{"_id":"629cf85b6a6460288c2d0a9a","slug":"pledge-to-save-environment-with-medicines-muzaffarnagar-news-mrt59169006","type":"story","status":"publish","title_hn":"दवाइयों के साथ दिला रहे पर्यावरण बचाने का संकल्प","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दवाइयों के साथ दिला रहे पर्यावरण बचाने का संकल्प
विज्ञापन
मोरना पीएचसी कि हरी भरी लॉन में बैठे डॉ अर्जुन सिंह।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भोपा (मुजफ्फरनगर)। अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मुश्किलें भी हार जाती हैं। भोपा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अर्जुन सिंह ने क्षेत्र के लोगों को उपचार के साथ पर्यावरण बचाने और एक पेड़ लगाने का संकल्प भी दिला रहे हैं।
पिछले पांच साल में खुद उन्होंने कड़ी मेहनत कर स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में सैकड़ों फलदार और फूल वाले पेड़ पौधे लगाने का कार्य किया। स्वास्थ्य केंद्र की हरियाली लोगों को लुभाने लगी है। बीमार और तीमारदारों के अलावा यहां आने वाले अन्य लोग भी उनके प्रयास की सराहना करते नहीं थकते। भोपा के अलावा वह मोरना अस्पताल में भी फुलवार लगा चुके हैं। मात्र पांच साल के कार्यकाल में उनके द्वारा लगाए गए पौधे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि डॉक्टर अर्जुन सिंह पर्यावरण प्रेमी हैं।
काम शुरू हुआ तो फैलती गई हरियाली
डॉ. अर्जुन सिंह मूल रूप से जिला बिजनौर के थाना मंडावर के छोटे से गांव नगला महेश्वरी निवासी हैं। उनकी पत्नी डॉ. रेशू राजपूत भी डॉक्टर हैं, जो मेरठ मेडिकल में तैनात हैं। अर्जुन की 2018 में मोरना चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनाती हुई। उस समय मोरना और भोपा अस्पताल में कुछ ही पौधे थे। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए फलदार, छायादार और फुलवारी के पौधे लगाए। इसके बाद मोरना अस्पताल में सरकारी योजना से हर्बल वाटिका का निर्माण भी कराया।
विज्ञापन
रोजाना खुद करते हैं देखभाल, गांव में बनाया था ग्रीन पार्क
वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भोपा पर चारों ओर फलदार, छायादार पेड़ और फुलवारी देखी जा सकती है। वह प्रतिदिन खुद पौधों को सींचते हैं। भोपा-मोरना में उन्होंने लॉन भी बना हुआ है। अपने गांव में भी उनके द्वारा ग्रीन मिनी पार्क बना हुआ है। अर्जुन कहते है कि पर्यावरण को बचाना हम सभी का कर्तव्य बनता है। पेड़ की परवरिश ही पर्यावरण हैं।
पेड़-पौधों की देखभाल के लिए निजी खर्च पर रखा है माली
डॉ. अर्जुन सिंह बताते हैं कि दोनों अस्पतालों के पेड़ पौधों को संतान की तरह पाले हैं। समय-समय पर उनमें खाद पानी का विशेष ध्यान रखते हैं। उनकी बेहतर परवरिश के लिए उन्होंने निजी खर्च पर माली को भी रखा हुआ है।
रेशू ने उबड़ खाबड़ लॉन में उगाए पौधे और हरी घास
डॉ. अर्जुन सिंह की पत्नी डॉ रेशू कुछ समय तक भोपा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात रही। उन्हें जो सरकारी क्वार्टर मिला है, उसमें एक उबड़ खाबड़ लॉन था। उन्होंने ड्यूटी से समय निकालकर लॉन में अनेकों पेड़ पौधे उगाए, जिससे अब वह हरा भरा हो गया है।
