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जिले की कई और इंडस्ट्रियों पर टेढ़ी नजर, प्रदूषण फैलाने के मामले की हो रही जांच
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 14 Feb 2018 12:28 AM IST
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अलनूर मीट प्लांट पर कार्रवाई के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कई और इंडस्ट्रियों पर टेढ़ी नजर है। जानसठ और भोपा रोड की इंडस्ट्रियों के दूषित जल की जांच की रही है। यहां कितनी इंडस्ट्रियों में रि-साइकिलिंग प्लांट लगा है। उधर, अस्पतालों को भी बोर्ड ने टारगेट पर रखा है। बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण की व्यवस्था कई अस्पताल में मानकों पर खरी नहीं पाई गई है। इन्हें सूचीबद्ध किया जा रहा है।
जनपद में शुगर मिलों समेत करीब 150 से अधिक वर्तमान छोटी-बड़ी इंडस्ट्रियां संचालित है। सबसे अधिक इंडस्ट्री भोपा और जानसठ रोड पर है। अधिकांश इंडस्ट्रियों ने दूषित जल को रि-साइकिल करने के लिए ईटीपी प्लांट लगा रखे हैं, लेकिन यह प्लांट किस स्तर पर कार्य कर रहे हैं।
इसकी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जानकारी नहीं दी जा रही है। अलनूर मीट प्लांट पर कार्रवाई के बाद जिले की अन्य इंडस्ट्रियों को भी रडार पर रखा गया है। एनजीटी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती के बाद क्षेत्रीय स्तर पर अधिकारी अलर्ट हो गए हैं। फिर से इंडस्ट्रियों की जांच की जाएगी। दूषित जल को किस तरह से रि-साइकिल किया जा रहा है और इंडस्ट्री का उत्पादन कितना है। इस कार्य को करने के लिए कितने लीटर पानी का इस्तेमाल हो रहा है। इसकी नए सिरे से रिपोर्ट तैयार होगी।
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इसके अलावा एनजीटी ने अस्पतालों की भी जांच के लिए कहा है। अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण की प्रक्रिया जांची जाएगी। अस्पतालों का किस कंपनी के साथ प्राधिकार है और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में उसका पंजीकरण है या नहीं, इसकी भी तहकीकात होगी। फिलहाल अधिकारियों ने इंडस्ट्री और अस्पतालों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है।
प्रदूषण की मात्रा लगातार जनपद में बढ़ रही है। इससे पर्यावरण के साथ मानव जीवन पर भी असर पड़ रहा है। जानसठ रोड के कई दूषित जल के कारण बीमारियों की चपेट में घिरे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई विपुल कुमार ने बताया कि इंडस्ट्रियों और अस्पतालों की जांच के लिए कार्रवाई चल रही है। अस्पताल, इंडस्ट्री को चिह्नित किया जा रहा है। टीम भेजकर उन पर कार्रवाई होगी।
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जनपद में शुगर मिलों समेत करीब 150 से अधिक वर्तमान छोटी-बड़ी इंडस्ट्रियां संचालित है। सबसे अधिक इंडस्ट्री भोपा और जानसठ रोड पर है। अधिकांश इंडस्ट्रियों ने दूषित जल को रि-साइकिल करने के लिए ईटीपी प्लांट लगा रखे हैं, लेकिन यह प्लांट किस स्तर पर कार्य कर रहे हैं।
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इसकी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जानकारी नहीं दी जा रही है। अलनूर मीट प्लांट पर कार्रवाई के बाद जिले की अन्य इंडस्ट्रियों को भी रडार पर रखा गया है। एनजीटी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती के बाद क्षेत्रीय स्तर पर अधिकारी अलर्ट हो गए हैं। फिर से इंडस्ट्रियों की जांच की जाएगी। दूषित जल को किस तरह से रि-साइकिल किया जा रहा है और इंडस्ट्री का उत्पादन कितना है। इस कार्य को करने के लिए कितने लीटर पानी का इस्तेमाल हो रहा है। इसकी नए सिरे से रिपोर्ट तैयार होगी।
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इसके अलावा एनजीटी ने अस्पतालों की भी जांच के लिए कहा है। अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण की प्रक्रिया जांची जाएगी। अस्पतालों का किस कंपनी के साथ प्राधिकार है और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में उसका पंजीकरण है या नहीं, इसकी भी तहकीकात होगी। फिलहाल अधिकारियों ने इंडस्ट्री और अस्पतालों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है।
प्रदूषण की मात्रा लगातार जनपद में बढ़ रही है। इससे पर्यावरण के साथ मानव जीवन पर भी असर पड़ रहा है। जानसठ रोड के कई दूषित जल के कारण बीमारियों की चपेट में घिरे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई विपुल कुमार ने बताया कि इंडस्ट्रियों और अस्पतालों की जांच के लिए कार्रवाई चल रही है। अस्पताल, इंडस्ट्री को चिह्नित किया जा रहा है। टीम भेजकर उन पर कार्रवाई होगी।