फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   GIC's Alumni Conference

गुरुजनों के दर्शन से अभिभूत हुए पुरातन विद्यार्थी 

Tue, 23 Jan 2018 12:28 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर Updated Tue, 23 Jan 2018 12:28 AM IST
विज्ञापन
GIC's Alumni Conference
जीआईसी में गुरु का अभिनंदन करता शिष्य। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
गुरुजनों के दर्शन कर श्रद्धा से पुरातन छात्र नतमस्तक हो गए। विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा हुई। यह गौरवान्वित क्षण जीआईसी के शताब्दी समारोह में साक्षी बने। पूर्व विद्यार्थियों ने जीवन की कामयाबी में कॉलेज के शिक्षकों के मार्गदर्शन और संस्था के अनुशासित माहौल को याद किया। 
विज्ञापन


स्थापना के सौ वर्ष पूरे कर चुके शहर के राजकीय इंटर कॉलेज में सोमवार को गुरु-शिष्य परंपरा का समागम हुआ। पुरातन छात्र उल्लासित मन से कॉलेज पहुंचे और गुरुजनों को प्रणाम कर चरण स्पर्श किया। समारोह का शुभारंभ सरस्वती पूजन और वैदिक मंत्रों से यज्ञ में आहूतियां अर्पित कर किया गया।
विज्ञापन


पूर्व प्राचार्य डॉ एमपी सिंह, प्रधानाचार्य रमेशचंद शर्मा और राजीव मोहन गोयल ने यज्ञमान का दायित्व निभाया। पुरातन छात्रों ने अपने शिक्षकों को शॉल और उपहार देकर अभिनंदन किया। जीआईसी के पूर्व विद्यार्थियों ने अपने संस्मरण सुनाए। राकेश शर्मा ने कहा कि इस संस्था में पढ़ना गौरव की बात थी। यज्ञदत्त आर्य ने कहा कि करियर में सफलता के पीछे जीआईसी के अध्यापकों की शिक्षा प्रणाली अहम रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मोहम्मद मारुफ, नवीन गोयल, दीपक कुमार, अनिमेष सिंघल, राकेश मित्तल, राकेश शर्मा, डॉ प्रदीप तोमर, मोहम्मद रहमान, डॉ वीपी जैन आदि ने अपनी यादें बयां की। सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों ने देश भक्ति, राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। प्रधानाचार्य रमेशचंद शर्मा एवं अतिथियों ने 68 पुरातन छात्रों को शताब्दी स्मारिका एवं प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

संस्था की ओर से सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की अमूल्य सेवाओं का अभिनंदन किया गया। साथियों को देख कर विद्यार्थियों ने खूब हंसी-ठिठौली की। लंबे अरसे बाद मिले गुरुजनों और शिष्यों की आत्मीयता देख हर कोई भाव-विभोर हो गया। 

शिक्षकों के आदर्शों से  मिलती है प्रेरणा: जेडी 
जीआईसी के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि सहारनपुर मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने कहा कि मेहनत से ही जीवन में कामयाबी मिलती है। विद्यार्थी गुरुजनों के आदर्शों से प्रेरणा लें। 

जेडी चतुर्वेदी ने नियमित रूप से विद्या अध्ययन करने से परिणाम भी अच्छा ही मिलता है। जीआईसी ने छात्रों के व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। विद्यार्थी सफलता का शॉर्टकट नहीं ढूंढें, बल्कि लगन, समर्पण और परिश्रम से आगे बढ़ें। शास्त्रों में गुरु का स्थान ईश्वर से ऊंचा बताया गया है।

भारतीय संस्कृति में विद्या दान की महिमा बताई गई है। शिक्षा का व्यावसायीकरण नहीं होना चाहिए। विदेशी संस्कृति से बचें। डायट प्राचार्य भीम सिंह ने कहा कि जीआईसी की गरिमा को पुन: स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि भावी पीढ़ी का सर्वांगीण विकास हो सके। डीआईओएस मुनेश कुमार ने जीआईसी ने विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। पुरातन श्रेष्ठ परंपराओं को जीवित करना होगा।

पूर्व प्राचार्य डॉ एमपी सिंह ने कहा कि मन से किया काम सफलता देता है। पुरातन छात्र एवं राज्यसभा सदस्य फ्रांसिस फैंथम ने जीआईसी के प्रशासनिक भवन के निर्माण में 15 लाख रुपये की सांसद निधि दी थी। बीएसए चंद्रकेश सिंह यादव ने जीआईसी की प्रतिष्ठा को बढ़ाने का आह्वान किया।

इस मौके पर जेडी ने जीआईसी की शताब्दी वर्ष स्मारिका का विमोचन किया। संचालन शिक्षक विपिन त्यागी, विनय यादव, अनवार हनकी ने संयुक्त रूप से किया। नितिन कुमार, ललित मोहन गुप्ता, संजय भटनागर, नेहा गोयल, प्रमोद कुमार, नरेंद्र श्रृंगी, सरताज अली, खुशबू, सुप्रिया आदि का सहयोग रहा। 

पुरानी यादों में खो गए जीआईसी के छात्र 
- वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व एडीजीसी राजबहादुर सिंह ने कहा कि पुरानी यादें ताजा हो गईं। वर्ष 1967 में पहले बैच में इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने का मौका मिला। 1961 में कक्षा सात में प्रवेश लिया था। मेरिट के आधार पर एडमिशन मिलता था। छात्रावास की मैस में घंटी के अनुशासन पर विद्यार्थी भोजन करने जाते थे। 

- जनता इंटर कॉलेज गंगधाड़ी खतौली के प्रबंधक डॉ सुरेशचंद्र शर्मा बताते हैं कि 1965 से 1970 तक संस्था का विद्यार्थी रहा। जीआईसी में पढऩा फख्र की बात होती थी। छात्रावास के वार्डन जगरोशन लाल का अनुशासन बेहद सख्त था। हर साल खेलों की परंपरा थी, जिसमें खिलाड़ी चमकते थे। 

- जीआईसी के पूर्व व्यायाम शिक्षक अशोक कुमार वर्मा कहते हैं कि जीआईसी में गुरु-शिष्य परंपरा का स्वर्णिम इतिहास है। खादी बोर्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ यशवीर सिंह, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं एमएलसी वीरेंद्र सिंह, आईएफएस अरविंद कुमार, डॉ सुनील कुमार जैन, डॉ दिलीप कुमार लखनऊ, जिला बार संघ के पूर्व महामंत्री ब्रजपाल सिंह डबास यहां के विद्यार्थी रह चुके हैं। 


- जीआईसी के पीटीआई प्रमोद कुमार इसी संस्था के छात्र रहे हैं। गुरुजन समर्पण भाव से विद्यार्थियों की योग्यता को निखारते थे। यहीं का छात्र होकर वर्ष 2006 में शिक्षक बनने का मौका मिला। यह उपलब्धि जीवनभर याद रहेगी। अंग्रेज अफसरों ने भी तत्कालीन प्राचार्य रामशरण मिश्रा की शिक्षा व्यवस्था का लोहा माना था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed