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शिवालयों की ओर बढ़ रही श्रद्धा और भक्ति की अविरल धारा
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 18 Jul 2017 12:10 AM IST
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शिवालयों की ओर बढ़ता कांवड़ियों का रैला।
- फोटो : अमर उजाला
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कांवड़ यात्रा में कांवड़ियों की भीड़ लगातार उमड़ती जा रही है। हाईवे और शहर में आस्था और श्रद्धा की अविरल धारा लगातार बह रही है। चारों ओर बम-बम भोले, हर-हर महादेव के जयघोष गुंजायमान हो रहे हैं। पूरा शहर और हाईवे शिवमय हो गया है।
विश्व की सबसे बड़ी पैदल धार्मिक यात्रा कांवड़ यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो गया है। अब स्थानीय कांवड़िये लौटने लगे हैं। हरिद्वार, नीलकंठ और गोमुख से पवित्र गंगाजल लेकर आने वाले शिवभक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पूरा कांवड़ यात्रा मार्ग हाईवे के अलावा शामली रोड, बुढ़ाना-शाहपुर मार्ग, गंगनहर का चौधरी चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग पर कांवड़ियों का साम्राज्य हो गया है। पूरा जिला केसरिया रंग से रंगा है।
औघड़दानी बाबा के भक्त पवित्र गंगाजल लेकर हर-हर महादेव और बोल बम-बम बम के जयघोष के साथ अपने ईष्ट देवालयों और शिवालयों की ओर बढ़ते जा रहे हैं। हाईवे से सिसौना, बझेड़ी, सरवट, रुड़की रोड होते हुए शहर में आ रहे कांवड़ियों की कतारें टूट नहीं रही हैं। यहां शिव मूर्ति पर भगवान आशुतोष की परिक्रमा करके कांवड़िया शामली रोड, बुढ़ाना रोड, मेरठ रोड की ओर बढ़ते जा रहे हैं। भगवान शंकर-पार्वती के भक्ति गीतों और भजनों की धूम मच रही है। शिवभक्त टोली के साथ नाचते गाते शिवालयों की ओर कूच कर रहे हैं।
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बड़ी कांवड़ देखने को उमड़ रही है भीड़
मुजफ्फरनगर। रंगीन रोशनी और डीजे से युक्त विशाल कांवड़ लगातार आ रही हैं, जिन्हें देखने के लिए कांवड़ यात्रा मार्ग पर भीड़ उमड़ रही है। शहर में रुड़की रोड, शिवचौक, रामपुरम, नुमायश कैंप, आनंदपुरी आदि क्षेत्रों में शाम को कांवड़ देखने के लिए भारी भीड़ जुट रही है।
आकर्षण का केंद्र बना शिवचौक
मुजफ्फरनगर। शिव चौक कांवड़ यात्रा में आकर्षण का केंद्र बना है। शहर में आने वाले तमाम कांवड़िया भगवान शंकर की परिक्रमा कर आगे बढ़ रहे हैं। शिवमूर्ति को भव्य तरीके से सजाया गया है। साथ ही शिवचौक पर विशेष रंगीन रोशनी की सजावट की गई है, जो आकर्षण का केंद्र बनी है। यहां पर शिवभक्त कांवड़ियों को देखने वालों की अपार भीड़ जुट रही है।
भोले की सेवा में जुट रहे श्रद्धालु
मुजफ्फरनगर। हरिद्वार से लौटते शिवभक्तों की सेवा में श्रद्धालु जुट रहे हैं। कांवड़ सेवा शिविरों का खुलना जारी है। शिविरों में शिवभक्तों के लिए चाय, नाश्ता, खाना, दवाई के साथ विश्राम की व्यवस्था है।
दौड़ में अपनों से बिछुड़ते भोले
मुजफ्फरनगर। कांवड़ियों की भीड़ में सोमवार को सौ से अधिक बच्चे अपने परिजनों से बिछुड़ गए। इनकी उम्र दस से 16 साल के बीच रही। साथियों से बिछुड़ने के कुल 271 मामले कंट्रोल रूम में दर्ज हुए। कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारियों को बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाने के लिए उनके घर भी फोन करना पड़ा।
हरिद्वार से गंगाजल लाने वाले कांवड़ियों में इस बार कम उम्र के बच्चे भी बड़ी संख्या में हैं। अपने परिजनों के साथ दस से 16 साल तक के बच्चे भी कांवड़ ला रहे हैं। तेज रफ्तार दौड़ रहे कांवड़ियों के बीच ये अपनों से बिछुड़ जाते हैं। सोमवार को अपनों से बिछुड़ने के शिवचौक स्थित कंट्रोल रूम में 271 मामले दर्ज हुए। इसमें सबसे बड़ी बात यह रही कि अधिकतम बच्चे बिछुड़ने वालों में थे। 100 से अधिक बच्चे ऐसे रहे, जिनकी उम्र 16 साल से कम रही।
