मुजफ्फरनगर दंगा: इज्जत गई और गांव छूटा, अब मिला इंसाफ, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आया फैसला
मुजफ्फरनगर दंगा : करीब नौ साल तक मुकदमा खिंचा तो पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। सर्वोच्च न्यायालय ने रोजाना सुनवाई के आदेश जारी किए। इसका नतीजा यह हुआ कि करीब सवा माह में ही पीड़िता को इंसाफ मिल गया।
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मुजफ्फरनगर में दंगे के दौरान फुगाना क्षेत्र के गांव में पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात अंजाम दी गई थी। पहले इज्जत गई, फिर गांव छूट गया। करीब नौ साल बाद सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पीड़िता को आखिरकार इंसाफ मिल गया है।
पीड़िता ने मुकदमा दर्ज कराया था कि आरोपियों ने उसके साथ चाकू की नोक पर सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद वह किसी तरह बचते-बचाते राहत शिविर तक गई थी। दंगे की आग में घर जल गया, इज्जत गई और गांव छूट गया। पीड़िता का परिवार दिल्ली जाकर रहने लगा। इंसाफ की आस में पीड़िता ने दिल्ली में रहकर ही मुकदमे की पैरवी की।
करीब नौ साल तक मुकदमा खिंचा तो पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। सर्वोच्च न्यायालय ने रोजाना सुनवाई के आदेश जारी किए। इसका नतीजा यह हुआ कि करीब सवा माह में ही पीड़िता को इंसाफ मिल गया। अभियोजन के अधिवक्ता रिजवान अहमद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही मामले की रोजाना सुनवाई हुई।
पीड़िता को मिल गया न्याय
अभियोजन पक्ष के स्थानीय अधिवक्ता रिजवान अहमद का कहना है कि पीड़िता को इंसाफ मिल गया है। करीब चार माह पहले पीड़िता अदालत पहुंची थी और अपने बयान दर्ज कराए थे।
दोषियों ने कहा हमें झूठा फंसाया गया
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जेल जाते हुए दोनों दोषियों ने कहा कि हमें झूठा फंसाया गया है। यह साजिश है, हम इंसाफ के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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जेल जाते हुए एक दोषी ने दूसरे की तरफ इशारा करते हुए यहां तक कह दिया कि यह तो शारीरिक रूप से अक्षम है और मैं गांव से बाहर रह रहा था। यह पूरी तरह गलत है। जिस महिला ने यह आरोप लगाए हैं, वह हमें जानती तक नहीं है।