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मनुष्य के पास ज्ञान है, लेकिन आचरण का अभाव : मणि भद्र
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मणिभद्र मुनि महाराज
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। मणि भद्र मुनि महाराज ने कहा कि वर्तमान में मनुष्य के पास ज्ञान है, लेकिन आचरण का अभाव है। व्यक्ति को अच्छा श्रोता जरूर होना चाहिए। स्वयं से भी प्रश्न करना सीखें।
सिद्धार्थ कॉलोनी स्थित जैन स्थानक में नेपाल से सर्वोदय शांति पद यात्रा लेकर पहुंचे मुनि महाराज ने कहा कि अनैतिकता और अनाचार के कारण विकृतियां मानव को पंगु बनाए हुए हैं। आवश्यकता इस बात की है कि सभी सीमाओं को लांघकर हम एक मंच पर एकत्र हो और गंभीरता से विचार करें कि हम अपने लिए कैसा वर्तमान, कैसा भविष्य चाहते हैं। आज मानवता को नई पहचान चाहिए। मानव को नया सवेरा, नई राह और नई मंजिल की जरूरत है, जो आशा के दास हैं, वह संपूर्ण लोक के दास हैं। आशा जिनकी दासी है, संपूर्ण लोक उनका दास बन जाता है।
स्वाध्याय के क्षण में आप आत्म साक्षात्कार के क्षण में होते हैं। जीवन में अपने संकल्प, साधना और लक्ष्य से कभी मत गिरो। जीवन में लगातार मिल रही असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए। कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है। मन में आने वाले बुरे विचार आपके जीवन को बेकार, घासफूस से भरा जंगल जैसा बना देते हैं।
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सिद्धार्थ कॉलोनी स्थित जैन स्थानक में नेपाल से सर्वोदय शांति पद यात्रा लेकर पहुंचे मुनि महाराज ने कहा कि अनैतिकता और अनाचार के कारण विकृतियां मानव को पंगु बनाए हुए हैं। आवश्यकता इस बात की है कि सभी सीमाओं को लांघकर हम एक मंच पर एकत्र हो और गंभीरता से विचार करें कि हम अपने लिए कैसा वर्तमान, कैसा भविष्य चाहते हैं। आज मानवता को नई पहचान चाहिए। मानव को नया सवेरा, नई राह और नई मंजिल की जरूरत है, जो आशा के दास हैं, वह संपूर्ण लोक के दास हैं। आशा जिनकी दासी है, संपूर्ण लोक उनका दास बन जाता है।
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स्वाध्याय के क्षण में आप आत्म साक्षात्कार के क्षण में होते हैं। जीवन में अपने संकल्प, साधना और लक्ष्य से कभी मत गिरो। जीवन में लगातार मिल रही असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए। कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है। मन में आने वाले बुरे विचार आपके जीवन को बेकार, घासफूस से भरा जंगल जैसा बना देते हैं।
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