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काजल की कोठरी बनी पालिका, तीन दशक से हर चेयरमैन दागी
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रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद 30 साल से काजल की कोठरी बनी है। इसमें जो भी चेयरमैन प्रवेश करता है, दागी होकर बाहर निकलता है। बीते तीन दशक में एक भी चेयरमैन अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद अब तक जो चेयरमैन हटाए गए हैं, उनमें प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल, भाजपा नेता सुभाष चंद शर्मा, जगदीश भाटिया, कांग्रेस नेता पंकज अग्रवाल शामिल हैं। अब वर्तमान चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के भी वित्तीय अधिकार सीज हो गए हैं।
भाजपा नेता डॉ सुभाष शर्मा ने चेयरमैन के रूप में एक दिसंबर 1995 को कार्यभार ग्रहण किया था। कार्यकाल पूरा करने से एक साल पहले ही भ्रष्टाचार के आरोपों में अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें दस दिसंबर 1999 को हटा दिया गया। पालिका में एक साल तक प्रशासक नियुक्त रहा। भाजपा नेता जगदीश भाटिया ने चुनाव जीतने के बाद एक दिसंबर 2000 को कार्यभार ग्रहण किया। 18 दिसंबर 2004 को उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में हटा दिया गया। छह दिन बाद कोर्ट से उन्हें फिर चार्ज मिल गया। भाजपा नेता और वर्तमान में प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने चेयरमैन चुने जाने के बाद 16 नवंबर 2006 में कार्यभार ग्रहण किया। एक जून 2009 को उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में हटा दिया गया। दो जून 2009 से 16 जुलाई 2009 तक प्रशासक नियुक्त रहा। हाईकोर्ट के आदेश पर 17 जुलाई 2009 को कपिलदेव अग्रवाल को फिर से चार्ज मिला। वह 15 नवंबर 2011 तक चेयरमैन रहे।
कांग्रेस नेता पंकज अग्रवाल ने चुनाव में विजय हासिल करने के बाद 18 जुलाई 2012 को कार्यभार ग्रहण किया। पंकज अग्रवाल को एक अप्रैल 2017 को भ्रष्टाचार के आरोप में हटा दिया गया और वह कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। इसके बाद कांग्रेस के सिंबल पर अंजू अग्रवाल चुनाव जीती और 12 दिसंबर 2017 को उन्होंने चेयरमैन का पद संभाला। 19 जुलाई 2022 को उनके वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए। हालांकि अभी तक अंजू अग्रवाल के केवल वित्तीय अधिकार सीज हुए हैं, अभी उन्हें पद से नहीं हटाया गया है।
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1946 से अब तक तीन ने ही कार्यकाल पूरा किया
नगर पालिका परिषद में 1946 से लेकर अब तक तीन चेयरमैन ही ऐसे हैं, जो अपना कार्यकाल पूरा कर पाए हैं। इनमें कीर्ति भूषण अग्रवाल, जुगल किशोर पालीवाल और विद्या भूषण का नाम शामिल है।
बालियान बोले, पालिकाध्यक्ष के खिलाफ नहीं की कोई शिकायत
शासन ने संजीव बालियान के पत्र के संज्ञान पर दिखाई कार्रवाई
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के वित्तीय अधिकार सीज होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। शासन ने अपने आदेश में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के पत्र का हवाला दिया था। मगर, बालियान का कहना है कि उन्होंने चेयरपर्सन की शासन में कोई शिकायत नहीं की है। सवाल यह है कि बालियान के नाम से पत्र को शासन तक आखिर किस व्यक्ति ने पहुंचाया है।
मंगलवार को शासन ने चेयरपर्सन के वित्तीय अधिकार सीज किए थे। जिन आरोपों का हवाला दिया था, उनमें केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान के भी एक पत्र का उल्लेख है। शिकायत तीन वर्ष पुरानी बताई गई है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ संजीव बालियान का कहना है कि उन्होंने शासन को चेयरपर्सन की कोई शिकायत ही नहीं की है। वह खुद आश्चर्यचकित हैं। तीन साल पहले पालिका के सभासद कुछ शिकायतों को लेकर आए थे। उन्होंने कमिश्नर के नाम एक पत्र लिखा था कि शिकायतों की जांच कराई जाएं। शासन में कोई शिकायत नहीं की है और न ही कभी अपना लेटर लगाया है।
मुझे जानकारी नहीं किसने शिकायत की : कपिल देव
जिन सभासदों ने शिकायत की थी वह कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल के करीबी हैं। प्रकरण में अग्रवाल का कहना है कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है। किसने शिकायत की, वह नहीं जानते। पालिका के प्रकरण से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
वक्त बताएगा कैसे जवाब देंगे : अंजू अग्रवाल
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि शासन से जो भी नोटिस मिला, वे सभी का जवाब दे चुकी है। अचानक हुई कार्रवाई से हतप्रभ हैं। भाजपा की कार्यकर्ता हूं, अब वक्त बताएगा कि भाजपा हाईकमान के सामने प्रकरण ले जाएं या हाईकोर्ट में जाएं।
मंत्री के करीबी हैं दोनों सभासद
कौशल विकास राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल और चेयरपर्सन डॉ. अंजू अग्रवाल के बीच अंदरूनी खींचतान किसी से छिपी नहीं है। पालिकाध्यक्ष की शिकायत करने वाले सभासद राजीव शर्मा और मनोज वर्मा कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल के करीबी हैं। शहर में कांवड़ मार्ग पर निजी खर्च से लगाए गए होर्डिंग पर दोनों सभासदों के फोटो की जगह महिला जैसी आकृति बना दी गई, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था।
