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कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक व्यवहार रखें : राज राजेश्वर
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दंडी आश्रम श्रद्धांजलि सभा में बोलते जगतगुरु शंकराचार्य शारदा पीठाधीश्वर स्वामी राजराजेश्वर आ
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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दंडी आश्रम में ब्रह्मचारी गुरुदेव आश्रम महाराज की प्रथम पुण्यतिथि मनाई गई
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना (मुजफ्फरनगर)। शारदा पीठाधीश्वर हरिद्वार के जगतगुरु शंकराचार्य राज राजेश्वर महाराज ने कहा कि कलयुग है, बचकर रहें। शिष्यों के सामने गुरु संभल कर बोले। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक व्यवहार रखें। नाराज होना प्रसन्न होना साधुवादता का लक्षण है। संत समस्या का समाधान करते हैं।
शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में ब्रह्मचारी गुरुदेव आश्रम महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर महाराज ने कहा कि अहंकार का आवरण ओढ़ने से संतों के सानिध्य से वंचित रह जाते हैं। संत के पास जब भी जाएं हाथ बंद और हृदय खुला होना चाहिए। कृपा उसे ही मिलेगी, जिसका हृदय कर्ण खुला होगा। स्वामी गुरु देवेशवर महाराज सच्चे संत थे।
महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज ने कहा कि महापुरुषों के अंत वाणी स्पर्श में अमृत बसता है, इसलिए सदा इनके चरणों विद रज रहे। संत महापुरुषों के मिलन दर्शन मात्र से उद्धार हो जाता है। सच्ची श्रद्धांजलि वहीं होती है, जो उनके पद चिह्नों पर चला जाएं। लव जेहाद पर सरकार कड़ा कानून लाकर सख्ती बरतें। आरोपियों को फांसी मिले। हमारी संस्कृति सभ्यता से खिलवाड़ करने वाले माफी योग्य नहीं है।
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महामंडलेश्वर प्रतिशा नंद महाराज ने कहा कि अच्छे सितारे हमेशा चमकते हैं। आज की पीढ़ी ने बच्चों के सामने समर्पण कर दिया। माता-पिता के सामने बच्चों का समर्पित भाव होना चाहिए। अपने बच्चों को गायत्री मंत्र, संस्कृति, धर्म परंपराओं से जोड़ें, तभी हमारा उद्धार होगा। त्रयंबकेश्वर चैतन्य ब्रह्मचारी स्वरूप महाराज ने कहा कि संतों के चरणों में अमृत है। गुरु वहीं है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।
मध्य प्रदेश से पधारे भानु पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि अच्छे व्यवहार के लोग ऊंचाइयों पर पहुंचने वाले होते हैं। प्रकृति का यह नियम है कि जल में जल, दूध में दूध, घी में घी मिल जाता है, ठीक उसी तरह पुण्य आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है। महामंडलेश्वर केशवानंद महाराज ने कहा कि अपने अवगुणों को अंदर ने छिपाएं, उसका व्याख्यान करें, इससे अवगुण दूर होंगे। स्वामी गुरुदेश्वर आश्रम महाराज तीर्थ की बड़ी विभूति थे। उन का सरल स्वभाव व चेहरे पर तेज देखते ही बनता था।
भागवत पीठ पीठाधीस्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में गायत्री तपोनिष्ठ स्वामी गुरुदेवेश्वर आश्रम जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान ब्रह्मलीन गुरुदेवेशवर महाराज के जीवन से जुड़ी पुस्तक का विमोचन संत महात्माओं ने किया। कार्यक्रम का संचालन आचार्य गिरीशा महाराज और अध्यक्षता वेद प्रकाश शुक्ला कानपुर विठुर ने की। स्वामी गीतानंद तीर्थ, स्वामी गीतानंद गिरी, प्रबंधक मनोहर शर्मा, विनोद शर्मा चेयरमैन, उमाकांत द्विवेदी, बनवारी, दिनेश पांडे, गोपाल, गोविंद, लव कुश, राजकुमार राज, आचार्य अजय कृष्ण मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना (मुजफ्फरनगर)। शारदा पीठाधीश्वर हरिद्वार के जगतगुरु शंकराचार्य राज राजेश्वर महाराज ने कहा कि कलयुग है, बचकर रहें। शिष्यों के सामने गुरु संभल कर बोले। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक व्यवहार रखें। नाराज होना प्रसन्न होना साधुवादता का लक्षण है। संत समस्या का समाधान करते हैं।
शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में ब्रह्मचारी गुरुदेव आश्रम महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर महाराज ने कहा कि अहंकार का आवरण ओढ़ने से संतों के सानिध्य से वंचित रह जाते हैं। संत के पास जब भी जाएं हाथ बंद और हृदय खुला होना चाहिए। कृपा उसे ही मिलेगी, जिसका हृदय कर्ण खुला होगा। स्वामी गुरु देवेशवर महाराज सच्चे संत थे।
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महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज ने कहा कि महापुरुषों के अंत वाणी स्पर्श में अमृत बसता है, इसलिए सदा इनके चरणों विद रज रहे। संत महापुरुषों के मिलन दर्शन मात्र से उद्धार हो जाता है। सच्ची श्रद्धांजलि वहीं होती है, जो उनके पद चिह्नों पर चला जाएं। लव जेहाद पर सरकार कड़ा कानून लाकर सख्ती बरतें। आरोपियों को फांसी मिले। हमारी संस्कृति सभ्यता से खिलवाड़ करने वाले माफी योग्य नहीं है।
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महामंडलेश्वर प्रतिशा नंद महाराज ने कहा कि अच्छे सितारे हमेशा चमकते हैं। आज की पीढ़ी ने बच्चों के सामने समर्पण कर दिया। माता-पिता के सामने बच्चों का समर्पित भाव होना चाहिए। अपने बच्चों को गायत्री मंत्र, संस्कृति, धर्म परंपराओं से जोड़ें, तभी हमारा उद्धार होगा। त्रयंबकेश्वर चैतन्य ब्रह्मचारी स्वरूप महाराज ने कहा कि संतों के चरणों में अमृत है। गुरु वहीं है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए।
मध्य प्रदेश से पधारे भानु पीठाधीश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि अच्छे व्यवहार के लोग ऊंचाइयों पर पहुंचने वाले होते हैं। प्रकृति का यह नियम है कि जल में जल, दूध में दूध, घी में घी मिल जाता है, ठीक उसी तरह पुण्य आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है। महामंडलेश्वर केशवानंद महाराज ने कहा कि अपने अवगुणों को अंदर ने छिपाएं, उसका व्याख्यान करें, इससे अवगुण दूर होंगे। स्वामी गुरुदेश्वर आश्रम महाराज तीर्थ की बड़ी विभूति थे। उन का सरल स्वभाव व चेहरे पर तेज देखते ही बनता था।
भागवत पीठ पीठाधीस्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में गायत्री तपोनिष्ठ स्वामी गुरुदेवेश्वर आश्रम जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान ब्रह्मलीन गुरुदेवेशवर महाराज के जीवन से जुड़ी पुस्तक का विमोचन संत महात्माओं ने किया। कार्यक्रम का संचालन आचार्य गिरीशा महाराज और अध्यक्षता वेद प्रकाश शुक्ला कानपुर विठुर ने की। स्वामी गीतानंद तीर्थ, स्वामी गीतानंद गिरी, प्रबंधक मनोहर शर्मा, विनोद शर्मा चेयरमैन, उमाकांत द्विवेदी, बनवारी, दिनेश पांडे, गोपाल, गोविंद, लव कुश, राजकुमार राज, आचार्य अजय कृष्ण मौजूद रहे।