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गुरुदत्त महाराज आज करेंगे दंडी संन्यास ग्रहण
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मुजफ्फरनगर में शुकतीर्थ में दंडी आश्रम के अधिष्ठता स्वामी गुरुदत्त महाराज।
- फोटो : KHATAULI
मोरना। शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम अधिष्ठता स्वामी गुरुदत्त महाराज बृहस्पतिवार को दंडी संन्यास ग्रहण करेंगे। इस मौके पर देश के कोने-कोने से संत महात्मा और श्रद्धालु पहुंचेंगे।
तीर्थनगरी शुकतीर्थ में दंडी आश्रम के अधिष्ठता स्वामी गुरुदत्त महाराज के शिष्य मनोहर शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार को आश्रम में भव्य आयोजन किया जाएगा। जिसमें सिद्ध, संत महात्माओं, शंकरार्चायों, महामंडलेश्वर के बीच गुरुदत्त महाराज दंडी संन्यास ग्रहण करेंगे। श्रद्धालुओं और संत महात्माओं के लिए विशेष भोजन खिलाने और ठहरने की व्यवस्था जा रही है। आयोजन के दौरान उत्तराखंड हरिद्वार से स्वामी अचूत्यानंद महाराज, ब्रह्मचारी कैलाशानंद महाराज अग्नि अखाड़ा, शंकराचार्य राजराजेश्वर आश्रम महाराज, स्वामी प्रबोध आश्रम बिहारघाट, मध्यप्रदेश भानुपुरा पीठ ज्ञानानंद तीर्थ महाराज आदि संत इसमें शामिल होंगे।
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किसान परिवार में जन्मे बालक को सिद्ध संत ने शिष्य बनाया
उत्तर प्रदेश के जिला संभल तहसील गुनोर के गंगा किनारे जिजोंड़ा गांव में रहने वाले दुर्गा प्रसाद के यहां उनकी पत्नी गंगादेई से स्वामी गुरुदत्त महाराज का जन्म पांच पुत्रों में 1934 को चौथे स्थान पर जन्म हुआ। सबसे बड़े भाई का नाम गणेशजी लाल, राम स्वरुप, गंगा प्रसाद, किशोरी लाल के साथ इन्होंने गांव के प्राइमरी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। तभी गांव के निकट पंजाब के जिला होशियारपुर से बेरिस्टर की नौकरी छोड़कर आए स्वामी हरिबाबा महाराज ने हरिबाबा आश्रम की स्थापना की। बचपन से भक्ति के रंग में रंगे स्वामी गुरुदत महाराज ने शिक्षा और घर का त्याग कर हरि बाबा आश्रम में जाकर सेवा करनी प्रारंभ कर दी। इसी बीच इलाहाबाद कुंभ आयोजन में शिष्य गुरुदत्त महाराज को सिद्ध संत स्वामी विष्णु आश्रम महाराज शुकतीर्थ दंडी आश्रम ले आए। जहां पर गुरुदत्त महाराज ने तीन बार पुरुषचरण गायत्री मंत्रों को उच्चारण किया। एक बार के पुुरुषचरण में 27 लाख गायत्री मंत्रों का उच्चारण किए जाने का प्रावधान है। ज्ञान और भक्ति की दीक्षा देकर दंडी आश्रम का पीठाधीश्वर बनाकर अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।
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तीर्थनगरी शुकतीर्थ में दंडी आश्रम के अधिष्ठता स्वामी गुरुदत्त महाराज के शिष्य मनोहर शर्मा ने बताया कि बृहस्पतिवार को आश्रम में भव्य आयोजन किया जाएगा। जिसमें सिद्ध, संत महात्माओं, शंकरार्चायों, महामंडलेश्वर के बीच गुरुदत्त महाराज दंडी संन्यास ग्रहण करेंगे। श्रद्धालुओं और संत महात्माओं के लिए विशेष भोजन खिलाने और ठहरने की व्यवस्था जा रही है। आयोजन के दौरान उत्तराखंड हरिद्वार से स्वामी अचूत्यानंद महाराज, ब्रह्मचारी कैलाशानंद महाराज अग्नि अखाड़ा, शंकराचार्य राजराजेश्वर आश्रम महाराज, स्वामी प्रबोध आश्रम बिहारघाट, मध्यप्रदेश भानुपुरा पीठ ज्ञानानंद तीर्थ महाराज आदि संत इसमें शामिल होंगे।
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किसान परिवार में जन्मे बालक को सिद्ध संत ने शिष्य बनाया
उत्तर प्रदेश के जिला संभल तहसील गुनोर के गंगा किनारे जिजोंड़ा गांव में रहने वाले दुर्गा प्रसाद के यहां उनकी पत्नी गंगादेई से स्वामी गुरुदत्त महाराज का जन्म पांच पुत्रों में 1934 को चौथे स्थान पर जन्म हुआ। सबसे बड़े भाई का नाम गणेशजी लाल, राम स्वरुप, गंगा प्रसाद, किशोरी लाल के साथ इन्होंने गांव के प्राइमरी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। तभी गांव के निकट पंजाब के जिला होशियारपुर से बेरिस्टर की नौकरी छोड़कर आए स्वामी हरिबाबा महाराज ने हरिबाबा आश्रम की स्थापना की। बचपन से भक्ति के रंग में रंगे स्वामी गुरुदत महाराज ने शिक्षा और घर का त्याग कर हरि बाबा आश्रम में जाकर सेवा करनी प्रारंभ कर दी। इसी बीच इलाहाबाद कुंभ आयोजन में शिष्य गुरुदत्त महाराज को सिद्ध संत स्वामी विष्णु आश्रम महाराज शुकतीर्थ दंडी आश्रम ले आए। जहां पर गुरुदत्त महाराज ने तीन बार पुरुषचरण गायत्री मंत्रों को उच्चारण किया। एक बार के पुुरुषचरण में 27 लाख गायत्री मंत्रों का उच्चारण किए जाने का प्रावधान है। ज्ञान और भक्ति की दीक्षा देकर दंडी आश्रम का पीठाधीश्वर बनाकर अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।

मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में स्थित दंडी आश्रम का मुख्य द्वार।- फोटो : KHATAULI
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