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मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद 30 साल से काजल की कोठरी बनी है। इसमें जो भी चेयरमैन प्रवेश करता है, दागी होकर बाहर निकलता है। बीते तीन दशक में एक भी चेयरमैन अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद अब तक जो चेयरमैन हटाए गए हैं, उनमें प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल, भाजपा नेता सुभाष चंद शर्मा, जगदीश भाटिया, कांग्रेस नेता पंकज अग्रवाल शामिल हैं। अब वर्तमान चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के भी वित्तीय अधिकार सीज हो गए हैं।
भाजपा नेता डॉ सुभाष शर्मा ने चेयरमैन के रूप में एक दिसंबर 1995 को कार्यभार ग्रहण किया था। कार्यकाल पूरा करने से एक साल पहले ही भ्रष्टाचार के आरोपों में अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें दस दिसंबर 1999 को हटा दिया गया। पालिका में एक साल तक प्रशासक नियुक्त रहा। भाजपा नेता जगदीश भाटिया ने चुनाव जीतने के बाद एक दिसंबर 2000 को कार्यभार ग्रहण किया। 18 दिसंबर 2004 को उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में हटा दिया गया। छह दिन बाद कोर्ट से उन्हें फिर चार्ज मिल गया। भाजपा नेता और वर्तमान में प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने चेयरमैन चुने जाने के बाद 16 नवंबर 2006 में कार्यभार ग्रहण किया। एक जून 2009 को उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में हटा दिया गया। दो जून 2009 से 16 जुलाई 2009 तक प्रशासक नियुक्त रहा। हाईकोर्ट के आदेश पर 17 जुलाई 2009 को कपिलदेव अग्रवाल को फिर से चार्ज मिला। वह 15 नवंबर 2011 तक चेयरमैन रहे।
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कांग्रेस नेता पंकज अग्रवाल ने चुनाव में विजय हासिल करने के बाद 18 जुलाई 2012 को कार्यभार ग्रहण किया। पंकज अग्रवाल को एक अप्रैल 2017 को भ्रष्टाचार के आरोप में हटा दिया गया और वह कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। इसके बाद कांग्रेस के सिंबल पर अंजू अग्रवाल चुनाव जीती और 12 दिसंबर 2017 को उन्होंने चेयरमैन का पद संभाला। 19 जुलाई 2022 को उनके वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए। हालांकि अभी तक अंजू अग्रवाल के केवल वित्तीय अधिकार सीज हुए हैं, अभी उन्हें पद से नहीं हटाया गया है।
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1946 से अब तक तीन ने ही कार्यकाल पूरा किया
नगर पालिका परिषद में 1946 से लेकर अब तक तीन चेयरमैन ही ऐसे हैं, जो अपना कार्यकाल पूरा कर पाए हैं। इनमें कीर्ति भूषण अग्रवाल, जुगल किशोर पालीवाल और विद्या भूषण का नाम शामिल है।
बालियान बोले, पालिकाध्यक्ष के खिलाफ नहीं की कोई शिकायत
शासन ने संजीव बालियान के पत्र के संज्ञान पर दिखाई कार्रवाई
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के वित्तीय अधिकार सीज होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। शासन ने अपने आदेश में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के पत्र का हवाला दिया था। मगर, बालियान का कहना है कि उन्होंने चेयरपर्सन की शासन में कोई शिकायत नहीं की है। सवाल यह है कि बालियान के नाम से पत्र को शासन तक आखिर किस व्यक्ति ने पहुंचाया है।
मंगलवार को शासन ने चेयरपर्सन के वित्तीय अधिकार सीज किए थे। जिन आरोपों का हवाला दिया था, उनमें केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान के भी एक पत्र का उल्लेख है। शिकायत तीन वर्ष पुरानी बताई गई है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ संजीव बालियान का कहना है कि उन्होंने शासन को चेयरपर्सन की कोई शिकायत ही नहीं की है। वह खुद आश्चर्यचकित हैं। तीन साल पहले पालिका के सभासद कुछ शिकायतों को लेकर आए थे। उन्होंने कमिश्नर के नाम एक पत्र लिखा था कि शिकायतों की जांच कराई जाएं। शासन में कोई शिकायत नहीं की है और न ही कभी अपना लेटर लगाया है।
मुझे जानकारी नहीं किसने शिकायत की : कपिल देव
जिन सभासदों ने शिकायत की थी वह कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल के करीबी हैं। प्रकरण में अग्रवाल का कहना है कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है। किसने शिकायत की, वह नहीं जानते। पालिका के प्रकरण से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
वक्त बताएगा कैसे जवाब देंगे : अंजू अग्रवाल
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि शासन से जो भी नोटिस मिला, वे सभी का जवाब दे चुकी है। अचानक हुई कार्रवाई से हतप्रभ हैं। भाजपा की कार्यकर्ता हूं, अब वक्त बताएगा कि भाजपा हाईकमान के सामने प्रकरण ले जाएं या हाईकोर्ट में जाएं।
मंत्री के करीबी हैं दोनों सभासद
कौशल विकास राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल और चेयरपर्सन डॉ. अंजू अग्रवाल के बीच अंदरूनी खींचतान किसी से छिपी नहीं है। पालिकाध्यक्ष की शिकायत करने वाले सभासद राजीव शर्मा और मनोज वर्मा कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल के करीबी हैं। शहर में कांवड़ मार्ग पर निजी खर्च से लगाए गए होर्डिंग पर दोनों सभासदों के फोटो की जगह महिला जैसी आकृति बना दी गई, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था।