खुद कर्मचारी बच्चों को देखकर हतप्रभ रह गए। ड्यूटी पर तैनात पालिका कर्मी तनवीर अहमद ने बताया कि तीन भाई तो दस से 16 साल के हैं। इनमें सबसे छोटा 12 साल का शिकायत दर्ज कराने आया कि उसके दोनों बड़े भाई बिछुड़ गए हैं। 11 साल की मेरठ की एक लड़की अपनों से बिछुड़ गई, जिसके घर फोन कर परिजनों को बुलाना पड़ा। पूरे दिन कांवड़ कंट्रोल रूम में छोटे बच्चों की लाइन लगी रही। अफसरों और कर्मचारियों के सहयोग से सभी बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाया गया।
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विश्व की सबसे बड़ी पैदल धार्मिक यात्रा कांवड़ यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो गया है। अब स्थानीय कांवड़िये लौटने लगे हैं। हरिद्वार, नीलकंठ और गोमुख से पवित्र गंगाजल लेकर आने वाले शिवभक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पूरा कांवड़ यात्रा मार्ग हाईवे के अलावा शामली रोड, बुढ़ाना-शाहपुर मार्ग, गंगनहर का चौधरी चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग पर कांवड़ियों का साम्राज्य हो गया है। पूरा जिला केसरिया रंग से रंगा है।
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औघड़दानी बाबा के भक्त पवित्र गंगाजल लेकर हर-हर महादेव और बोल बम-बम बम के जयघोष के साथ अपने ईष्ट देवालयों और शिवालयों की ओर बढ़ते जा रहे हैं। हाईवे से सिसौना, बझेड़ी, सरवट, रुड़की रोड होते हुए शहर में आ रहे कांवड़ियों की कतारें टूट नहीं रही हैं। यहां शिव मूर्ति पर भगवान आशुतोष की परिक्रमा करके कांवड़िया शामली रोड, बुढ़ाना रोड, मेरठ रोड की ओर बढ़ते जा रहे हैं। भगवान शंकर-पार्वती के भक्ति गीतों और भजनों की धूम मच रही है। शिवभक्त टोली के साथ नाचते गाते शिवालयों की ओर कूच कर रहे हैं।
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बड़ी कांवड़ देखने को उमड़ रही है भीड़
मुजफ्फरनगर। रंगीन रोशनी और डीजे से युक्त विशाल कांवड़ लगातार आ रही हैं, जिन्हें देखने के लिए कांवड़ यात्रा मार्ग पर भीड़ उमड़ रही है। शहर में रुड़की रोड, शिवचौक, रामपुरम, नुमायश कैंप, आनंदपुरी आदि क्षेत्रों में शाम को कांवड़ देखने के लिए भारी भीड़ जुट रही है।
आकर्षण का केंद्र बना शिवचौक
मुजफ्फरनगर। शिव चौक कांवड़ यात्रा में आकर्षण का केंद्र बना है। शहर में आने वाले तमाम कांवड़िया भगवान शंकर की परिक्रमा कर आगे बढ़ रहे हैं। शिवमूर्ति को भव्य तरीके से सजाया गया है। साथ ही शिवचौक पर विशेष रंगीन रोशनी की सजावट की गई है, जो आकर्षण का केंद्र बनी है। यहां पर शिवभक्त कांवड़ियों को देखने वालों की अपार भीड़ जुट रही है।
भोले की सेवा में जुट रहे श्रद्धालु
मुजफ्फरनगर। हरिद्वार से लौटते शिवभक्तों की सेवा में श्रद्धालु जुट रहे हैं। कांवड़ सेवा शिविरों का खुलना जारी है। शिविरों में शिवभक्तों के लिए चाय, नाश्ता, खाना, दवाई के साथ विश्राम की व्यवस्था है।
दौड़ में अपनों से बिछुड़ते भोले
मुजफ्फरनगर। कांवड़ियों की भीड़ में सोमवार को सौ से अधिक बच्चे अपने परिजनों से बिछुड़ गए। इनकी उम्र दस से 16 साल के बीच रही। साथियों से बिछुड़ने के कुल 271 मामले कंट्रोल रूम में दर्ज हुए। कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारियों को बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाने के लिए उनके घर भी फोन करना पड़ा।
हरिद्वार से गंगाजल लाने वाले कांवड़ियों में इस बार कम उम्र के बच्चे भी बड़ी संख्या में हैं। अपने परिजनों के साथ दस से 16 साल तक के बच्चे भी कांवड़ ला रहे हैं। तेज रफ्तार दौड़ रहे कांवड़ियों के बीच ये अपनों से बिछुड़ जाते हैं। सोमवार को अपनों से बिछुड़ने के शिवचौक स्थित कंट्रोल रूम में 271 मामले दर्ज हुए। इसमें सबसे बड़ी बात यह रही कि अधिकतम बच्चे बिछुड़ने वालों में थे। 100 से अधिक बच्चे ऐसे रहे, जिनकी उम्र 16 साल से कम रही।
खुद कर्मचारी बच्चों को देखकर हतप्रभ रह गए। ड्यूटी पर तैनात पालिका कर्मी तनवीर अहमद ने बताया कि तीन भाई तो दस से 16 साल के हैं। इनमें सबसे छोटा 12 साल का शिकायत दर्ज कराने आया कि उसके दोनों बड़े भाई बिछुड़ गए हैं। 11 साल की मेरठ की एक लड़की अपनों से बिछुड़ गई, जिसके घर फोन कर परिजनों को बुलाना पड़ा। पूरे दिन कांवड़ कंट्रोल रूम में छोटे बच्चों की लाइन लगी रही। अफसरों और कर्मचारियों के सहयोग से सभी बच्चों को उनके परिजनों तक पहुंचाया गया।