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अली का काबा, अली की जन्नत, अली हमारा, तुम्हारा क्या है,
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बुढ़ाना में करबला-ए-हिंद में आयोजित हुसैन ड़े कार्यक्रम में बोलते ईरान से आए मौलाना कौसेन अली रही
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
अली का काबा, अली की जन्नत, अली हमारा, तुम्हारा क्या है,
मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। कस्बे के करबला-ए-हिंद में हुसैन का जन्मदिन जश्ने शब्रो वफ़ा हुसैन डे के रूप में मनाया गया। इस मौके पर कस्बा व दूर-दराज से आए शायरों ने श्रोताओं से खूब वाह-वाही लूटी।
कस्बे की करबला-ए-हिंद में बुधवार देर रात ईशा की नमाज के बाद हुसैन का जन्मदिन जश्ने शब्रो वफ़ा हुसैन डे के रूप मे मनाया गया। बृहस्पतिवार की सुबह 5 बजे तक चले इस कार्यक्रम में शायरों ने हुसैन की याद में शायरी पढ़कर श्रोताओं की वाह-वाही लूटी। शायर चांद फैजी सांखनवी ने पढ़ा कि अली का काबा, अली की जन्नत, अली हमारा, तुम्हारा क्या है, वली खुदा का, वसी नबी का, हमारा मौला, तुम्हारा क्या है।
शायर मोहसीन औरंगाबादी ने पढ़ा कि जब तक रहा जहान में अब्बास-ए-बावफा, कुरआन जख्म ख़ाके जमीं पर गिरा नहीं। शायर मासूम अमरोहवी ने पढ़ा कि जिसकी सदियों से हुकुमत है दिले इंसा पे, बाखुदा ऐसे शहंशाह-ए-जमां है। ईरान से आए मौलाना कौसेन अली रहीम ने तिलावते कुरआन-ए-पाक और हदीस-ए-किस्सा पढ़ी। उन्होंने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की जीवनी पर प्रकाश डाला।
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शायर इजहार आलम बुढ़ानवी, शाद बुढ़ानवी, जफर बुढ़ानवी, अंजुम जाफरी, आसिफ रजा, तहसीन रजा, शाने अब्बास जाफरी, मुश्ब्बिर बुढ़ानवी ने भी हुसैन अलैहिस्सलाम की शान में शायरी पढ़ी। इस दौरान नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र त्यागी, मेंबर कम्युनिकेशन आईटी मिनिस्ट्री गर्वमेंट आफ इंडिया डॉ. दिलशाद हुसैन जाफरी, कादिर, अब्दुल गफ्फार, हाजी शराफ़त, बबलू, फ़ैज, तोसीफ राही व आसिफ रजा आदि मौजूद थे। इस कार्यक्रम का आयोजन साजिद जाफरी और संचालन शायर तारिक उस्मानी और अंजुम जाफरी द्वारा संयुक्त रूप से किया।
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मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। कस्बे के करबला-ए-हिंद में हुसैन का जन्मदिन जश्ने शब्रो वफ़ा हुसैन डे के रूप में मनाया गया। इस मौके पर कस्बा व दूर-दराज से आए शायरों ने श्रोताओं से खूब वाह-वाही लूटी।
कस्बे की करबला-ए-हिंद में बुधवार देर रात ईशा की नमाज के बाद हुसैन का जन्मदिन जश्ने शब्रो वफ़ा हुसैन डे के रूप मे मनाया गया। बृहस्पतिवार की सुबह 5 बजे तक चले इस कार्यक्रम में शायरों ने हुसैन की याद में शायरी पढ़कर श्रोताओं की वाह-वाही लूटी। शायर चांद फैजी सांखनवी ने पढ़ा कि अली का काबा, अली की जन्नत, अली हमारा, तुम्हारा क्या है, वली खुदा का, वसी नबी का, हमारा मौला, तुम्हारा क्या है।
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शायर मोहसीन औरंगाबादी ने पढ़ा कि जब तक रहा जहान में अब्बास-ए-बावफा, कुरआन जख्म ख़ाके जमीं पर गिरा नहीं। शायर मासूम अमरोहवी ने पढ़ा कि जिसकी सदियों से हुकुमत है दिले इंसा पे, बाखुदा ऐसे शहंशाह-ए-जमां है। ईरान से आए मौलाना कौसेन अली रहीम ने तिलावते कुरआन-ए-पाक और हदीस-ए-किस्सा पढ़ी। उन्होंने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की जीवनी पर प्रकाश डाला।
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शायर इजहार आलम बुढ़ानवी, शाद बुढ़ानवी, जफर बुढ़ानवी, अंजुम जाफरी, आसिफ रजा, तहसीन रजा, शाने अब्बास जाफरी, मुश्ब्बिर बुढ़ानवी ने भी हुसैन अलैहिस्सलाम की शान में शायरी पढ़ी। इस दौरान नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र त्यागी, मेंबर कम्युनिकेशन आईटी मिनिस्ट्री गर्वमेंट आफ इंडिया डॉ. दिलशाद हुसैन जाफरी, कादिर, अब्दुल गफ्फार, हाजी शराफ़त, बबलू, फ़ैज, तोसीफ राही व आसिफ रजा आदि मौजूद थे। इस कार्यक्रम का आयोजन साजिद जाफरी और संचालन शायर तारिक उस्मानी और अंजुम जाफरी द्वारा संयुक्त रूप से किया।