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क्रोध पर विजय प्राप्त करना ही क्षमा भाव
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दशलक्षण पर्व पर ऑनलाईन प्रवचन करते जैन मुनि श्री प्रणम्य सागर।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। कोरोना काल के चलते दशलक्षण पर्व सादगी के साथ शुरू हुआ। जैन मिलन कॉलोनी में मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर और चंद्र सागर का मंगल चातुर्मास चल रहा है। कोविड के कारण दशलक्षण पर्व पर मुनि श्री प्रणम्य सागर ऑनलाइन प्रवचन कर रहे हैं। अन्य सोशल साइट से भी उनका प्रवचन श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जा रहा है।
दशलक्षण के प्रथम दिन मुनि श्री ने अंतरंग में छिपे क्षमा गुण की खोजने का उपाय बताया। कहा कि क्रोध आना ही क्षमा का अभाव है। जब चीजें हमारी पसंद के अनुसार नहीं होती तो हम खिन्न हो जाते है, क्योंकि हम सब चीजें अपनी पसंद के अनुसार देखना चाहते हैं। ऐसा होने पर ही हम अपने क्षमा गुण को भूल जाते हैं और अपने अंतरंग में ही छिपे क्षमा धर्म को उजागर नहीं कर पाते। अत: हमें वस्तु स्थिति को समझकर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
विश्व शांति का स्रोत है दशलक्षण पर्व
खतौली। नगर के नौ जैन मंदिरों में दशलक्षण पर्व का शुभारंभ जैन धर्म के अनुयायियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पूजा अर्चना के साथ किया। धर्मविदुषी डा. ज्योति जैन ने आनलाइह्व धर्मचर्चा के माध्यम से बताया भारत वर्षीय पर्वों में जैन धर्म के दशलक्षण पर्व का अलग स्थान है। इसमें दस दिनों तक संयम के साथ मानवीय विकारी भावों का त्याग किया जाता है। दस धर्म के माध्यम से इच्छाओं पर नियंत्रण करने का प्रयास किया जाता है। हम प्रथम दिन को उत्तम क्षमा धर्म के रूप में मनाते हैं। सहनशीलता शांति का नाम क्षमा होता है। क्रोध पर विजय प्राप्त करना ही क्षमा भाव है। डा. आशा जैन, ललिता, सीमा, अलका, गीता, ज्योति जैन, ऑचल, सपाना, रीतू, अर्चना, इंदू, प्रियंका प्रवक्ता, अनीता, अंजलि, दीप्ति, सुषमा, त्रिशला, सरल, नीलम, रजनी, अंजू, शकुंतला, कविता, रजनी प्रवक्ता, पायल, मीनाक्षी, दीपाली आदि शामिल रहे।
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शाहपुर। दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन भगवान के अभिषेक के साथ शांति धारा व विशेष पूजा अर्चना हुई। इंदौर आश्रम से पधारीं ब्रह्मचारिणी बहन रेखा ने बताया कि दशलक्षण पर्व आत्मशुद्धि का पर्व है। जैन धर्म में अहिंसा व आत्मशुद्धि को सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तम क्षमा धर्म सहनशीलता से रहने की प्रेरणा देता है। सहनशीलता का अर्थ है अपने जीवन में क्रोध को उत्पन्न न होने देना। इसलिए हमें संकल्प लेना चाहिए कि किसी जीव मात्र को कष्ट नहीं पहुंचाएंगे। ब्रह्मचारिणी बहन सरिता दीदी ने सभी से भगवान महावीर के संदेशों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
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दशलक्षण के प्रथम दिन मुनि श्री ने अंतरंग में छिपे क्षमा गुण की खोजने का उपाय बताया। कहा कि क्रोध आना ही क्षमा का अभाव है। जब चीजें हमारी पसंद के अनुसार नहीं होती तो हम खिन्न हो जाते है, क्योंकि हम सब चीजें अपनी पसंद के अनुसार देखना चाहते हैं। ऐसा होने पर ही हम अपने क्षमा गुण को भूल जाते हैं और अपने अंतरंग में ही छिपे क्षमा धर्म को उजागर नहीं कर पाते। अत: हमें वस्तु स्थिति को समझकर ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
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विश्व शांति का स्रोत है दशलक्षण पर्व
खतौली। नगर के नौ जैन मंदिरों में दशलक्षण पर्व का शुभारंभ जैन धर्म के अनुयायियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पूजा अर्चना के साथ किया। धर्मविदुषी डा. ज्योति जैन ने आनलाइह्व धर्मचर्चा के माध्यम से बताया भारत वर्षीय पर्वों में जैन धर्म के दशलक्षण पर्व का अलग स्थान है। इसमें दस दिनों तक संयम के साथ मानवीय विकारी भावों का त्याग किया जाता है। दस धर्म के माध्यम से इच्छाओं पर नियंत्रण करने का प्रयास किया जाता है। हम प्रथम दिन को उत्तम क्षमा धर्म के रूप में मनाते हैं। सहनशीलता शांति का नाम क्षमा होता है। क्रोध पर विजय प्राप्त करना ही क्षमा भाव है। डा. आशा जैन, ललिता, सीमा, अलका, गीता, ज्योति जैन, ऑचल, सपाना, रीतू, अर्चना, इंदू, प्रियंका प्रवक्ता, अनीता, अंजलि, दीप्ति, सुषमा, त्रिशला, सरल, नीलम, रजनी, अंजू, शकुंतला, कविता, रजनी प्रवक्ता, पायल, मीनाक्षी, दीपाली आदि शामिल रहे।
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शाहपुर। दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन भगवान के अभिषेक के साथ शांति धारा व विशेष पूजा अर्चना हुई। इंदौर आश्रम से पधारीं ब्रह्मचारिणी बहन रेखा ने बताया कि दशलक्षण पर्व आत्मशुद्धि का पर्व है। जैन धर्म में अहिंसा व आत्मशुद्धि को सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तम क्षमा धर्म सहनशीलता से रहने की प्रेरणा देता है। सहनशीलता का अर्थ है अपने जीवन में क्रोध को उत्पन्न न होने देना। इसलिए हमें संकल्प लेना चाहिए कि किसी जीव मात्र को कष्ट नहीं पहुंचाएंगे। ब्रह्मचारिणी बहन सरिता दीदी ने सभी से भगवान महावीर के संदेशों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।