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हमारे बच्चे जिंदा रहें... चाहे हम मर जाएं

Thu, 14 May 2020 10:09 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 10:09 PM IST
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Let our children be alive ... whether we die
जानसठ में पानीपत खटीमा राजमार्ग से गुजरते भूखे प्यासे काफी संख्या में प्रवासी मजदूर। - फोटो : KHATAULI
जानसठ (मुजफ्फरनगर)। बिहार प्रांत के जिला मुजफ्फरपुर निवासी प्रमोद व विनय सहित कई दंपति प्रवासी श्रमिक बृहस्पतिवार को साइकिल, पैदल पानीपत खटीमा राजमार्ग से होते हुए अपने घर जा रहे थे। ये श्रमिक जालंधर में एक फैक्टरी में काम करते थे।
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उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के बाद फैक्टरी बंद हो गई, मालिक ने उनको नौकरी पर रखने से मना कर दिया। श्रमिक प्रमोद और विनय ने बताया कि उनको पुलिस ने सहारनपुर जिले के पिलखनी में चार दिन तक रोके रखा। आश्वासन दिया था कि बसों के द्वारा उनके घर भेजा जाएगा, लेकिन कोई बस नहीं आई तो वे साइकिल पर और पैदल ही निकल पड़े। जहां पुलिस मिलती है, वहां डंडे बरसाते हैं। श्रमिक महिला संतोष की गोद में एक साल का बालक है। इनके साथ प्रमोद को भी एक साल का पुत्र है। उन्होंने बताया कि ऐसी मुसीबत उन्होंने अपने जीवन में नहीं भुगती है। उनके बच्चों की किसी तरह से जान बच जाए और सही सलामत घर पर पहुंच जाएं। चाहे उनकी मौत हो जाएं। कस्बे के लोगों ने भूखे प्यासे इन श्रमिकों को बिस्कुट दिए। जिसके बाद ये सभी श्रमिक घर की ओर निकल पड़े।
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