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समर्पण भाव से पुकारने पर दौड़े चले आते हैं प्रभु
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित प्राचीन सिद्ध श्री चंद्रेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा करते हुए कथा व्यास पंडित श्याम शंकर मिश्रा ने कहा कि यदि प्रभु की शरणागति में जाकर समर्पण भाव से उन्हें पुकारा जाए तो वह सहायता के लिए दौड़े चले आते हैं।
श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित श्याम शंकर मिश्रा ने भगवान विष्णु के वामन अवतार के प्रसंग को विस्तार से श्रद्धालुओं को बताया। उन्होंने राक्षस कुल उत्पन्न राजा बलि की दानवीरता के बारे में बताते हुए कहा कि जब उन्होंने वामन रूप में आए भगवान विष्णु को तीन पग धरती दान में देने का संकल्प लिया तो प्रभु ने अपना विराट रूप धारण कर दो पग में पृथ्वी और आकाश को नाप दिया। राजा बलि के सिर पर तीसरा पग रखते हुए भगवान वामन ने उन्हें पाताल लोक में भेज दिया।
कथा व्यास पंडित श्याम शंकर मिश्रा ने गजराज और मगरमच्छ के सहस्त्रों वर्षों तक चले युद्ध के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि जब गजेंद्र पर मगरमच्छ भारी पड़कर उसे पानी में खींच ले गया तो उसने अपनी सूंड़ से कमल का पुष्प भगवान के चरणों में अर्पित करते उन्हें आर्त भाव से पुकारा। भगवान अपने शरणागत भक्त गजराज की रक्षा के लिए दौड़े आए और सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध कर गजराज की प्राण रक्षा की। संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में समुद्र मंथन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु कथा ज्ञान रस में सराबोर हो गए। इस मौके पर अभिनव कुच्छल, मसुरेंद्र मलिक, प्रवीण अरोरा, कुलदीप गोयल, श्याम लाल बंसल, अधिवक्ता शिशु कांत गर्ग, चंद्रमणि शर्मा, अरुण वर्मा आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित प्राचीन सिद्ध श्री चंद्रेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा करते हुए कथा व्यास पंडित श्याम शंकर मिश्रा ने कहा कि यदि प्रभु की शरणागति में जाकर समर्पण भाव से उन्हें पुकारा जाए तो वह सहायता के लिए दौड़े चले आते हैं।
श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित श्याम शंकर मिश्रा ने भगवान विष्णु के वामन अवतार के प्रसंग को विस्तार से श्रद्धालुओं को बताया। उन्होंने राक्षस कुल उत्पन्न राजा बलि की दानवीरता के बारे में बताते हुए कहा कि जब उन्होंने वामन रूप में आए भगवान विष्णु को तीन पग धरती दान में देने का संकल्प लिया तो प्रभु ने अपना विराट रूप धारण कर दो पग में पृथ्वी और आकाश को नाप दिया। राजा बलि के सिर पर तीसरा पग रखते हुए भगवान वामन ने उन्हें पाताल लोक में भेज दिया।
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कथा व्यास पंडित श्याम शंकर मिश्रा ने गजराज और मगरमच्छ के सहस्त्रों वर्षों तक चले युद्ध के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि जब गजेंद्र पर मगरमच्छ भारी पड़कर उसे पानी में खींच ले गया तो उसने अपनी सूंड़ से कमल का पुष्प भगवान के चरणों में अर्पित करते उन्हें आर्त भाव से पुकारा। भगवान अपने शरणागत भक्त गजराज की रक्षा के लिए दौड़े आए और सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध कर गजराज की प्राण रक्षा की। संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में समुद्र मंथन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु कथा ज्ञान रस में सराबोर हो गए। इस मौके पर अभिनव कुच्छल, मसुरेंद्र मलिक, प्रवीण अरोरा, कुलदीप गोयल, श्याम लाल बंसल, अधिवक्ता शिशु कांत गर्ग, चंद्रमणि शर्मा, अरुण वर्मा आदि मौजूद रहे।
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