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Muzaffarnagar News: देहरादून के लिए खास मुजफ्फरनगर - हमने पूछा महिलाएं कहां है, पुलिसवाले बोले...उत्तराखंड लोगे

Thu, 04 Jan 2024 11:46 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर Updated Thu, 04 Jan 2024 11:46 PM IST
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Rampur Tiraha incident: We asked where the women were, policemen said...Uttarakhand people
कोर्ट में रामपुर तिराहा कांड की सुनवाई के दौरान पहुंचे अधिवक्ता। स्रोत- अ​​धिवक्ता
- रामपुर तिराहा कांड के गवाह को अदालत में किया गया पेश
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फोटो समेत
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में महिलाओं पर किए गए अत्याचार के चश्मदीद ने सुरक्षा के बीच अदालत में गवाही दी। वारदात के दिन का हाल सुनाया। गवाह ने कहा कि हमने पुलिसवालों से महिलाओं की जानकारी मांगी, लेकिन प्रताड़ित किया गया। यह भी कहा कि उत्तराखंड लेने आए हो। अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने अगली सुनवाई के लिए 11 जनवरी की तिथि तय की है।
शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा और रजनीश चौहान ने बताया कि उत्तराखंड के व्यापारी ने सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी की पत्रावली में गवाही दी। व्यापारी अपने साथियों के साथ महिलाओं को तलाशते हुए रामपुर तिराहा पहुंचे थे। गवाह ने अदालत में अपनी आपबीती सुनाई। महिलाओं के उत्पीड़न के विषय में भी बताया। इस दौरान अदालत में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।
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यह था मामला
एक अक्तूबर 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। गंभीर धाराओं के सेशन ट्रायल मुकदमों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने जिले के अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह को अधिकृत किया है।
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आरोपियों को मिलनी चाहिए कठोर सजा : रावत
चिह्नित राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति के केंद्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र रावत गवाह को लेकर अदालत तक पहुंचे थे। रावत ने कहा कि अलग राज्य के लिए उत्तराखंड के लोगों ने बलिदान दिया है। नए राज्य का गठन हो गया, लेकिन अभी भी उनका संघर्ष जारी है। आरोपी पुलिसकर्मियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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