं थीं।
मंसूरपुर क्षेत्र के गांव जौहरा निवासी सुपारी किलर रोहित उर्फ सांडू पुत्र नेपाल सिंह ने कम समय में ही जनपद के साथ ही मेरठ में भी खौफ का साम्राज्य खड़ा कर दिया था। उसके खौफ का आलम यह था कि कई बड़े कारोबारियों से उसके गुर्गे खुलेआम अवैध वसूली कर रहे थे। जेल में रहते हुए खौफ कायम रख पाने में कामयाब रहा रोहित अब सूचीबद्ध माफिया सरगना सुशील मूंछ की हत्या कर पश्चिमी यूपी का सबसे बड़ा डॉन बनने का मंसूबा पाले हुए था। इसी क्रम में वह दो जुलाई को मिर्जापुर पुलिस के दरोगा दुर्गविजय सिंह की हत्या कर अभिरक्षा से फरार हो गया था। पुलिस जांच में रोहित उर्फ सांडू के मेरठ के एक लाख के इनामी रहे भूपेंद्र बाफर व संजीव जीवा-मुन्ना बजरंगी गैंग के साथ हाथ मिलाने की खबरें छन-छनकर बाहर आतीं रहीं, लेकिन अफसर इसकी पुष्टि करने से कतराते रहे। सूत्रों की मानें तो अभिरक्षा से फरार होने के बाद मंसूरपुर और मुजफ्फरनगर के कई कारोबारी रोहित के निशाने पर थे। फरारी के बाद पुलिस अफसरों को भी दिन-रात उसके द्वारा किसी बड़ी वारदात को अंजाम दिए जाने का इनपुट लगातार मिल रहा था। यही कारण रहा कि उसकी अभिरक्षा से फरारी के दौरान 14 दिन तक लगातार 70 से अधिक पुलिसकर्मी चिह्नित कारोबारियों की सुरक्षा में लगे हुए थे। मंगलवार को रोहित के साथ ही उसके तीन अन्य साथियों के एनकाउंटर में ढेर होने के बाद उसके द्वारा कायम किया गया खौफ का साम्राज्य लगभग पूरी तरह से टूट चुका है, जिससे न केवल पुलिस ने बल्कि उसके निशाने पर रहे कारोबारियों व आम जनमानस ने भी राहत की सांस ली है।
कांवड़ यात्रा के दौरान मिल जाती आवाजाही की छूट
मुजफ्फरनगर। जनपद के कई कारोबारियों के साथ ही कुछ और लोगों को टारगेट पर रखते हुए रोहित कांवड़ यात्रा के शुरू होने का इंतजार कर रहा था। इसीलिए फरारी के बाद अधिकांश समय वह जनपद के ही जंगलों में छिपे रहकर जगह बदलते हुए कांवड़ यात्रा शुरू होने का बेसब्री से इंतजार करता रहा। दरअसल, कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही पुलिस-प्रशासन शिवभक्तों की सुरक्षा में लग जाता। अधिकांश मौकों पर कांवड़ियों की आवाजाही पर किसी तरह की रोक-टोक भी नहीं होती। वहीं, दूसरी ओर बारिश का मौसम शुरू होने से हाईवे के साथ ही संपर्क मार्गों पर भी पुलिस चेकिंग बंद हो जाती है, जिसका फायदा रोहित को मिल जाता। हालांकि उसके इन मंसूबों को कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही खाकी की गोलियों ने उसे अपना निशाना बना लिया। एसपी सिटी सतपाल आंतिल ने बताया कि मुजफ्फरनगर के साथ ही मंसूरपुर के भी कई लोग रोहित के निशाने पर थे, जिन्हें लगातार सुरक्षा मुहैया कराई जा रही थी। कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही उसके द्वारा किसी वारदात को अंजाम दिए जाने की आशंका थी, लेकिन इससे पहले ही वह मुठभेड़ में पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
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बाफर पर गैस एजेंसी पर कब्जे के प्रयास का आरोप
मुजफ्फरनगर। जेल में बंद शातिर भूपेंद्र बाफर पर अब शहर की एक गैस एजेंसी की महिला मालिक ने जबरन कब्जे के प्रयास व धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने पुलिस ऑफिस में तहरीर देते हुए कार्रवाई की गुहार लगाते हुए जान का भी खतरा जताया है।
