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Muzaffarnagar News: डॉन बनने की ख्वाहिश में बजरंगी से दोस्ती और मूंछ से अदावत

Thu, 08 Jun 2023 12:47 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jun 2023 12:47 AM IST
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Friendship with Bajrangi and feud with mustache in the desire to become a don
- बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या से जीवा को लगा था सबसे बड़ा झटका
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। देहरादून से दिल्ली के बीच संपत्तियों के विवाद में कुख्यात संजीव जीवा और सुशील मूंछ के बीच अदावत रही। जीवा ने मुन्ना बजरंगी से हाथ मिलाया तो दोनों के बीच गैंगवार छिड़ी। पांच साल पहले बागपत जेल में बजरंगी की हत्या से जीवा को बड़ा झटका लगा था।

अपराध की दुनिया का खुद को बादशाह साबित करने के लिए संजीव जीवा ने एक के बाद एक बड़ी वारदात अंजाम दी। 10 फरवरी, 1997 में फर्रुखाबाद में पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रहमदत्त द्विवेदी की हत्या से जीवा का नाम अपराध की दुनिया में गूंजा। हत्या, फिरौती, जानलेवा हमले के अलावा जीवा ने विवादित संपत्तियों पर कब्जे शुरू किए। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचाल, देहरादून, रुडक़ी, गाजियाबाद और दिल्ली तक जीवा का साम्राज्य बढ़ता गया। पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी का साथ मिला तो जीवा की ख्वाहिशों को और अधिक पंख लग गए। जीवा और बजरंगी को 2005 में गाजीपुर के भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में आरोपी बनाया गया। संपत्तियों पर कब्जे को लेकर जीवा की कुख्यात सुशील मूंछ से अदावत जगजाहिर रही। बागपत जेल में हत्या से पहले मुन्ना बजरंगी अपने साथी जीवा के साथ मिलकर उत्तराखंड में पैर पसा रहा था, लेकिन यहां पहले ही सुशील मूंछ का कब्जा था। ऐसे में दोनों के बीच गैंगवार भी हुई।
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13 साल पहले जिला जेल में बिताए थे दो दिन
मुजफ्फरनगर। वर्ष 1995 में पहला अपराध लूट व हत्या का करने के बाद वापस मुड़ कर न देखने वाले शातिर सरगना संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा अपने ही गृह जनपद की जेल में केवल दो दिन ही रहा था। उसका अपराधिक जीवन गैर जनपदों की जेल में बीता और उसके जीवन का अंत भी बुधवार दोपहर गैर जनपद की धरती पर ही हुआ। जीवा के खिलाफ मुजफ्फरनगर व विभिन्न जनपदों में दो दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसके अपराधिक जीवन के दो दिन तीन जुलाई से पांच जुलाई 2010 ऐसे हैं, जो उसने अपने जनपद की जेल में गुजारे। बताते हैं कि तीन जुलाई को उसकी हरिद्वार कोर्ट तथा पांच जुलाई में मुजफ्फरनगर कोर्ट में तारीख थी। उसे नैनी जेल से लाया गया था। हरिद्वार तारीख से लाते समय रात में उसे यहां जेल में रखा गया।
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महावीर चौक पर थी चार करोड़ की संपत्ति
संजीव जीवा का अवैध कारोबार उत्तराखंड, गाजियाबाद, पूर्वांचल में चलता था। पूर्वांचल के सरगनाओं केे साथ उसके दोस्ताना संबंध थे। उसने अवैध कारोबार से जनपद मुजफ्फरनगर के महावीर चौक पर चार करोड़ की लागत से बडा कांप्लेक्स खड़ा किया था। जो उसकी पत्नी पायल माहेश्वरी के नाम था। इसका पता चलने पर नगर कोतवाली पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में दर्ज मुकदमे में उसकी यह संपत्ति की जब्तीकरण की कार्रवाई की थी। इसके बाद अभी तक पुलिस उसकी अन्य संपत्ति की तलाश कर रही हैं।
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