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इज्तमा का हुआ समापन, उलमा बोले-अल्लाह की राह पर चलकर इंसान बनें 

Tue, 09 May 2017 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Tue, 09 May 2017 12:03 AM IST
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Ijtma concludes in Charywal
चरथावल में आयोजित इज्त्मा में मौजूद अकीदतमंद। - फोटो : अमर उजाला
दीन-ए-इस्लाम में नफरत की कहीं कोई गुंजाइश नहीं है। दीन और इस्लाम मोहब्बत का पैगाम देता है। नबी की सुन्नतों पर जिंदगी गुजारने की नसीहत दी गई। उलेमा ने मुस्लिमों को दीन और मोहब्बत की राह पर चलकर सच्चा इंसान बनने की सीख दी।
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चरथावल कस्बे में थानाभवन मार्ग पर चल रहा दो दिवसीय इज्तमा सोमवार को दुआओं के साथ संपन्न हुआ। दिल्ली हजरत निजामुद्दीन मरकज से आए मौलाना शमीम ने खिताब फरमाया कि अल्लाह की राह पर चलकर इंसान बनें। क्योंकि इस रास्ते पर किनहा (ईष्या) और अदावत नहीं चलती है, बल्कि हमदर्दी, खिदमत, भलाई से नेक इंसान बना जा सकता है।
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जो इंसान अपने आप की चाहत रखेगा, वह जहन्नुम (नर्क) में जाएगा। फरमाया कि दुश्मन से भी नरमी बरतनी चाहिए। यदि खाने वाले बनोगे तो तोड़ पैदा होगा और खिलाने वाले बनोगे तो आपस में जोड़ पैदा होगा। आज के दौर में दीन और नबी की सुन्नतों से दूर होने पर मुसलमान तंगहाल और परेशानी में घिरा है। मस्जिदों को आबाद करो, अल्लाह आपके घरों को आबाद रखेंगे।
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कुरआन-ए-पाक अल्लाह का बेशकीमती कलाम है। इसकी तालीम से दुनियावी और आखिरत की जिंदगी कामयाब होगी। किसी का हक दबाना और छीनना गुनाह के बराबर है। इसके बाद इज्तमा में अल्लाह की बारगाह में लाखों अकीकतमंदों ने नमाज अदा की। मौलाना शमीम ने दुआ कराई। जिसमें लाखों लोगों ने हाथ उठाकर मुल्क और कौम की तरक्की, खुशहाली के लिए दुआएं की। इज्तमे में भीड़ उमड़ने के कारण लोगों ने आसपास खेतों में डेरा जमाकर दुआ में भाग लिया।             

देश-विदेश रवाना हुईं 101 जमातें            
इज्तमा में दुआ के बाद अकीकतमंदों की करीब 101 जमात निकाली गईं। जिसमें एक जमात इंडोनेशिया के लिए भी गई। इसके अलावा मद्रास, हैदराबाद, भूसावाल महाराष्ट्र पचौंडा, उधमपुर, बाराबंकी, देहरादून समेत कई राज्यों और शहरों के लिए जमातों को रवाना किया गया।

शादी में फिजूलखर्ची से बचें मुसलमान            
इज्तमे में उलेमा ने निकाह पढ़ाने के दौरान कहा कि शादी, निकाह में फिजूलखर्ची से बचा जाए, क्योंकि यह नबी की सुन्नत के खिलाफ है। सादगी और दीन रसूख के साथ निकाह अफजल अमल है। दूसरे दिन भी करीब 30 से अधिक निकाह की रस्म अदा की गई। मजहबी ऐतबार से सादगी के साथ बेटी का निकाह करने की सलाह दी गई।    


घंटों तक जाम रहा थानाभवन मार्ग            
इज्तमा खत्म होने के बाद पुलिस और वॉलिंटयरों को व्यवस्था बनाने में पसीना बहाना पड़ा। नहर पुल से महाबलीपुर मार्ग से वैकल्पिक बाईपास बनाकर खेतों के रास्ते भीड़ को निकाला गया, लेकिन घंटों तक थानाभवन मार्ग जाम से जूझता रहा। व्यवस्था बनाने में हाजी फाजिल त्यागी, सलीम त्यागी, शमशाद त्यागी, किफायत अली, डॉ सदाकत अली, ताहिर त्यागी, प्रधान नफीस बाबा, तनवीर, डॉ. मुस्तफा, डॉॅ. जावेद कुल्हेड़ी आदि मौजूद रहे।
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