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श्रमिकों के पीएफ के नाम पर धोखाधड़ी
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मोरना मिल में लेबर ठेकेदार पर लाखों रुपयों के घोटले की जानकारी देते बोर्ड चेयरमैन प्रतिनिधि राह?
- फोटो : KHATAULI
श्रमिकों के पीएफ के नाम पर धोखाधड़ी
मोरना। मोरना मिल में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आते जा रहे हैं। बोर्ड चेयरमैन प्रतिनिधि राहुल चौधरी ने मिल में लेबर ठेकेदार पर मजदूरों के पीएफ के नाम पर लाखों रुपये धोखाधड़ी कर उनके हक के पैसे हड़पने का आरोप लगाया है। लाखों रुपये लेबर घोटाले की शिकायत जिलाधिकारी और प्रदेश गन्ना आयुक्त से करते हुए आरोपियों के विरुद्ध कानूनी जांच कराए जाने की गुहार लगाई है। उधर, मोरना मिल के मुख्य प्रबंधक सर्वेश सिंह ने बताया कि लेबर ठेकेदार पर मजदूरों का पीएफ का पैसे हड़पने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल मिल से ठेकेदार को जांच पूरी होने तक कोई पेमेंट नहीं होगा। डीसीओ की जांच रिपोर्ट आने के बाद तथा उनके आदेश के आधार पर ही ठेकेदार को धनराशि दी जाएगी।
दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल मोरना के गेस्ट हाउस मेें जानकारी देते हुए बोर्ड चेयरमैन स्नेहलता के प्रतिनिधि राहुल चौधरी, बोर्ड डायरेक्टर मनोज राठी, राजीव चेयरमैन आदि ने बताया कि सन 2019 माह दिसंबर में मिल में लेबर आपूर्ति का ठेका मेमर्स वर्क फोर्स सोलूशन, 22 बलवंत नगर रुड़की रोड मेरठ को दिया गया था। ठेके के अनुसार अकुशल कर्मकार को प्रतिदिन की दर 308 रुपये 19 पैसे देना तय हुआ था। साथ ही कुशल कर्मकार को 379 रुपये 73 पैसे की धनराशि देने का प्रावधान प्रदेश सरकार के आदेश पर मिल प्रबंधन की ओर से रखा गया था। आरोप है कि ठेकेदार की ओर से 265 रुपये प्रतिदिन की दर से तीन माह दिसंबर, जनवरी, फरवरी को भुगतान किया गया। श्रमिकों के पीएफ के नाम 43 रुपये काट लिए गए। आरोप है कि ठेकेदार ने आज तक पीएफ के काटे गए पैसे को खातों में जमा नहीं कराया। ठेकेदार फरवरी माह से मिल में आना बंद कर दिया। मिल स्वयं भुगतान कराने की जिम्मेदारी उठाते हुए दो बार ठेकेदार को नोटिस जारी कर चुका है। मिल में किए जा रहे लाखों रुपये के घोटालों की जांच के लिए बोर्ड चेयरमैन स्नेहलता ने प्रमुख सचिव चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग उत्तर प्रदेश शासन सचिवालय लखनऊ, जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर, प्रदेश गन्ना मंत्री सहित मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। उधर, मोरना मिल के मुख्य प्रबंधक सर्वेश सिंह ने बताया कि लेबर ठेकेदार पर मजदूरों का पीएफ का पैसे हड़पने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल मिल से ठेकेदार को जांच पूरी होने तक कोई पेमेंट नहीं होगा। डीसीओ की जांच रिपोर्ट आने के बाद तथा उनके आदेशानुसार ही ठेकेदार को रुपया दिया जाएगा।
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मोरना। मोरना मिल में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आते जा रहे हैं। बोर्ड चेयरमैन प्रतिनिधि राहुल चौधरी ने मिल में लेबर ठेकेदार पर मजदूरों के पीएफ के नाम पर लाखों रुपये धोखाधड़ी कर उनके हक के पैसे हड़पने का आरोप लगाया है। लाखों रुपये लेबर घोटाले की शिकायत जिलाधिकारी और प्रदेश गन्ना आयुक्त से करते हुए आरोपियों के विरुद्ध कानूनी जांच कराए जाने की गुहार लगाई है। उधर, मोरना मिल के मुख्य प्रबंधक सर्वेश सिंह ने बताया कि लेबर ठेकेदार पर मजदूरों का पीएफ का पैसे हड़पने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल मिल से ठेकेदार को जांच पूरी होने तक कोई पेमेंट नहीं होगा। डीसीओ की जांच रिपोर्ट आने के बाद तथा उनके आदेश के आधार पर ही ठेकेदार को धनराशि दी जाएगी।
दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल मोरना के गेस्ट हाउस मेें जानकारी देते हुए बोर्ड चेयरमैन स्नेहलता के प्रतिनिधि राहुल चौधरी, बोर्ड डायरेक्टर मनोज राठी, राजीव चेयरमैन आदि ने बताया कि सन 2019 माह दिसंबर में मिल में लेबर आपूर्ति का ठेका मेमर्स वर्क फोर्स सोलूशन, 22 बलवंत नगर रुड़की रोड मेरठ को दिया गया था। ठेके के अनुसार अकुशल कर्मकार को प्रतिदिन की दर 308 रुपये 19 पैसे देना तय हुआ था। साथ ही कुशल कर्मकार को 379 रुपये 73 पैसे की धनराशि देने का प्रावधान प्रदेश सरकार के आदेश पर मिल प्रबंधन की ओर से रखा गया था। आरोप है कि ठेकेदार की ओर से 265 रुपये प्रतिदिन की दर से तीन माह दिसंबर, जनवरी, फरवरी को भुगतान किया गया। श्रमिकों के पीएफ के नाम 43 रुपये काट लिए गए। आरोप है कि ठेकेदार ने आज तक पीएफ के काटे गए पैसे को खातों में जमा नहीं कराया। ठेकेदार फरवरी माह से मिल में आना बंद कर दिया। मिल स्वयं भुगतान कराने की जिम्मेदारी उठाते हुए दो बार ठेकेदार को नोटिस जारी कर चुका है। मिल में किए जा रहे लाखों रुपये के घोटालों की जांच के लिए बोर्ड चेयरमैन स्नेहलता ने प्रमुख सचिव चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग उत्तर प्रदेश शासन सचिवालय लखनऊ, जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर, प्रदेश गन्ना मंत्री सहित मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। उधर, मोरना मिल के मुख्य प्रबंधक सर्वेश सिंह ने बताया कि लेबर ठेकेदार पर मजदूरों का पीएफ का पैसे हड़पने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल मिल से ठेकेदार को जांच पूरी होने तक कोई पेमेंट नहीं होगा। डीसीओ की जांच रिपोर्ट आने के बाद तथा उनके आदेशानुसार ही ठेकेदार को रुपया दिया जाएगा।
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