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सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे सोने को विवश सैकड़ों लोग

Fri, 04 Jan 2019 12:13 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Published by: Deepak Kausik Updated Fri, 04 Jan 2019 12:13 AM IST
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Hundreds of people forced to sleep under open sky in cold nights
रेलवे स्टेशन पर खुले आसमान के नीचे सोते लोग। - फोटो : अमर उजाला
सर्द भरी रातों में खुले आसमान के नीचे किसी के सोने की बात सुनकर रूह कांप उठती है। पर यह सच है और शहर में सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश हैं। प्रशासन का शेल्टर होम भर चुका है और उसमें महिलाओं के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। रेलवे स्टेशन के बाहर कई महिलाएं भी बच्चों के साथ खुले में सोती हुईं मिलीं। साईधाम के बाहर लोग लाइन में सोते हुए दिखाई दिए।  
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अमर उजाला टीम ने बुधवार की रात 12 बजे शहर के मुख्य स्थानों का भ्रमण कर प्रशासन के शेल्टर होम और खुले आसमान के नीचे सोने की विवशता को जानने की कोशिश की। इस दौरान जिला प्रशासन के उन दावों की पोल खुलती नजर आई, जिसमें यह कहा जा रहा था कि खुले आसमान के नीचे कोई नहीं सो रहा है। रेलवे स्टेशन पर आरक्षण विंडों के बाहर खुले आसमान के नीचे दस से अधिक लोग पड़े मिले।
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यहां सबसे चौंकाने वाली स्थिति यह रही कि फिरोजाबाद से हींग बेचने के लिए आए कासिफ के परिवार की एक महिला भी अपने दो बच्चों के साथ लेटी हुई थी। कासिफ ने बताया कि दिनभर वह हींग बेचते हैं रात्रि में यहीं पर लेट जाते हैं। इन लोगों को शेल्टर होम की जानकारी ही नहीं है। खुले में पड़े छोटे-छोटे बच्चों को देख हर कोई सिहर उठता है। रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट और उसके बाहर तो 20 से अधिक लोग लेटे दिखाई दिए, इनमें से कुछ तो ऐसे थे, जिनके पास ओढ़ने के लिए मात्र एक पतली सी चादर ही नजर आई।
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गांव गढ़ी देशराज की एक महिला से ठहरने का कारण पूछा तो उसने बताया कि उसका अस्पताल में ऑपरेशन हुआ है। गरीब लोग हैं रात में कहां रहते, देर से छुट्टी हुई, इसलिए यहां से सुबह को निकल जाएंगे। रेलवे स्टेशन के बाहर जल रहे अलाव पर भी 10-15 लोग सर्दी को दूर करने का प्रयास करते दिखाई दिए।

 टीम इसके बाद साईधाम मंदिर पर पहुंची। यहां बनी दुकानों के बाहर खुले में ही लाइन लगाए बड़ी संख्या में लोग पड़े मिले। इनमें भिक्षा मांगने वाले लोग अधिक दिखाई दिए। इसके बाद टीम रेलवे स्टेशन के बाहर ही बने शेल्टर होम पर पहुंची। यहां एक सिक्योरिटी गार्ड जिसने अपना नाम मनीष बताया। उसने बताया कि शेल्टर होम में 46 बेड हैं, जो सभी भर चुके हैं। शेल्टर होम में अंदर घूमने पर पता चला कि पांच बेड खाली पड़े हैं। इस पर जवाब मिला कि कुछ मजदूर ऐसे हैं, जो एक बेड पर दो सो गए हैं। शिवचौक, मीनाक्षी चौक पर रात्रि में अलाव जलते मिले और काफी संख्या में लोग हाथ सेंकते पाए गए।  


पशुओं के लिए भी कोई आसरा नहीं
मुजफ्फरनगर। पशुओं के लिए कोई आसरा नहीं है। शहर के भोपा रोड पर सर्दी में एक कूड़े के ढेर पर बैठे तीन गोवंश ठंड में सिकुड़े हुए मिले।

रैन बसेरे में दे रहे सुविधा: एडीएम
मुजफ्फरनगर। एडीएम वित्त आलोक कुमार का कहना है कि रैन बसेरा लगातार चल रहा है। यह प्रयास है कि लोग खुले में रात न बिताकर शेल्टर होम में बिताए। अलाव की व्यवस्था नगर पालिका लगातार कर रही है। गोवंश के लिए जगहों का निर्धारण हो रहा है, इन्हें भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाएगा। 
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