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Muzaffarnagar News: एनडीए में असहज होने लगे रालोद के मुस्लिम नेता

Tue, 28 Jan 2025 12:51 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jan 2025 12:51 AM IST
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RLD's Muslim leaders started feeling uncomfortable in NDA
अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। पश्चिम यूपी में बड़ा वोट बैंक होने के बावजूद सियासत में अलग-थलग पड़े मुस्लिम नेता साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नई सियासी राह चुनने की तैयारी में है। रालोद के एनडीए में शामिल हो जाने के बाद कई मुस्लिम नेता भविष्य की राजनीति को लेकर असहज दिख रहे हैं। यही वजह है कि दलित-मुस्लिम समीकरण की कवायद में पूर्व सांसद अमीर आलम खान ने आसपा का दामन थामने का फैसला किया है।
पश्चिम यूपी में जाट-मुस्लिम समीकरण नतीजे बदलता रहा है। लेकिन मुजफ्फरनगर दंगे के बाद जातीय समीकरण बिखर गया। साल 2022 में सपा-रालोद गठबंधन में फिर यही समीकरण दिखा, जिस कारण पश्चिम में रालोद-सपा ने भाजपा को करारा झटका दिया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में रालोद और सपा की राह अलग हो गई। रालोद ने भाजपा के साथ मिलकर एनडीए का दामन थाम लिया। नए गठबंधन को अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन रालोद के मुस्लिम नेता खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
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जाट-मुस्लिम समीकरण का असर 2024 में बेअसर रहा। ऐसे में रालोद के मुस्लिम नेता भविष्य की राजनीति का ताना बाना बुनते हुए दलित-मुस्लिम समीकरण बनाने की कवायद में जुटे हुए हैं। इसी शुरुआत भी दो फरवरी से दिखेगी। रालोद के राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके बेटे नवाजिश आलम खान ने अब आसपा का दामन थामने की तैयारी कर ली है। आसपा से पूर्व विधायक नवाजिश आलम बुढ़ाना विधानसभा सीट से टिकट के दावेदार हैं।
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असल में इस सीट पर सबसे अधिक संख्या मुस्लिम मतों की है। नवाजिश इस सीट से विधायक रह चुके हैं।
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