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संसाधनों पर भारी पड़ रहा कुपोषण, पोषण पुनर्वास केंद्र में कम पड़े बेड
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मुजफ्फरनगर जिला चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केन्द्र में इलाज कराते बच्चे।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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संसाधनों पर भारी पड़ रहा कुपोषण, पोषण पुनर्वास केंद्र में कम पड़े बेड
मुजफ्फरनगर। कुपोषण को दूर करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से चल रहे प्रयास रंग लाने लगे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी परेशानी का सबब बन गई है। दरअसल, गांव-देहात से चिह्नित कर लाए जाने वाले कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ने से जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में बेड कम पड़ गए। स्थिति यह है कि दस बच्चों को भर्ती करने की क्षमता वाले इस केंद्र में इस समय 14 कुपोषित भर्ती हैं। इसके चलते नए बच्चों को भर्ती नहीं किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनका उपचार करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित हैं। आंगनबाड़ी, आशा, एएनएम कार्यकर्ताओं के अलावा पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल की ओपीडी के माध्यम से यहां कुपोषित बच्चों को भेजा जाता है। सभी के प्रयास से भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या तो बढ़ गई लेकिन उनके सामने संसाधनों की कमी पड़ गई है। पोषण पुनर्वास केंद्र में केवल दस बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड हैं लेकिन वर्तमान में 14 बच्चे भर्ती हैं। बच्चे भर्ती होने के लिए लगातार आ रहे हैं लेकिन बेड नहीं होने के चलते उन्हें भर्ती नहीं किया जा रहा। यदि उनकी स्थिति गंभीर नहीं है तो बेड खाली होने तक इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है और यदि स्थिति गंभीर है तो मेरठ रेफर कर दिया जाता है।
2282 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में
मुजफ्फरनगर। जनपद में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कराई गई थी। अप्रैल माह में हुए जांच में 2282 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में पाए गए थे जबकि 20369 बच्चे कुपोषित थे। अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की सलाह दी जाती है।
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चिकित्सक की देखरेख में रहते हैं बच्चे
पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चों को निशुल्क भर्ती किया जाता है। केंद्र पर तैनात चिकित्सक डा. आरती नंदनवार का कहना है कि बच्चे के खाने की व्यवस्था चिकित्सक के परामर्श के अनुसार की जाती है। दवा भी निशुल्क दी जाती हैं। भर्ती के दौरान माता को 50 रुपये प्रतिदिन भत्ता तथा डिस्चार्ज के बाद चार बार बच्चे को लाने पर मां को सौ रुपये और बच्चे को 40 रुपये प्रतिदिन खाने के लिए दिए जाते हैं।
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मुजफ्फरनगर। कुपोषण को दूर करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से चल रहे प्रयास रंग लाने लगे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी परेशानी का सबब बन गई है। दरअसल, गांव-देहात से चिह्नित कर लाए जाने वाले कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ने से जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में बेड कम पड़ गए। स्थिति यह है कि दस बच्चों को भर्ती करने की क्षमता वाले इस केंद्र में इस समय 14 कुपोषित भर्ती हैं। इसके चलते नए बच्चों को भर्ती नहीं किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनका उपचार करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित हैं। आंगनबाड़ी, आशा, एएनएम कार्यकर्ताओं के अलावा पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पताल की ओपीडी के माध्यम से यहां कुपोषित बच्चों को भेजा जाता है। सभी के प्रयास से भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या तो बढ़ गई लेकिन उनके सामने संसाधनों की कमी पड़ गई है। पोषण पुनर्वास केंद्र में केवल दस बच्चों को भर्ती करने के लिए बेड हैं लेकिन वर्तमान में 14 बच्चे भर्ती हैं। बच्चे भर्ती होने के लिए लगातार आ रहे हैं लेकिन बेड नहीं होने के चलते उन्हें भर्ती नहीं किया जा रहा। यदि उनकी स्थिति गंभीर नहीं है तो बेड खाली होने तक इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है और यदि स्थिति गंभीर है तो मेरठ रेफर कर दिया जाता है।
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2282 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में
मुजफ्फरनगर। जनपद में आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कराई गई थी। अप्रैल माह में हुए जांच में 2282 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में पाए गए थे जबकि 20369 बच्चे कुपोषित थे। अति कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की सलाह दी जाती है।
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चिकित्सक की देखरेख में रहते हैं बच्चे
पोषण पुनर्वास केंद्र पर बच्चों को निशुल्क भर्ती किया जाता है। केंद्र पर तैनात चिकित्सक डा. आरती नंदनवार का कहना है कि बच्चे के खाने की व्यवस्था चिकित्सक के परामर्श के अनुसार की जाती है। दवा भी निशुल्क दी जाती हैं। भर्ती के दौरान माता को 50 रुपये प्रतिदिन भत्ता तथा डिस्चार्ज के बाद चार बार बच्चे को लाने पर मां को सौ रुपये और बच्चे को 40 रुपये प्रतिदिन खाने के लिए दिए जाते हैं।