मेरठ की डिफेंस कॉलोनी निवासी मोहिनी सिंह शहीद कर्नल ओंकार सिंह की बेटी हैं, जिन्हें सरकार की तरफ से गैस एजेंसी अलॉट की गई थी। मोहिनी सिंह की मुजफ्फरनगर गैस एजेंसी शहर के प्रकाश चौक के पास स्थित है। पीड़िता बुधवार सुबह पुलिस ऑफिस पहुंची और तहरीर देकर बताया कि करीब चार साल पूर्व भूपेंद्र बाफर ने उसके यहां पहुंचकर धमकी देते हुए कुछ कोरे स्टांप पेपर व अन्य कागजात पर जबरन उसके हस्ताक्षर करा लिए थे। उक्त पेपर्स में क्या लिखा था, इससे अनभिज्ञता जताते हुए मोहिनी सिंह ने बताया कि इसके बाद से ही भूपेंद्र बाफर अक्सर गैस एजेंसी पर आ जाता और जबरन ऑफिस में घुसकर बैठ जाता। बाद में बाफर के साथ ही उसका एक रिश्तेदार भी गैस एजेंसी पर आए दिन शराब पीकर आता और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करता रहा। पीड़िता के अनुसार, इसका विरोध करने पर उसे व एजेंसी कर्मचारियों को धमकियां दी जातीं थीं, लेकिन भूपेंद्र बाफर के खौफ के चलते वह कभी मुंह नहीं खोल सकी। पीड़िता ने एसएसपी अभिषेक यादव से उसके हस्ताक्षरित कागजात वापस दिलाए जाने, भूपेंद्र बाफर के खिलाफ कार्रवाई किए जाने व सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने की मांग की है। इस मामले में एसएसपी का कहना है कि गैस एजेंसी की मालकिन ने शिकायत की है, जिसके आधार पर मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
रोहित के बाद अगला टारगेट कौन ?
दो जुलाई को दरोगा दुर्गविजय सिंह की हत्या कर अभिरक्षा से फरार हुए रोहित और उसके गैंग के खात्मे के साथ ही अब पुलिस के अगले टारगेट को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। जनपद के इनामी बदमाशों की बात करें तो अधिकांश बदमाशों को या तो पुलिस ऊपर पहुंचा चुकी है या फिर सलाखों के पीछे। बड़े बदमाशों में अब केवल दो लाख का इनामी हरीश भौराखुर्द ही अब जनपद पुलिस की पकड़ से दूर है, जबकि उसके भाई आदेश को 24 जून की रात पुलिस मुठभेड़ में ढेर कर चुकी है।
जनपद पुलिस द्वारा पिछले करीब दो साल में अपराधियों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलने से अपराधियों के हौसले पस्त हुए हैं। ताबड़तोड़ एनकाउंटर में जनपद से एक दर्जन से अधिक बड़े बदमाशों का सफाया किया जा चुका है, जबकि सवा सौ बदमाश गोलियों से घायल होकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिए गए हैं। मंगलवार को पुलिस की गोलियों का निशाना बने सुपारी किलर रोहित सांडू व उसके साथी राकेश यादव के साथ ही उसके दो साथी अमित उर्फ शेरू व रजत उर्फ रविंद्र उर्फ कालिया मेरठ पुलिस द्वारा ढेर कर दिए गए। इससे पहले जनपद पुलिस कुख्यात नितिन पबरसा, नदीम, जान मोहम्मद, फुरकान, शमीम उर्फ मोटा, इंद्रपाल, विकास जाट, रिहान, रमेश उर्फ नानू, आस मोहम्मद उर्फ लंबू व आदेश भौराखुर्द को मुठभेड़ में ढेर कर चुकी है। वहीं, सवा सौ से अधिक बदमाश पुलिस की गोलियों से घायल होकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। रोहित सांडू गैंग के खात्मे के साथ ही जिले के बड़े बदमाशों में अब केवल दो लाख का इनामी हरीश भौराखुर्द ही पुलिस की पकड़ से दूर है। ऐसे में जनपद में इस बात की चर्चाएं हो रहीं हैं कि रोहित उर्फ सांडू के खात्मे के साथ ही पुलिस का अगला टारगेट कौन होने वाला है ?
