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उद्यमी को अवैध हिरासत में रखने की जांच की
Sat, 09 Feb 2019 11:32 PM IST
Deepak Sharma
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
Published by: Deepak Sharma
Updated Sat, 09 Feb 2019 11:32 PM IST
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मुजफ्फरनगर। जनपद में वर्ष 2011 के लालबत्ती प्रकरण में नई मंडी के उद्यमी को अवैध हिरासत में रखने के मामले की जांच कर रही सीबीसीआईडी टीम ने शनिवार को मुख्यालय पहुंचकर आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई। इस मामले में तत्कालीन सीओ सिटी के साथ ही सिविल लाइंस थाने के दो दरोगा व दो पुलिसकर्मियों समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
वर्ष 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार के समय शहर के नई मंडी क्षेत्र के निवासी उद्यमी प्रमोद कुमार को कुछ लोगों ने उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का चेयरमैन बनवाने का झांसा देकर बतौर खर्च एक करोड़ रुपये की मांग की थी। प्रमोद कुमार के सहमति जताने पर आरोपी उसे लखनऊ ले गए थे, जहां एक होटल में ठहराकर प्रमोद की मुलाकात मुख्यमंत्री के सचिव व पीए के रूप में दो लोगों से कराते हुए उनसे एक करोड़ रुपये ले लिए गए थे।
इसके बाद बाकायदा नई मंडी क्षेत्र में प्रमोद कुमार का उत्तर प्रदेश परिवहन निगम चेयरमैन के रूप में स्वागत कराया गया था। बाद में प्रमोद कुमार ने खुद को चेयरमैन दर्शाते हुए एसएसपी को लेटर लिखकर अपने लिए शेडो की मांग की थी। लेटर पर शक होने पर तत्कालीन एसएसपी प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने जांच कराई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। मामले का खुलासा होने पर बसपा सरकार ने अफसरों को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए थे, जिसके बाद प्रमोद कुमार के भाई रामकुमार ने सिविल लाइंस थाने में अपने साथ हुई धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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आरोप है कि थाना पुलिस ने आरोपियों से साज खाते हुए उल्टे प्रमोद कुमार को ही 19 मई 2011 को हिरासत में ले लिया था, जिसे तीन दिन तक हवालात में रखकर थर्ड डिग्री देते हुए फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई थी। किसी तरह पुलिस की हिरासत से छूटकर प्रमोद कुमार ने शासन से गुुहार लगाई थी, जिसके बाद मामले की जांच सीबीसीआईडी के सुपुर्द कर दी गई थी। प्रथम दृष्टया जांच में उद्यमी को अवैध हिरासत में रखने की पुष्टि होने के बाद तत्कालीन सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह ने सिविल लाइंस थाने में तत्कालीन सीओ सिटी के साथ ही दो दरोगा व दो पुलिसकर्मियों समेत 11 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मामले में शनिवार को सीबीसीआईडी मेरठ की टीम ने जिला मुख्यालय आकर इस मामले को खंगालते हुए जरूरी जानकारी जुटाई। हालांकि इस दौरान उस समय थाने में तैनात रहा कोई पुलिसकर्मी यहां नहीं मिला, जिस पर टीम अन्य जानकारियां जुटाकर लौट गई।
इनके खिलाफ दर्ज कराई थी सीबीसीआईडी ने रिपोर्ट
सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह ने एक जून 2015 को बहुचर्चित लालबत्ती प्रकरण में उद्यमी प्रमोद कुमार को अवैध हिरासत में रखने के मामले में सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें तत्कालीन सीओ सिटी शेखर सिंह, एसआई महेश कुमार मिश्रा, एसआई विजय कुमार गौतम, कांस्टेबल ओमवीर सिंह, कांस्टेबल नरेंद्र सिंह के साथ ही पुरुषार्थी कॉलोनी निवासी राजवीर सिंह, भौराखुर्द गांव निवासी बिजेंद्र सिंह, संजय मार्ग भोपा रोड निवासी हरिमोहन गर्ग, भोपा रोड निवासी प्रमोघ भाटिया, रैदासपुरी निवासी जितेंद्र अनेजा और रामलीला टिल्ला निवासी सानेश्वर शर्मा को आरोपी बनाया गया था।
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वर्ष 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार के समय शहर के नई मंडी क्षेत्र के निवासी उद्यमी प्रमोद कुमार को कुछ लोगों ने उत्तर प्रदेश परिवहन निगम का चेयरमैन बनवाने का झांसा देकर बतौर खर्च एक करोड़ रुपये की मांग की थी। प्रमोद कुमार के सहमति जताने पर आरोपी उसे लखनऊ ले गए थे, जहां एक होटल में ठहराकर प्रमोद की मुलाकात मुख्यमंत्री के सचिव व पीए के रूप में दो लोगों से कराते हुए उनसे एक करोड़ रुपये ले लिए गए थे।
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इसके बाद बाकायदा नई मंडी क्षेत्र में प्रमोद कुमार का उत्तर प्रदेश परिवहन निगम चेयरमैन के रूप में स्वागत कराया गया था। बाद में प्रमोद कुमार ने खुद को चेयरमैन दर्शाते हुए एसएसपी को लेटर लिखकर अपने लिए शेडो की मांग की थी। लेटर पर शक होने पर तत्कालीन एसएसपी प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने जांच कराई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। मामले का खुलासा होने पर बसपा सरकार ने अफसरों को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए थे, जिसके बाद प्रमोद कुमार के भाई रामकुमार ने सिविल लाइंस थाने में अपने साथ हुई धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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आरोप है कि थाना पुलिस ने आरोपियों से साज खाते हुए उल्टे प्रमोद कुमार को ही 19 मई 2011 को हिरासत में ले लिया था, जिसे तीन दिन तक हवालात में रखकर थर्ड डिग्री देते हुए फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई थी। किसी तरह पुलिस की हिरासत से छूटकर प्रमोद कुमार ने शासन से गुुहार लगाई थी, जिसके बाद मामले की जांच सीबीसीआईडी के सुपुर्द कर दी गई थी। प्रथम दृष्टया जांच में उद्यमी को अवैध हिरासत में रखने की पुष्टि होने के बाद तत्कालीन सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह ने सिविल लाइंस थाने में तत्कालीन सीओ सिटी के साथ ही दो दरोगा व दो पुलिसकर्मियों समेत 11 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मामले में शनिवार को सीबीसीआईडी मेरठ की टीम ने जिला मुख्यालय आकर इस मामले को खंगालते हुए जरूरी जानकारी जुटाई। हालांकि इस दौरान उस समय थाने में तैनात रहा कोई पुलिसकर्मी यहां नहीं मिला, जिस पर टीम अन्य जानकारियां जुटाकर लौट गई।
इनके खिलाफ दर्ज कराई थी सीबीसीआईडी ने रिपोर्ट
सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह ने एक जून 2015 को बहुचर्चित लालबत्ती प्रकरण में उद्यमी प्रमोद कुमार को अवैध हिरासत में रखने के मामले में सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें तत्कालीन सीओ सिटी शेखर सिंह, एसआई महेश कुमार मिश्रा, एसआई विजय कुमार गौतम, कांस्टेबल ओमवीर सिंह, कांस्टेबल नरेंद्र सिंह के साथ ही पुरुषार्थी कॉलोनी निवासी राजवीर सिंह, भौराखुर्द गांव निवासी बिजेंद्र सिंह, संजय मार्ग भोपा रोड निवासी हरिमोहन गर्ग, भोपा रोड निवासी प्रमोघ भाटिया, रैदासपुरी निवासी जितेंद्र अनेजा और रामलीला टिल्ला निवासी सानेश्वर शर्मा को आरोपी बनाया गया था।