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रहीसुद्दीन का दर्द: कभी भूल नहीं पाएगा परिवार, 27 साल बाद मिली ऐसी सजा, हर कोई हैरान, साइकिल चोरी का था मामला

Thu, 28 Sep 2023 01:11 AM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Thu, 28 Sep 2023 01:11 AM IST
सार

Muzaffarnagar News : आरोपी ने अदालत पहुंचकर जुर्म स्वीकार किया है। अदालत ने जेल में बिताई गई नौ दिन की अवधि और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

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Muzaffarnagar Court has sentenced Rahisuddin of Shamli to nine days in case of bicycle theft
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कैराना के उस्ताद शायर मुजफ्फर रज्मी का शेर ‘लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई...’ बिलासपुर गांव के रहीसुद्दीन की जिंदगी का दर्द बयान करती है। उसने वर्ष 1996 में साइकिल चोरी की, पुलिस ने वह बरामद भी कर ली। आरोपी ने दो बार में नौ दिन की जेल काटी। लेकिन इसके बाद 27 साल गुजर गए। 

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अब आरोपी ने अदालत पहुंचकर जुर्म स्वीकार किया है। अदालत ने जेल में बिताई गई नौ दिन की अवधि और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

नई मंडी थाना क्षेत्र के बिलासपुर गांव में वर्ष 1996 में ग्रामीण असगर की एटलस साइकिल चोरी हो गई थी। पुलिस ने गांव के ही रहीसुद्दीन को गिरफ्तार कर साइकिल बरामद कर ली। अदालत में दाखिल कोर्ट मोहर्रिर की आख्या के अनुसार, आरोपी पहले 23 जून 1996 से 27 जून 1996 और फिर 26 अगस्त 2023 से 29 अगस्त तक जेल में रहा।

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बुधवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम प्रशांत कुमार सिंह ने मामले की सुनवाई की। आरोपी अदालत में हाजिर हुआ और साइकिल चोरी के अपने जुर्म को स्वीकार किया। अदालत ने उसे चोरी का दोषी माना। जेल में बिताई गई नौ दिन की अवधि के अलावा धारा 379 और धारा 411 में पांच-पांच सौ रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन अधिकारी रामअवतार सिंह ने इसकी पुष्टि की है। जिसकी साइकिल चोरी का दोष रहीसुद्दीन के सिर पर है, उसकी मौत हो चुकी है। शेरनगर के असगर ने यह मुकदमा दर्ज कराया था।

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गलती हो गई, फिर कभी ऐसा नहीं करेगा
साइकिल चोरी के दोषी रहीसुद्दीन ने अदालत में कहा कि गलती हो गई। फिर कभी ऐसा नहीं करेगा। वह बीमार है। प्रस्तुत मामले में वह जेल में रहा है। जेल में बिताई गई अवधि पर उसे रिहा किया जाए।

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पुलिस पहुंची और भाई को जेल भेज दिया
रहीसुद्दीन के भाई रियाज बताते हैं कि 27 साल पुराने मुकदमे को हम भूल चुके थे। कभी कोई तारीख नहीं, कोई नोटिस नहीं। 26 अगस्त 2023 को पुलिस पहुंची और रहीसुद्दीन को ले गई। गण्यमान्य लोग थाने पहुंचे तो पता चला कि उन्हें 27 साल पुराने मुकदमे में जेल भेज दिया गया है। इसके बाद परिवार ने पैरवी शुरू की तो यह मामला सुलझ सका।

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