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मुजफ्फरनगर। सुपारी किलर रोहित उर्फ सांडू के साथ ही उसके तीन अन्य साथियों के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के साथ ही उसके खौफ के साम्राज्य का अंत हो गया है। अभिरक्षा से फरार होने के बाद रोहित के निशाने पर मुजफ्फरनगर व मंसूरपुर के कई कारोबारी थे, जिनकी सुरक्षा में दिन-रात 70 से अधिक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गईं थीं।
मंसूरपुर क्षेत्र के गांव जौहरा निवासी सुपारी किलर रोहित उर्फ सांडू पुत्र नेपाल सिंह ने कम समय में ही जनपद के साथ ही मेरठ में भी खौफ का साम्राज्य खड़ा कर दिया था। उसके खौफ का आलम यह था कि कई बड़े कारोबारियों से उसके गुर्गे खुलेआम अवैध वसूली कर रहे थे। जेल में रहते हुए खौफ कायम रख पाने में कामयाब रहा रोहित अब सूचीबद्ध माफिया सरगना सुशील मूंछ की हत्या कर पश्चिमी यूपी का सबसे बड़ा डॉन बनने का मंसूबा पाले हुए था। इसी क्रम में वह दो जुलाई को मिर्जापुर पुलिस के दरोगा दुर्गविजय सिंह की हत्या कर अभिरक्षा से फरार हो गया था। पुलिस जांच में रोहित उर्फ सांडू के मेरठ के एक लाख के इनामी रहे भूपेंद्र बाफर व संजीव जीवा-मुन्ना बजरंगी गैंग के साथ हाथ मिलाने की खबरें छन-छनकर बाहर आतीं रहीं, लेकिन अफसर इसकी पुष्टि करने से कतराते रहे। सूत्रों की मानें तो अभिरक्षा से फरार होने के बाद मंसूरपुर और मुजफ्फरनगर के कई कारोबारी रोहित के निशाने पर थे। फरारी के बाद पुलिस अफसरों को भी दिन-रात उसके द्वारा किसी बड़ी वारदात को अंजाम दिए जाने का इनपुट लगातार मिल रहा था। यही कारण रहा कि उसकी अभिरक्षा से फरारी के दौरान 14 दिन तक लगातार 70 से अधिक पुलिसकर्मी चिह्नित कारोबारियों की सुरक्षा में लगे हुए थे। मंगलवार को रोहित के साथ ही उसके तीन अन्य साथियों के एनकाउंटर में ढेर होने के बाद उसके द्वारा कायम किया गया खौफ का साम्राज्य लगभग पूरी तरह से टूट चुका है, जिससे न केवल पुलिस ने बल्कि उसके निशाने पर रहे कारोबारियों व आम जनमानस ने भी राहत की सांस ली है।
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मुजफ्फरनगर। जनपद के कई कारोबारियों के साथ ही कुछ और लोगों को टारगेट पर रखते हुए रोहित कांवड़ यात्रा के शुरू होने का इंतजार कर रहा था। इसीलिए फरारी के बाद अधिकांश समय वह जनपद के ही जंगलों में छिपे रहकर जगह बदलते हुए कांवड़ यात्रा शुरू होने का बेसब्री से इंतजार करता रहा। दरअसल, कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही पुलिस-प्रशासन शिवभक्तों की सुरक्षा में लग जाता। अधिकांश मौकों पर कांवड़ियों की आवाजाही पर किसी तरह की रोक-टोक भी नहीं होती। वहीं, दूसरी ओर बारिश का मौसम शुरू होने से हाईवे के साथ ही संपर्क मार्गों पर भी पुलिस चेकिंग बंद हो जाती है, जिसका फायदा रोहित को मिल जाता। हालांकि उसके इन मंसूबों को कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले ही खाकी की गोलियों ने उसे अपना निशाना बना लिया। एसपी सिटी सतपाल आंतिल ने बताया कि मुजफ्फरनगर के साथ ही मंसूरपुर के भी कई लोग रोहित के निशाने पर थे, जिन्हें लगातार सुरक्षा मुहैया कराई जा रही थी। कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही उसके द्वारा किसी वारदात को अंजाम दिए जाने की आशंका थी, लेकिन इससे पहले ही वह मुठभेड़ में पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
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बाफर पर गैस एजेंसी पर कब्जे के प्रयास का आरोप
