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जांच के लिए जौला गांव पहुंचे अधिकारी
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जौला गांव में विकास कार्यों का जांच करते अधिकारी व मौजूद ग्राम प्रधान।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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जांच के लिए जौला गांव पहुंचे अधिकारी
मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। विकास कार्यों के लिए जौला गांव की ग्राम पंचायत निधि से निकाले गए 93.29 लाख रुपये के मामले की जांच शुरू हो गई है। जिसके लिए जिला मुख्यालय से टीम गांव जौला पहुंची।
एसडीएम अजय कुमार अम्बष्ट ने बताया कि शुक्रवार को जिला मुख्यालय से जल निगम के अधिशासी अधिकारी मनोज कुमार, विकास विभाग के लेखाधिकारी, संबंधित ग्राम विकास अधिकारी व एडीओ पंचायत, ग्राम पंचायत सचिव मौके पर पहुंचे। प्रधान हाजी जमशेद ने बताया कि ग्राम पंचायत निधि से 17 बार रुपयों की निकासी की गई है। आरओ व सबमर्सिबल पंप कार्यों पर 22 लाख 80 हजार रुपये, दीवार पेंटिंग कार्य पर 14 लाख 81 हजार रुपये, स्कूल की बच्चों की बैंच बनवाने में 19 लाख 2 हजार रुपये खर्च दिखाया। हैंडपंप रिबोर कार्य पर 38 लाख तीन हजार रुपये, स्कूल में इंटरलॉक कार्य पर 26 लाख सात हजार रुपये, गांव की सफाई व सैनिटाइज करवाने पर करीब चार लाख रुपये तथा हैंडपंप की मरम्मत कार्य पर 18 लाख 8 हजार रुपये का खर्च दिखाया गया है।
विकास कार्यों की जांच करने हेतु गई टीम के सामने ग्राम प्रधान ने बताया कि कुल 93 लाख 29 हजार 500 रुपये का खर्च ग्राम पंचायत सचिव व प्रशासक ने दिखाया है। आरोप है कि सारे बिल फर्जी हैं। ग्राम प्रधान ने अधिकारियों को बताया कि गांव के सभी विकास कार्यों आदि को लेकर उच्च न्यायालय में रिट भी दायर की है। अधिकारियों ने बताया कि वे अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे।
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मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। विकास कार्यों के लिए जौला गांव की ग्राम पंचायत निधि से निकाले गए 93.29 लाख रुपये के मामले की जांच शुरू हो गई है। जिसके लिए जिला मुख्यालय से टीम गांव जौला पहुंची।
एसडीएम अजय कुमार अम्बष्ट ने बताया कि शुक्रवार को जिला मुख्यालय से जल निगम के अधिशासी अधिकारी मनोज कुमार, विकास विभाग के लेखाधिकारी, संबंधित ग्राम विकास अधिकारी व एडीओ पंचायत, ग्राम पंचायत सचिव मौके पर पहुंचे। प्रधान हाजी जमशेद ने बताया कि ग्राम पंचायत निधि से 17 बार रुपयों की निकासी की गई है। आरओ व सबमर्सिबल पंप कार्यों पर 22 लाख 80 हजार रुपये, दीवार पेंटिंग कार्य पर 14 लाख 81 हजार रुपये, स्कूल की बच्चों की बैंच बनवाने में 19 लाख 2 हजार रुपये खर्च दिखाया। हैंडपंप रिबोर कार्य पर 38 लाख तीन हजार रुपये, स्कूल में इंटरलॉक कार्य पर 26 लाख सात हजार रुपये, गांव की सफाई व सैनिटाइज करवाने पर करीब चार लाख रुपये तथा हैंडपंप की मरम्मत कार्य पर 18 लाख 8 हजार रुपये का खर्च दिखाया गया है।
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विकास कार्यों की जांच करने हेतु गई टीम के सामने ग्राम प्रधान ने बताया कि कुल 93 लाख 29 हजार 500 रुपये का खर्च ग्राम पंचायत सचिव व प्रशासक ने दिखाया है। आरोप है कि सारे बिल फर्जी हैं। ग्राम प्रधान ने अधिकारियों को बताया कि गांव के सभी विकास कार्यों आदि को लेकर उच्च न्यायालय में रिट भी दायर की है। अधिकारियों ने बताया कि वे अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे।
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