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समाजसेवा में जुटी में हैं सेवानिवृत्त शिक्षिका
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समाजसेवा में जुटी में हैं सेवानिवृत्त शिक्षिका
मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। देश में जज्बे और जुनून के साथ जनता के बीच समाज की सेवा करने वालों की कमी नहीं है। क्षेत्र की सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका ने भी जनता की सेवा करने का बीड़ा उठाया है। लॉकडाउन के बाद से ही उन्होंनेे पेंशन से कपड़ा आदि अन्य सामान खरीदकर मास्क बनाने शुरू किए। रोजाना मास्क बनकर शिक्षिका सभी विभागों और आम जनता को बांट रही हैं। इसके अलावा गरीब की लड़कियों को विभिन्न प्रशिक्षण देकर उनका कैरियर सुधार रही हैं।
संतोष कुमारी कस्बे की कन्या जूनियर हाईस्कूल से प्रधानाध्यापिका के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने स्कूल में आकर कमजोर विद्यार्थियों की अतिरिक्त क्लास लेना, लड़कियों को सिलाई, मैक्रम का कार्य, कुशन बनाना व कड़ाई आदि कार्य का प्रशिक्षण दिया। देश में कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन की घोषणा के बाद उन्होंने अपनी पेंशन से कॉटन का कपड़ा आदि खरीदकर मास्क बनवाने का कार्य आरंभ किया। छात्राओं मानसी, मनीषा, दिलशाना, ज्योति, हिमादरी आदि को साथ लेकर मास्क बनाने शुरू किए। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत कार्यालय, उपजिलाधिकारी कार्यालय, तहसीलदार कार्यालय, खंड विकास अधिकारी कार्यालय, खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय में जाकर कर्मचारियों व अधिकारियों को मास्क का वितरण किया। पुलिस कर्मियों के लिए उन्होने खाकी रंग के मास्क तैयार किए हैं। बाजार में भी घूम-घूम कर मास्क बांटती हैं।
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मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। देश में जज्बे और जुनून के साथ जनता के बीच समाज की सेवा करने वालों की कमी नहीं है। क्षेत्र की सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका ने भी जनता की सेवा करने का बीड़ा उठाया है। लॉकडाउन के बाद से ही उन्होंनेे पेंशन से कपड़ा आदि अन्य सामान खरीदकर मास्क बनाने शुरू किए। रोजाना मास्क बनकर शिक्षिका सभी विभागों और आम जनता को बांट रही हैं। इसके अलावा गरीब की लड़कियों को विभिन्न प्रशिक्षण देकर उनका कैरियर सुधार रही हैं।
संतोष कुमारी कस्बे की कन्या जूनियर हाईस्कूल से प्रधानाध्यापिका के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने स्कूल में आकर कमजोर विद्यार्थियों की अतिरिक्त क्लास लेना, लड़कियों को सिलाई, मैक्रम का कार्य, कुशन बनाना व कड़ाई आदि कार्य का प्रशिक्षण दिया। देश में कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन की घोषणा के बाद उन्होंने अपनी पेंशन से कॉटन का कपड़ा आदि खरीदकर मास्क बनवाने का कार्य आरंभ किया। छात्राओं मानसी, मनीषा, दिलशाना, ज्योति, हिमादरी आदि को साथ लेकर मास्क बनाने शुरू किए। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत कार्यालय, उपजिलाधिकारी कार्यालय, तहसीलदार कार्यालय, खंड विकास अधिकारी कार्यालय, खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय में जाकर कर्मचारियों व अधिकारियों को मास्क का वितरण किया। पुलिस कर्मियों के लिए उन्होने खाकी रंग के मास्क तैयार किए हैं। बाजार में भी घूम-घूम कर मास्क बांटती हैं।
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