मुजफ्फरनगर। जेल में बंद शातिर भूपेंद्र बाफर पर अब शहर की एक गैस एजेंसी की महिला मालिक ने जबरन कब्जे के प्रयास व धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने पुलिस ऑफिस में तहरीर देते हुए कार्रवाई की गुहार लगाते हुए जान का भी खतरा जताया है।
मेरठ की डिफेंस कॉलोनी निवासी मोहिनी सिंह शहीद कर्नल ओंकार सिंह की बेटी हैं, जिन्हें सरकार की तरफ से गैस एजेंसी अलॉट की गई थी। मोहिनी सिंह की मुजफ्फरनगर गैस एजेंसी शहर के प्रकाश चौक के पास स्थित है। पीड़िता बुधवार सुबह पुलिस ऑफिस पहुंची और तहरीर देकर बताया कि करीब चार साल पूर्व भूपेंद्र बाफर ने उसके यहां पहुंचकर धमकी देते हुए कुछ कोरे स्टांप पेपर व अन्य कागजात पर जबरन उसके हस्ताक्षर करा लिए थे। उक्त पेपर्स में क्या लिखा था, इससे अनभिज्ञता जताते हुए मोहिनी सिंह ने बताया कि इसके बाद से ही भूपेंद्र बाफर अक्सर गैस एजेंसी पर आ जाता और जबरन ऑफिस में घुसकर बैठ जाता। बाद में बाफर के साथ ही उसका एक रिश्तेदार भी गैस एजेंसी पर आए दिन शराब पीकर आता और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करता रहा। पीड़िता के अनुसार, इसका विरोध करने पर उसे व एजेंसी कर्मचारियों को धमकियां दी जातीं थीं, लेकिन भूपेंद्र बाफर के खौफ के चलते वह कभी मुंह नहीं खोल सकी। पीड़िता ने एसएसपी अभिषेक यादव से उसके हस्ताक्षरित कागजात वापस दिलाए जाने, भूपेंद्र बाफर के खिलाफ कार्रवाई किए जाने व सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने की मांग की है। इस मामले में एसएसपी का कहना है कि गैस एजेंसी की मालकिन ने शिकायत की है, जिसके आधार पर मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
रोहित के बाद अगला टारगेट कौन ?
दो जुलाई को दरोगा दुर्गविजय सिंह की हत्या कर अभिरक्षा से फरार हुए रोहित और उसके गैंग के खात्मे के साथ ही अब पुलिस के अगले टारगेट को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। जनपद के इनामी बदमाशों की बात करें तो अधिकांश बदमाशों को या तो पुलिस ऊपर पहुंचा चुकी है या फिर सलाखों के पीछे। बड़े बदमाशों में अब केवल दो लाख का इनामी हरीश भौराखुर्द ही अब जनपद पुलिस की पकड़ से दूर है, जबकि उसके भाई आदेश को 24 जून की रात पुलिस मुठभेड़ में ढेर कर चुकी है।
जनपद पुलिस द्वारा पिछले करीब दो साल में अपराधियों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलने से अपराधियों के हौसले पस्त हुए हैं। ताबड़तोड़ एनकाउंटर में जनपद से एक दर्जन से अधिक बड़े बदमाशों का सफाया किया जा चुका है, जबकि सवा सौ बदमाश गोलियों से घायल होकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिए गए हैं। मंगलवार को पुलिस की गोलियों का निशाना बने सुपारी किलर रोहित सांडू व उसके साथी राकेश यादव के साथ ही उसके दो साथी अमित उर्फ शेरू व रजत उर्फ रविंद्र उर्फ कालिया मेरठ पुलिस द्वारा ढेर कर दिए गए। इससे पहले जनपद पुलिस कुख्यात नितिन पबरसा, नदीम, जान मोहम्मद, फुरकान, शमीम उर्फ मोटा, इंद्रपाल, विकास जाट, रिहान, रमेश उर्फ नानू, आस मोहम्मद उर्फ लंबू व आदेश भौराखुर्द को मुठभेड़ में ढेर कर चुकी है। वहीं, सवा सौ से अधिक बदमाश पुलिस की गोलियों से घायल होकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। रोहित सांडू गैंग के खात्मे के साथ ही जिले के बड़े बदमाशों में अब केवल दो लाख का इनामी हरीश भौराखुर्द ही पुलिस की पकड़ से दूर है। ऐसे में जनपद में इस बात की चर्चाएं हो रहीं हैं कि रोहित उर्फ सांडू के खात्मे के साथ ही पुलिस का अगला टारगेट कौन होने वाला है ?