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राशन की आस में दफ्तरों का चक्कर काटने को विवश
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राशन की आस में दफ्तरों का चक्कर काटने को विवश
मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में मिल रहे राशन की आस में जिले में हजारों गरीब परिवार दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान ऐसे पात्र गरीबों के सामने दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन में ऐसे गरीब पात्रों की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
जिले में इस समय पांच लाख दो हजार 799 परिवारों को राशन वितरित किया जा रहा है। कोरोना के बाद जल्दबाजी में प्रशासन से जुड़े लोगों ने ऐसे लोगों के राशन कार्ड तो बना दिए, जो इसके पात्र नहीं थे। ऐसे हजारों लोग छोड़ दिए जो वास्तव में पात्र हैं। ऐसे लोग अप्रैल माह से ही दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इन गरीबों की कोई सुनने वाला नहीं है। जिले में हजारों की संख्या में ऐसे पात्र लोग है, जिनकी पीड़ा कोई सुनने वाला नहीं है। कोरोना महामारी के चलते इन परिवारों के सामने पेट की आग बुझाने का संकट है। अफसरों की गैरजिम्मेदारी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की प्रत्येक गरीब की सहायता करने की मंशा भी पूरी नहीं हो पा रही है। पूर्ति कार्यालय पर प्रतिदिन लगने वाली गरीबों की भीड़ उनकी पीड़ा को बयां करती हैं।
अब तक नहीं बन पाए राशन कार्ड
खतौली। नगर और क्षेत्र में बड़ी संख्या में गरीब लोगों के राशन कार्ड नहीं बन पाए हैं। विभाग के छह माह से चक्कर काट रही पूनम शर्मा कहती हैं कि वह ऑनलाइन आवेदन कर चुकी हैं। पति की मृत्यु हो चुकी है, परिवार में आय का कोई साधन नहीं है। उसे इसके बाद भी राशन कार्ड जारी नहीं हो पाया है। कांति और उसका पति प्रवासी श्रमिक हैं। अप्रैल माह में राशनकार्ड के लिए आवेदन किया था। राशनकार्ड सूची में नाम न आने के कारण डीलर ने खाद्यान्न नहीं दिया। राशन के लिए पात्रता रखने वाली सोनिया, होली चौक निवासी किरण, विधवा मधु शर्मा, मजदूर राबिया, डेरी संचालक नरेंद्र कुमार, लता रानी, पथ विक्रेता प्रेमचंद, कीर्ति भाटिया, खुर्शीदा, मधुबाला, इमराना सहित सैकड़ों परिवार राशन कार्ड के लिए पूर्ति विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
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सैकड़ों लोग राशन से वंचित
पुरकाजी। सैकड़ों लोग यहां बिना राशन कार्ड के परेशान है। गरीब, विधवा महिलाओं तक के राशन कार्ड नहीं बने हैं। विधवा आदेश, ऋचा पांच महीने से चक्कर काट रही है। गरीब परिवार का संजय भी राशन से वंचित है।
गेहूं और चावल दिया जा रहा कार्ड धारकों को
मुजफ्फरनगर। डीएसओ जाकिर हुसैन ने बताया कि जुलाई माह में राशन कार्ड धारकों को पांच से 15 जुलाई तक प्रति यूनिट तीन किलो गेहूं दो रुपए किलो और दो किलो चावल तीन रुपये किलो दिया गया। 21 से 30 जुलाई तक चल रहे वितरण में तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल प्रति यूनिट नि:शुल्क दिया जा रहा है।
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मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में मिल रहे राशन की आस में जिले में हजारों गरीब परिवार दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान ऐसे पात्र गरीबों के सामने दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन में ऐसे गरीब पात्रों की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
जिले में इस समय पांच लाख दो हजार 799 परिवारों को राशन वितरित किया जा रहा है। कोरोना के बाद जल्दबाजी में प्रशासन से जुड़े लोगों ने ऐसे लोगों के राशन कार्ड तो बना दिए, जो इसके पात्र नहीं थे। ऐसे हजारों लोग छोड़ दिए जो वास्तव में पात्र हैं। ऐसे लोग अप्रैल माह से ही दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इन गरीबों की कोई सुनने वाला नहीं है। जिले में हजारों की संख्या में ऐसे पात्र लोग है, जिनकी पीड़ा कोई सुनने वाला नहीं है। कोरोना महामारी के चलते इन परिवारों के सामने पेट की आग बुझाने का संकट है। अफसरों की गैरजिम्मेदारी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की प्रत्येक गरीब की सहायता करने की मंशा भी पूरी नहीं हो पा रही है। पूर्ति कार्यालय पर प्रतिदिन लगने वाली गरीबों की भीड़ उनकी पीड़ा को बयां करती हैं।
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अब तक नहीं बन पाए राशन कार्ड
खतौली। नगर और क्षेत्र में बड़ी संख्या में गरीब लोगों के राशन कार्ड नहीं बन पाए हैं। विभाग के छह माह से चक्कर काट रही पूनम शर्मा कहती हैं कि वह ऑनलाइन आवेदन कर चुकी हैं। पति की मृत्यु हो चुकी है, परिवार में आय का कोई साधन नहीं है। उसे इसके बाद भी राशन कार्ड जारी नहीं हो पाया है। कांति और उसका पति प्रवासी श्रमिक हैं। अप्रैल माह में राशनकार्ड के लिए आवेदन किया था। राशनकार्ड सूची में नाम न आने के कारण डीलर ने खाद्यान्न नहीं दिया। राशन के लिए पात्रता रखने वाली सोनिया, होली चौक निवासी किरण, विधवा मधु शर्मा, मजदूर राबिया, डेरी संचालक नरेंद्र कुमार, लता रानी, पथ विक्रेता प्रेमचंद, कीर्ति भाटिया, खुर्शीदा, मधुबाला, इमराना सहित सैकड़ों परिवार राशन कार्ड के लिए पूर्ति विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
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सैकड़ों लोग राशन से वंचित
पुरकाजी। सैकड़ों लोग यहां बिना राशन कार्ड के परेशान है। गरीब, विधवा महिलाओं तक के राशन कार्ड नहीं बने हैं। विधवा आदेश, ऋचा पांच महीने से चक्कर काट रही है। गरीब परिवार का संजय भी राशन से वंचित है।
गेहूं और चावल दिया जा रहा कार्ड धारकों को
मुजफ्फरनगर। डीएसओ जाकिर हुसैन ने बताया कि जुलाई माह में राशन कार्ड धारकों को पांच से 15 जुलाई तक प्रति यूनिट तीन किलो गेहूं दो रुपए किलो और दो किलो चावल तीन रुपये किलो दिया गया। 21 से 30 जुलाई तक चल रहे वितरण में तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल प्रति यूनिट नि:शुल्क दिया जा रहा है।