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दारुल उलूम के विवादास्पद फतवों के लिंक पर लगाई गई रोक
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मौलाना अबुल कासिम नोमानी, मोहतमिम दारुल उलूम
- फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम से जारी होने वाले कई फतवों को विवादास्पद बताते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी। आयोग ने इसका संज्ञान लेते हुए शासन प्रशासन को जांच करने को निर्देशित किया था। जिसके चलते दारुल उलूम प्रबंधतंत्र को नोटिस भी जारी किया था। सोमवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विवादित फतवों के लिंक पर जांच तक रोक लगा दी है। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने रोक लगाए जाने की पुष्टि की है। इस संबंध में दारुल उलूम प्रबंधतंत्र ने प्रशासन को एक सूची भी उपलब्ध कराई है। जिसमें वेबसाइट से हटाए गए फतवों के लिंक दिए गए हैं।
करीब एक माह पूर्व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें दारुल उलूम के फतवे का हवाला देते हुए बताया गया था कि दारुल उलूम अपने फतवे में कहता है कि बच्चा गोद लिया जा सकता है, लेकिन परिपक्व होने के बाद न तो उसे संपत्ति में कोई हिस्सा मिलेगा और न ही वह किसी भी मामले में वारिस होगा। शिकायत के बाद आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार व सहारनपुर डीएम को संस्था के पोर्टल की जांच किए जाने के निर्देश दिए गए थे। निर्देश के बाद डीएम अखिलेश सिंह ने दारुल उलूम प्रबंधतंत्र को संबंधित कंटेंट को वेबसाइट से हटाने के आदेश दिए थे। जिसके चलते दारुल उलूम ने शिकायत का आधार बने फतवे सहित इससे संबंधित कई अन्य फतवों के लिंक को पब्लिक डोमेन से हटा दिया है। संस्था ने इससे संबंधित एक सूची भी डीएम को भेजी है।
विवादित फतवों के लिंक किए गए बाधित
देवबंद। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के निर्देश के बाद बच्चों से संबंधित दारुल उलूम से जारी हुए फतवों के लिंक को ही बाधित किया गया है। वेबसाइट पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। जांच जारी होने तक संबंधित फतवों के लिंक बाधित ही रखे जाएंगे। दारुल उलूम की ओर से जो जवाब प्रस्तुत किया गया है। उसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का जिक्र भी किया है। जिससे यह समझाने का प्रयास किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को सवाल पूछने पर जो जवाब दिया जाता है वह फतवा नहीं कहलाता है। - अखिलेश सिंह, डीएम सहारनपुर
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प्रशासन के आदेश पर हटाया लिंक : मोहतमिम
देवबंद। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी का कहना है कि प्रशासन के आदेश पर संबंधित फतवों के लिंक को पब्लिक डोमेन से हटा लिया गया है। उधर, मोहतमिम की तरफ से जो पत्र डीएम को भेजा गया है कि उसमें यह उम्मीद जताई गई है कि स्पष्टीकरण से संतुष्ट होने पर उन्हें फिर से प्रकाशित करने की अनुमति प्रदान की जाएगी।
शरीयत की रोशनी में दिया जाता है फतवा
देवबंद। पूर्व में दारुल उलूम प्रबंधतंत्र की ओर से कहा गया था कि फतवा शरीयत की रोशनी में फतवा लेने वालों को दिया जाता है, फतवा शरीयत के मानने वालों और उस पर अमल करने वालों के लिए होता है। इसे किसी पर न तो थोपा जा सकता है और न ही किसी को इसे मानने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
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करीब एक माह पूर्व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें दारुल उलूम के फतवे का हवाला देते हुए बताया गया था कि दारुल उलूम अपने फतवे में कहता है कि बच्चा गोद लिया जा सकता है, लेकिन परिपक्व होने के बाद न तो उसे संपत्ति में कोई हिस्सा मिलेगा और न ही वह किसी भी मामले में वारिस होगा। शिकायत के बाद आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार व सहारनपुर डीएम को संस्था के पोर्टल की जांच किए जाने के निर्देश दिए गए थे। निर्देश के बाद डीएम अखिलेश सिंह ने दारुल उलूम प्रबंधतंत्र को संबंधित कंटेंट को वेबसाइट से हटाने के आदेश दिए थे। जिसके चलते दारुल उलूम ने शिकायत का आधार बने फतवे सहित इससे संबंधित कई अन्य फतवों के लिंक को पब्लिक डोमेन से हटा दिया है। संस्था ने इससे संबंधित एक सूची भी डीएम को भेजी है।
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विवादित फतवों के लिंक किए गए बाधित
देवबंद। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के निर्देश के बाद बच्चों से संबंधित दारुल उलूम से जारी हुए फतवों के लिंक को ही बाधित किया गया है। वेबसाइट पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। जांच जारी होने तक संबंधित फतवों के लिंक बाधित ही रखे जाएंगे। दारुल उलूम की ओर से जो जवाब प्रस्तुत किया गया है। उसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का जिक्र भी किया है। जिससे यह समझाने का प्रयास किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को सवाल पूछने पर जो जवाब दिया जाता है वह फतवा नहीं कहलाता है। - अखिलेश सिंह, डीएम सहारनपुर
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प्रशासन के आदेश पर हटाया लिंक : मोहतमिम
देवबंद। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी का कहना है कि प्रशासन के आदेश पर संबंधित फतवों के लिंक को पब्लिक डोमेन से हटा लिया गया है। उधर, मोहतमिम की तरफ से जो पत्र डीएम को भेजा गया है कि उसमें यह उम्मीद जताई गई है कि स्पष्टीकरण से संतुष्ट होने पर उन्हें फिर से प्रकाशित करने की अनुमति प्रदान की जाएगी।
शरीयत की रोशनी में दिया जाता है फतवा
देवबंद। पूर्व में दारुल उलूम प्रबंधतंत्र की ओर से कहा गया था कि फतवा शरीयत की रोशनी में फतवा लेने वालों को दिया जाता है, फतवा शरीयत के मानने वालों और उस पर अमल करने वालों के लिए होता है। इसे किसी पर न तो थोपा जा सकता है और न ही किसी को इसे मानने के लिए बाध्य किया जा सकता है।

दारुल उलूम, देवबंद- फोटो : DEVBAND