- चौरावाला गांव की सुनीता का कहना है कि डॉ. अर्जुन सिंह पर्यावरण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनसे प्रेरणा लेकर हमने भी कई जगह पौधरोपण किया। कई अभियान में उनका सहयोग भी किया।
- ककरौली के रोहित का कहना है कि डॉक्टर साहब ने पर्यावरण को लेकर जागरूक किया था। अपने आसपास के क्षेत्र में पौधरोपण किया। सभी लोगों को अभियान में हिस्सेदार होना चाहिए।
विज्ञापन
पिछले पांच साल में खुद उन्होंने कड़ी मेहनत कर स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में सैकड़ों फलदार और फूल वाले पेड़ पौधे लगाने का कार्य किया। स्वास्थ्य केंद्र की हरियाली लोगों को लुभाने लगी है। बीमार और तीमारदारों के अलावा यहां आने वाले अन्य लोग भी उनके प्रयास की सराहना करते नहीं थकते। भोपा के अलावा वह मोरना अस्पताल में भी फुलवार लगा चुके हैं। मात्र पांच साल के कार्यकाल में उनके द्वारा लगाए गए पौधे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि डॉक्टर अर्जुन सिंह पर्यावरण प्रेमी हैं।
विज्ञापन
काम शुरू हुआ तो फैलती गई हरियाली
डॉ. अर्जुन सिंह मूल रूप से जिला बिजनौर के थाना मंडावर के छोटे से गांव नगला महेश्वरी निवासी हैं। उनकी पत्नी डॉ. रेशू राजपूत भी डॉक्टर हैं, जो मेरठ मेडिकल में तैनात हैं। अर्जुन की 2018 में मोरना चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनाती हुई। उस समय मोरना और भोपा अस्पताल में कुछ ही पौधे थे। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए फलदार, छायादार और फुलवारी के पौधे लगाए। इसके बाद मोरना अस्पताल में सरकारी योजना से हर्बल वाटिका का निर्माण भी कराया।
विज्ञापन
रोजाना खुद करते हैं देखभाल, गांव में बनाया था ग्रीन पार्क
वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भोपा पर चारों ओर फलदार, छायादार पेड़ और फुलवारी देखी जा सकती है। वह प्रतिदिन खुद पौधों को सींचते हैं। भोपा-मोरना में उन्होंने लॉन भी बना हुआ है। अपने गांव में भी उनके द्वारा ग्रीन मिनी पार्क बना हुआ है। अर्जुन कहते है कि पर्यावरण को बचाना हम सभी का कर्तव्य बनता है। पेड़ की परवरिश ही पर्यावरण हैं।
पेड़-पौधों की देखभाल के लिए निजी खर्च पर रखा है माली
डॉ. अर्जुन सिंह बताते हैं कि दोनों अस्पतालों के पेड़ पौधों को संतान की तरह पाले हैं। समय-समय पर उनमें खाद पानी का विशेष ध्यान रखते हैं। उनकी बेहतर परवरिश के लिए उन्होंने निजी खर्च पर माली को भी रखा हुआ है।
रेशू ने उबड़ खाबड़ लॉन में उगाए पौधे और हरी घास
डॉ. अर्जुन सिंह की पत्नी डॉ रेशू कुछ समय तक भोपा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात रही। उन्हें जो सरकारी क्वार्टर मिला है, उसमें एक उबड़ खाबड़ लॉन था। उन्होंने ड्यूटी से समय निकालकर लॉन में अनेकों पेड़ पौधे उगाए, जिससे अब वह हरा भरा हो गया है।
- चौरावाला गांव की सुनीता का कहना है कि डॉ. अर्जुन सिंह पर्यावरण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनसे प्रेरणा लेकर हमने भी कई जगह पौधरोपण किया। कई अभियान में उनका सहयोग भी किया।
- ककरौली के रोहित का कहना है कि डॉक्टर साहब ने पर्यावरण को लेकर जागरूक किया था। अपने आसपास के क्षेत्र में पौधरोपण किया। सभी लोगों को अभियान में हिस्सेदार होना चाहिए।